गलत शपथ देकर सरकारी भूमि पर लगा कारखाना किया ध्वस्त, प्राथमिकी दर्ज

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गलत शपथ देकर सरकारी भूमि पर लगा कारखाना किया ध्वस्त, प्राथमिकी दर्ज

Sasaram news.करगहर थाना क्षेत्र के गर्भे गांव में मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति जनजाति योजना का लाभ लेने के लिए लाभार्थी ने गलत शपथ पत्र दिया था.

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मामला-करगहर प्रखंड के गर्भे गांव का, सरकारी भूमि को निजी बता किराये पर ले कारखाना लगाया

डीएम के मौखिक आदेश पर उद्योग महाप्रबंधक ने दर्ज करायी है प्राथमिकी, उद्योग के लिए लोन की होगी रिकवरी

सासाराम कार्यालय/ प्रतिनिधि करगहर.

जिले के करगहर थाना क्षेत्र के गर्भे गांव में मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति जनजाति योजना का लाभ लेने के लिए लाभार्थी ने गलत शपथ पत्र दिया था. पकड़े जाने पर सरकारी भूमि से कारखाना को हटाते हुए उद्योग महाप्रबंधक ने प्राथमिकी दर्ज करायी है. साथ ही कारखाना के लिए लिये लोन की रिकवरी की भी तैयारी में विभाग जुट गया है. दर्ज प्राथमिकी 177/25 के अनुसार जिला उद्योग केंद्र महाप्रबंधक आशीष रंजन ने गर्भे गांव निवासी धर्मेंद्र कुमार हिमांशु के विरुद्ध गलत शपथ देकर सुपर बलवान पशु आहार के उत्पादन के लिए चार लाख रुपये का लोन लेने का आरोप है. उसने कारखाना सरकारी भूमि पर स्थापित कर दिया था. इसकी जानकारी गांव के ही लालजी पासवान की दायर जिला पदाधिकारी सह द्वितीय अपीलीय प्राधिकार रोहतास में शिकायत से हुयी. इस पर सुनवाई के बाद डीएम के मौखिक आदेश पर उद्योग महाप्रबंधक ने प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई की है. इस संबंध में थानाध्यक्ष विजय कुमार ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गयी है. आगे की कार्रवाई की जाएगी.

कारखाना के लिए सरकारी भूमि को निजी बता किराये पर दिया

प्राथमिकी में दिये गए किरायेनामा के अनुसार गांव के राम व्यास राम ने धर्मेंद्र कुमार हिमांशु को उक्त सरकारी जमीन को अपना बता दस वर्ष के लिए प्रतिमाह एक हजार रुपये किराये पर दिया था. किरायानामा में उसने जमीन की चौहद्दी उत्तर में रोड, दक्षिण में राम अधीन महतो, पूरब में राजगृही यादव और पश्चिम में बदुरी पासवान लिखा है. जांच के दौरान अंचलाधिकारी ने कारखाना को सरकारी भूमि स्थापित पाया था, जिस पर कार्रवाई कर कारखाना को सरकारी भूमि से हटवा दिया गया है.

ढाई वर्ष बाद पता चला कि सरकार भूमि पर है कारखाना

उद्योग महाप्रबंध के कार्रवाई के बाद क्षेत्र में चर्चा होने लगी है कि अगर सरकारी भूमि को लेकर शिकायत नहीं होती, तो प्रशासनिक अधिकारियों को इसका पता नहीं चलता. जबकि उद्योग लगाने के दौरान कागजातों से लेकर भूमि तक की जांच होती है. तो, इस प्रकरण में कई लोगों ने चुप्पी साधी होगी, इससे इन्कार नहीं किया जा सकता.

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Anurag Sharan

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