खाली बैठे शिक्षकों को पोषक क्षेत्र के स्कूलों में पढ़ाने के लिए भेजें एचएम : डीपीओ

Published by :ANURAG SHARAN
Published at :21 Jan 2026 4:48 PM (IST)
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खाली बैठे शिक्षकों को पोषक क्षेत्र के स्कूलों में पढ़ाने के लिए भेजें एचएम : डीपीओ

शिक्षक नहीं मानें, तो दें लिखित आदेश, फिर भी नहीं माने तो होगी कार्रवाई

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नयी शिक्षा नीति में बढ़ा दी गयी है हाइस्कूलों की जिम्मेदारी

बगल या प्रांगण स्थित मध्य व प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाने के दिये गये निर्देश

शिक्षक नहीं मानें, तो दें लिखित आदेश, फिर भी नहीं माने तो होगी कार्रवाई

स्कूलों में शौचालय, रोशनी और सफाई की रखें व्यवस्थाजांच में पायी गयी कमी, तो होगी सख्त कार्रवाईफोटो-2- बैठक में शामिल डीपीओ, विभिन्न स्कूलों के प्रधानाध्यापक व अन्य.

प्रतिनिधि, सासाराम ऑफिस

नयी शिक्षा नीति के तहत हाइस्कूल अब केवल अपने प्रांगण तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि अपने पोषक क्षेत्र के स्कूलों के लिए मॉनिटर स्कूल के रूप में कार्य करेंगे. नयी नीति में हाइस्कूल का दायरा और जिम्मेदारी काफी बढ़ा दी गयी है. इसके तहत हाइस्कूल के संसाधनों का उपयोग पोषक क्षेत्र की अन्य स्कूलों में किया जा सकेगा और अन्य स्कूलों के सरप्लस संसाधन हाइस्कूल में लाये जा सकेंगे. इस व्यवस्था के तहत यदि हाइस्कूल में ऐसे शिक्षक हैं, जो कक्षा कक्ष नहीं ले रहे हैं और खाली बैठे हैं, तो उन्हें बगल या प्रांगण में स्थित मध्य स्कूलों में जाकर पढ़ाने का निर्देश दिया जायेगा. यह निर्देश जिला कार्यक्रम पदाधिकारी समग्र शिक्षा अभियान रोहित रोशन ने बुधवार को फजलगंज स्थित डायट परिसर में आयोजित प्रधानाध्यापकों की बैठक में दिया.

बैठक के दौरान डीपीओ ने एचएम को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि यदि शिक्षक मौखिक निर्देश नहीं मानते हैं, तो प्रधानाध्यापक लिखित आदेश जारी करें. प्रत्येक स्कूल में उपलब्ध आदेश पंजी में आदेश निर्गत कर शिक्षक से हस्ताक्षर कराना सुनिश्चित करें. इसके बाद भी यदि कोई शिक्षक आदेश का पालन नहीं करता है, तो उसकी शिकायत बीइओ, डीपीओ या डीइओ को भेजी जाए. लिखित आदेश की अवहेलना करने वाले शिक्षकों के विरुद्ध सामान्य रूप से कार्रवाई होती है, इसलिए प्रधानाध्यापक इस विषय पर विशेष ध्यान दें.

शौचालय, रोशनी और सफाई पर सख्ती

बैठक में स्कूलों की हाउसकीपिंग व्यवस्था को लेकर भी सख्त निर्देश दिये गये. डीपीओ ने कहा कि स्कूल में जितने शौचालय हैं, उसके अनुसार भुगतान किया जा रहा है. इसलिए प्रतिदिन शौचालयों की सफाई कराना अनिवार्य है. यदि सफाई कर्मी अनुपस्थित रहता है, तो उसके वेतन में कटौती की जाए. चार दिन अनुपस्थित रहने पर चार दिन का वेतन काटकर भुगतान किया जाए. किसी भी शौचालय में ताला नहीं होना चाहिए और न ही किसी शिक्षक या पदाधिकारी के लिए शौचालय आरक्षित किया जाए. जांच के दौरान शौचालय बंद या गंदा पाये जाने पर संबंधित स्कूल के एचएम के विरुद्ध कार्रवाई की जायेगी. स्कूलों में रोशनी की कमी नहीं होनी चाहिए.

कंपोजिट ग्रांट के उपयोग के निर्देश

डीपीओ ने बताया कि कंपोजिट ग्रांट से स्कूल के प्रत्येक कक्ष में पर्याप्त लाइट और गर्मी के मौसम में पंखों की व्यवस्था की जाए. भवन की हल्की-फुल्की मरम्मती, चौक और डस्टर की उपलब्धता भी इसी राशि से सुनिश्चित की जाए. प्रत्येक स्कूल को 25 हजार से एक लाख रुपये तक कंपोजिट ग्रांट मिलता है, जिसका समुचित उपयोग आवश्यक है.

प्रबंध समिति की नियमित बैठक पर जोर

डीपीओ ने कहा कि हर माह या तीन माह में स्कूल प्रबंध समिति की बैठक अध्यक्ष की अध्यक्षता में कराने की कोशिश करें. बैठक में किये गये खर्च की संपुष्टि करायी जाए और नये कमरों के निर्माण या बड़े कार्यों के लिए समिति से अनुमति ली जाए. एचएम 50 हजार रुपये तक स्वयं खर्च करने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन इससे अधिक राशि के लिए अनुमति लेना जरूरी है. सभी खर्चों की संपुष्टि अनिवार्य है. बैठक में संभाग प्रभारी प्रभात, हर्ष विजय वर्धन, सुधीर चौबे सहित डेहरी अनुमंडल के विभिन्न उच्च और माध्यमिक स्कूलों के प्रधानाध्यापक मौजूद रहे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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