Chhapra News : चैत्र नवरात्रि में गायत्री शक्तिपीठ बना ध्यान-साधना का केंद्र

Published by : ALOK KUMAR Updated At : 04 Apr 2025 10:30 PM

विज्ञापन

मस्तीचक स्थित गायत्री शक्तिपीठ चैत्र नवरात्रि में साधना और ध्यान का केंद्र बना हुआ है. गुजरात, मुंबई, बंगलोर, कोलकाता जैसी जगहों से आए एक सौ से ज्यादा साधक इन दिनों यहां गायत्री मंत्र का जाप, लेखन, मौन साधना और ध्यान कर रहे हैं.

विज्ञापन

छपरा. मस्तीचक स्थित गायत्री शक्तिपीठ चैत्र नवरात्रि में साधना और ध्यान का केंद्र बना हुआ है. गुजरात, मुंबई, बंगलोर, कोलकाता जैसी जगहों से आए एक सौ से ज्यादा साधक इन दिनों यहां गायत्री मंत्र का जाप, लेखन, मौन साधना और ध्यान कर रहे हैं. गायत्री परिवार के संस्थापक पं श्रीराम शर्मा आचार्य की प्रेरणा से उनके शिष्य पंडित रमेशचन्द्र शुक्ला ने 1982 में मस्तीचक में गायत्री शक्ति पीठ की स्थापना की थी. ढ़ाई सौ साल पुरानी यह तपोस्थली मनोकामना सिद्धि पीठ के रूप में जाना जाता है. युगऋषि श्रीराम शर्मा आचार्य चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित इस शक्तिपीठ में चैत्र नवरात्रि पर पूरे दिन ध्यान, साधना, मंत्रोच्चार, आरती, हवन, भजन आदि का सिलसिला चलता है. कई साधक नवरात्रि में मौन साधना कर रहे हैं. शक्ति पीठ के प्रबंधक विकास शर्मा ने बताया कि सुबह चार बजे गायत्री माता के मुख्य गर्भगृह का पट खुलता है. 4.30 बजे जागरण आरती होती है. उसके बाद दो घंटे तक साधक गायत्री मंत्र का जाप करते हैं. सुबह 6.30 बजे से हवन होता है. उसके बाद शिवलिंग पर रुद्राभिषेक किया जाता है. दोपहर विश्राम के बाद अपराह्न चार से पुनः गायत्री मंत्र जाप के बाद संध्या छह बजे से आरती होती है. तत्पश्चात रामचरितमानस का संगीतमय गायन के बाद संध्या 8.30 बजे महाप्रसाद वितरण किया जाता है. ट्रस्ट के द्वारा सुदूर राज्यों से आए साधकों के लिए रहने-खाने आदि की पूरी व्यवस्था की गई है. श्री शर्मा ने बताया कि प्रत्येक साल ट्रस्ट साधकों को सारी व्यवस्थाएं निःशुल्क मुहैया कराता है. अहमदाबाद से आए साधक प्रवीण भाई पटेल ने बताया कि 2010 से वे सपत्नी यहां आ रहे हैं. आस्ट्रेलिया में रह रहे उनके बेटा-बहू भी यहां आ चुके हैं.

गायत्री मंदिर से शुरू हुआ अखंड ज्योति आई हॉस्पीटल

कहते हैं कि लगभग 70 वर्षों पूर्व मस्तीचक स्थित नागा साधुओं के दो सौ साल पुराने आश्रम में हरिहर बाबा के दिव्य व्यक्तित्व से प्रभावित पंडित रमेशचन्द्र शुक्ला सबकुछ छोड़कर उनके सानिध्य में चले गये. कालांतर में उन्हीं की प्रेरणा से गायत्री परिवार के संस्थापक पं श्रीराम शर्मा के शिष्य बने. गायत्री शक्तिपीठ बने चुके आश्रम में ही शुक्ला बाबा ने वर्ष 1991 से नेत्र शिविर और वर्ष 2005 में अपने शिष्य मृत्युंजय तिवारी के सहयोग से अखंड ज्योति आई हॉस्पीटल की नींव रखी. बिहार के पूर्णिया, समस्तीपुर जिलों के अतिरिक्त यूपी के बलिया में अखंड ज्योति आई हॉस्पीटल संचालित हो रहे हैं. बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुल 45 प्राथमिक नेत्र जांच केन्द्र संचालित हो रहे हैं. मस्तीचक में 500 बेड का नया अखंड ज्योति आई हाॅस्पीटल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पिछले साल शुरू हुआ. 10 एकड़ में बने आंखों के इस सुपर स्पेशियलिटी आई हाॅस्पीटल में आंखों के 11 विभाग हैं और 11 अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर हैं. 50 नेत्र रोग विशेषज्ञों की टीम यहां रोजाना औसतन 700 आंखों की सर्जरी करती है. अखंड ज्योति आई हॉस्पिटल द्वारा अब तक 10 लाख आंखों की सर्जरी की जा चुकी है. इस अस्पताल में 80 फीसदी ऑपरेशन निःशुल्क किए जाते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
ALOK KUMAR

लेखक के बारे में

By ALOK KUMAR

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन