उत्तर बिहार के प्रसिद्ध सूर्य मंदिरों में शुमार है गड़खा के कोठिया नरांव का सूर्य मंदिर

Author Alok kumar
Updated:
विज्ञापन
उत्तर बिहार के प्रसिद्ध सूर्य मंदिरों में शुमार है गड़खा के कोठिया नरांव का सूर्य मंदिर

सीमावर्ती गड़खा प्रखंड के कोठिया नरांव स्थित सूर्य मंदिर प्रदेश के प्रमुख सूर्य मंदिरों में शुमार है. यह मंदिर पटना से 60 किमी और छपरा से 20 किमी की दूरी पर स्थित है.

विज्ञापन

दिघवारा. सीमावर्ती गड़खा प्रखंड के कोठिया नरांव स्थित सूर्य मंदिर प्रदेश के प्रमुख सूर्य मंदिरों में शुमार है. यह मंदिर पटना से 60 किमी और छपरा से 20 किमी की दूरी पर स्थित है. अवतारनगर थाना से आगे मूसेपुर चौक से होकर श्रद्धालु आसानी से इस मंदिर तक पहुंच सकते हैं. मंदिर अपनी भव्यता, धार्मिक गरिमा और आस्था के लिए प्रसिद्ध है. यहां आने वाले भक्तजन अपनी सभी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं. छठ के समय मंदिर परिसर में सूर्योपासकों और व्रतियों की अप्रत्याशित भीड़ उमड़ती है, जिससे पूरा परिसर छठमय नजर आता है. सूर्य मंदिर का ऐतिहासिक गौरव पुराना है. श्लोक दास मुंशी महाराज ने इस गांव में श्रीराम मंदिर और पोखर का निर्माण कराया. उनके निधन के बाद वर्ष 1952 में रामदास जी महाराज ने श्रीराम महायज्ञ कराया और मंदिर को श्रीराम जानकी मंदिर के रूप में प्रतिष्ठित किया गया. वर्ष 1990 में गांववासियों और संत महात्माओं के सहयोग से सूर्य मंदिर की स्थापना हुई. इसी वर्ष श्री श्री 1008 रामदासजी महाराज व अन्य त्यागी साधुओं के आशीर्वाद से सूर्य देव की प्रतिमा स्थापित की गयी. इस समय तात्कालिक जिलाधिकारी और एसपी भी इस आयोजन के साक्षी बने. मंदिर के रखरखाव में गांववासियों की सक्रिय भूमिका होती है और इसकी स्वच्छता और सुंदरता ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास से बनी रहती है. मंदिर परिसर में पुष्प वाटिका, विशाल तालाब, गौशाला और हरियाली मौजूद है, जो प्राकृतिक छटा बिखेरती है. तालाब के जल की निर्मलता भी उल्लेखनीय है और सामान्य दिनों में कपड़े धोने आदि के कार्यों पर मनाही है. छठ के दौरान मंदिर में विशेष सजावट और व्रतियों के लिए सभी इंतजाम किये जाते हैं. मंदिर के सामने स्थित पोखर और इसके चारों ओर का दृश्य व्रतियों और श्रद्धालुओं को मनोरम अनुभव कराता है. सूर्य मंदिर में छठ करने के लिए दूसरे प्रदेशों से भी भक्तजन पहुंचते हैं. अपनी मन्नतों की पूर्ति की कामना करते हुए श्रद्धालु यहां अर्घ दान करते हैं. कई श्रद्धालु मंदिर परिसर में ही रहते हैं और चार दिवसीय अनुष्ठान के बाद पूजा अर्चना कर घर लौटते हैं। इस दौरान संत महात्माओं का जमावड़ा भी लगता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
Alok Kumar

लेखक के बारे में

By Alok Kumar

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन