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ठंड और कुहासे से जंक्शन पर सवारी वाहनों की भारी कमी, यात्रियों को हो रही परेशानी

शाम छह बजे के बाद छपरा जंक्शन पर उतरे यात्रियों को स्टेशन के बाहरी परिसर से अपने घर जाने के लिए सवारी वाहनों का काफी देर तक इंतजार करना पड़ रहा है.

छपरा. शाम छह बजे के बाद छपरा जंक्शन पर उतरे यात्रियों को स्टेशन के बाहरी परिसर से अपने घर जाने के लिए सवारी वाहनों का काफी देर तक इंतजार करना पड़ रहा है. खासकर वैसे यात्री जिन्हें ट्रेन से स्टेशन पर आने के उपरांत 15 से 20 किलोमीटर दूर ग्रामीण क्षेत्र में जाना है. वैसे यात्रियों को इ-रिक्शा, ऑटो या अन्य कोई सवारी गाड़ी उपलब्ध नहीं हो पा रही है. जिस कारण मजबूरी में यात्रियों को या तो रात भर स्टेशन पर गुजारना पड़ रहा है या फिर अपने घर फोन कर यात्री परिजनों को बुला रहे हैं. इसके बाद परिजन गांव से बाइक या कोई दूसरी गाड़ी लेकर आ रहे हैं. तब यात्री अपने घर तक पहुंच पा रहे हैं. सर्कुलेटिंग एरिया के बाहर जितने भी इ-रिक्शा, ऑटो, टैक्सी खड़े रहते हैं. उन सभी के चालक शाम छह बजे के बाद सुदूर ग्रामीण इलाकों में जाने से इनकार कर देते हैं. चालकों का कहना है कि शाम छह बजे के बाद ठंड अधिक बढ़ जा रही है. वापसी में भी काफी परेशानी होती है. ऐसे में चालक स्टेशन से 15 से 20 किलोमीटर दूरी के लिए नहीं जाते हैं. कई बार यात्री वाहन रिजर्व कर चलने की बात कहते हैं. फिर भी चालक तैयार नहीं होते हैं. वहीं सुबह में भी विभिन्न ट्रेनों से यात्री कुहासे के कारण स्टेशन पर उतरने के बाद घर नहीं जा पा रहे हैं. उन्हें तीन से चार घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है. कुहासा फटने के बाद ही सवारी गाड़ी उपलब्ध हो पा रही है.

रविवार को शाम में दिखी सवारी गाड़ी की कमी

ठंड व कुहासे का असर रविवार को छपरा जंक्शन से खुलने वाले ऑटो, टेम्पू पर भी साफ तौर पर देखने को मिला. दिन ढलते ही जंक्शन परिसर में सन्नाटा पसरने लगा. विशेषकर सर्कुलेटिंग एरिया, जहां आमतौर पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहती हैं, शाम पांच बजे के बाद लगभग खाली नजर आया. ठंड के कारण न केवल यात्रियों की संख्या घटी, बल्कि परिवहन पर भी इसका सीधा असर पड़ा. वही देर शाम छपरा जंक्शन पर पहुंचने वाली कई ट्रेनों से उतरने वाले यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. ग्रामीण क्षेत्रों में जाने वाले यात्रियों के लिए वाहन उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें जंक्शन परिसर में ही रात गुजारने को विवश होना पड़ा. कोपा, खैरा, डोरीगंज समेत आसपास के ग्रामीण इलाकों में जाने वाले यात्री ठंड में खुले आसमान के नीचे या प्लेटफॉर्म पर बैठे नजर आये. यात्रियों का कहना था कि ठंड के कारण ऑटो और निजी वाहन चालकों ने जल्दी परिचालन बंद कर दिया, जिससे उन्हें वैकल्पिक साधन नहीं मिल सका. कुछ यात्री अलाव के सहारे ठंड से बचाव करते दिखे, जबकि कई लोग कंबल और गर्म कपड़ों में लिपटे रहे. रेल प्रशासन की ओर से यात्रियों की सुविधा के लिए अलाव की कोई भी व्यवस्था नहीं की गयी थी.

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