सारण में पेपरलेस रजिस्ट्री पर विवाद, 11वें दिन भी 250 कातिब हड़ताल पर, अब तक सिर्फ 5 रजिस्ट्री
कलमबंद हड़ताल में शामिल कार्तिब
सारण में पेपरलेस निबंधन के विरोध में 250 कातिब 11 दिनों से हड़ताल पर हैं, जिससे रजिस्ट्री कार्य ठप है और सरकार को भारी राजस्व का नुकसान हो रहा है।
सारण जिले में 3 अगस्त से पेपरलेस रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. नई व्यवस्था के विरोध में जिले के करीब 250 कातिब कलमबंद हड़ताल पर हैं. 13 अगस्त तक जिले में मात्र पांच रजिस्ट्री होने की जानकारी सामने आयी है. कातिबों का कहना है कि व्यवस्था लागू करने से पहले इसके बारे में व्यापक प्रचार-प्रसार और तकनीकी कमियों को दूर करना जरूरी था.
निबंधन कार्यालयों में पसरा सन्नाटा
सामान्य दिनों में छपरा समेत सभी अनुमंडल के निबंधन कार्यालयों में जमीन की खरीद-बिक्री को लेकर क्रेता-विक्रेता, गवाह और कातिबों की भीड़ रहती थी. लेकिन कातिबों की हड़ताल के कारण कार्यालयों में चहल-पहल कम हो गयी है. इसका असर जमीन की खरीद-बिक्री कराने वाले लोगों पर भी पड़ रहा है. वहीं स्टांप और निबंधन शुल्क के रूप में सरकार को मिलने वाले राजस्व पर भी असर पड़ने की बात कही जा रही है.

नई व्यवस्था की कमियों पर कातिबों ने उठाये सवाल
हड़ताल कर रहे कातिबों ने पेपरलेस रजिस्ट्री की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाये हैं. उनका कहना है कि ट्रांसफर का टाइटल, दोनों पक्षों के हस्ताक्षर, प्रूफ डॉक्यूमेंट, गवाह और पहचान संबंधी व्यवस्था को लेकर स्पष्टता जरूरी है. कातिबों ने सरकार से इन बिंदुओं पर गंभीरता से विचार करने की मांग की है.

भविष्य में विवाद बढ़ने की जतायी आशंका
कातिबों का कहना है कि पुरानी प्रक्रिया में जमीन की चौहद्दी, स्वामित्व और अन्य महत्वपूर्ण विवरण दस्तावेज में दर्ज किये जाते थे. उनका दावा है कि नई व्यवस्था में इन जानकारियों को लेकर व्यावहारिक कठिनाइयां हैं. उनका कहना है कि यदि जरूरी विवरण पर्याप्त तरीके से दर्ज नहीं हुए तो भविष्य में जमीन से जुड़े विवाद और मुकदमे बढ़ सकते हैं. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
आजीविका प्रभावित होने की भी चिंता
कातिबों के अनुसार वे दशकों से जमीन निबंधन से जुड़े दस्तावेज तैयार करने का काम कर रहे हैं. नई व्यवस्था में दस्तावेज लेखन की भूमिका कम होने से उनकी आजीविका प्रभावित होने की आशंका है. कातिबों का कहना है कि सरकार को नई व्यवस्था लागू करने से पहले उनके रोजगार और भविष्य को लेकर भी स्पष्ट नीति बनानी चाहिए.

कातिबों के लिए आय बढ़ने का भी दावा
रजिस्ट्रार अभिषेक कुमार सिंह ने कहा कि नई व्यवस्था में कातिबों के लिए आय के रेट पहले की तुलना में दोगुने किये गये हैं. उन्होंने बताया कि विभाग अधिक से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में काम कर रहा है. रजिस्ट्रार के अनुसार आने वाले दिनों में नई व्यवस्था के बेहतर परिणाम सामने आएंगे.
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कातिबों की प्रमुख मांगें
कातिबों की प्रमुख मांगों में ट्रांसफर टाइटल की व्यवस्था, दोनों पक्षों के हस्ताक्षर, प्रूफ डॉक्यूमेंट, गवाह और पहचान की व्यवस्था शामिल है. इसके अलावा वे नई व्यवस्था का व्यापक प्रचार-प्रसार करने और इसकी व्यावहारिक कमियों को दूर करने की मांग कर रहे हैं.

17 अगस्त से पूरे बिहार में लागू होगी व्यवस्था
कातिबों का कहना है कि 17 अगस्त से पेपरलेस रजिस्ट्री की व्यवस्था पूरे बिहार में लागू होनी है. उनका दावा है कि यदि उनकी मांगों और बतायी जा रही कमियों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. कातिबों ने कहा कि लंबे समय तक हड़ताल जारी रहने पर निबंधन विभाग के कामकाज और राजस्व पर असर पड़ सकता है.

पेपरलेस रजिस्ट्री का क्या है उद्देश्य
निबंधन विभाग के अनुसार पेपरलेस रजिस्ट्री का उद्देश्य जमीन की रजिस्ट्री प्रक्रिया को डिजिटल बनाना और कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम करना है. विभाग का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था से प्रक्रिया सरल और पारदर्शी होगी. साथ ही फर्जी दस्तावेजों और जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े को रोकने में भी मदद मिलेगी.

रजिस्ट्रार ने कहा- नई व्यवस्था में कोई तकनीकी परेशानी नहीं
छपरा निबंधन कार्यालय के रजिस्ट्रार अभिषेक कुमार सिंह ने कातिबों की आपत्तियों से अलग राय रखी है. उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था में पहले से ज्यादा सुविधा है. उनके अनुसार इसमें किसी तरह की तकनीकी परेशानी नहीं है और आम लोगों तथा जमीन की खरीद-बिक्री करने वालों को इसका फायदा मिलेगा.
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