छपरा में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की यादों का गवाह साहेबगंज चौक आज बदहाल, इतिहास सहेजने की योजना फाइलों में दफन

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बॉटम. आजादी के आंदोलन का साक्षी रहा शहर का साहेबगंज चौक आज है उपेक्षित

फोटो- शहर का साहेबगंज चौक फोटो - चौक पर लगा जलजमाव

छपरा का साहेबगंज चौक, जो कभी स्वतंत्रता संग्राम का केंद्र था, आज प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज के सेनानायकों से जुड़े इस ऐतिहासिक स्थल की पहचान अतिक्रमण और गंदगी से धूमिल हो रही है।

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छपरा शहर का साहेबगंज चौक देश के स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल माना जाता है. यह वही स्थान है, जहां अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आजादी की अलख जगाई गई थी. स्थानीय इतिहासकारों के अनुसार, इसी चौक से जिले के लोगों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आह्वान पर देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने का संकल्प लिया था. बावजूद इसके, आज यह ऐतिहासिक चौक प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार बना हुआ है.

आजाद हिंद फौज के सेनानायकों ने यहीं किया था संबोधन

इतिहासकारों और स्थानीय लोगों के अनुसार, देश की आजादी से पहले आजाद हिंद फौज के तीन प्रमुख सेनानायक—जनरल सहगल, जनरल ढिल्लन और जनरल शाहनवाज—छपरा आए थे. नेताजी सुभाष चंद्र बोस की संदेहास्पद मृत्यु की खबर के बाद उन्होंने इसी चौक पर विशाल जनसभा को संबोधित किया था. उस समय पूरे शहर, खासकर बंगाली समाज के युवाओं ने उनका जोरदार स्वागत किया था.

नेताजी से जुड़ी हैं इस चौक की कई ऐतिहासिक यादें

स्थानीय बुजुर्गों का मानना है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का साहेबगंज इलाके से गहरा जुड़ाव रहा है. कहा जाता है कि अपने छपरा प्रवास के दौरान वह साहेबगंज स्थित डॉ. दीनानाथ के आवास पर ठहरे थे. वहीं, स्वतंत्रता सेनानी स्वर्णालता देवी और उनके परिवार का भी नेताजी से विशेष संबंध रहा. वर्षों तक इस परिवार की ओर से छपरा में नेताजी की जयंती धूमधाम से मनाई जाती रही.

स्मारक बनाने की योजना आज भी अधूरी

कुछ वर्ष पहले साहेबगंज चौक का नाम बदलकर 'नेताजी सुभाष चंद्र बोस चौक' करने और यहां उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की योजना बनाई गई थी. तत्कालीन विधायक डॉ. सीएन गुप्ता की पहल पर पुलिस चौकी, पार्क और भव्य स्मारक के निर्माण का प्रस्ताव भी तैयार हुआ, लेकिन नगर निगम के पास पहुंचने के बाद यह योजना फाइलों में ही सिमटकर रह गई.

अतिक्रमण और गंदगी से खो रही ऐतिहासिक पहचान

जिस चौक को पर्यटन और ऐतिहासिक धरोहर के रूप में विकसित किया जाना चाहिए था, वहां आज अवैध ई-रिक्शा और ऑटो स्टैंड संचालित हो रहा है. नालियों के जाम रहने से सालभर जलजमाव और कीचड़ की समस्या बनी रहती है, जिससे स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों को भारी परेशानी होती है.

इतिहास से दूर होती जा रही नई पीढ़ी

कभी इस चौक पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर वाला एक स्मारक भी मौजूद था, लेकिन रखरखाव के अभाव में उसे हटा दिया गया. अब उस स्थान पर फुटपाथी दुकानें लग रही हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस ऐतिहासिक स्थल का संरक्षण और विकास नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियां छपरा के इस गौरवशाली इतिहास से पूरी तरह अनजान रह जाएंगी.

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