छपरा में वायरल बुखार के मरीज बढ़े, डेंगू को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, 10 बेड का वार्ड तैयार
छपरा सदर अस्पताल में बना डेंगू वार्ड
छपरा जिले में वायरल बुखार के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है. संभावित डेंगू के खतरे से निपटने के लिए 10 बेड का विशेष वार्ड तैयार कर लिया गया है. जानें क्या हैं बचाव के उपाय और स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां.
dengue in saran: जिले में वायरल बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. सदर अस्पताल के ओपीडी के अलावा जिले के विभिन्न निजी अस्पतालों में भी तेज बुखार से पीड़ित मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं. सदर अस्पताल के जांच घर के साथ निजी पैथोलॉजी सेंटरों में भी मरीजों के सैंपल की जांच की जा रही है. कुछ मरीजों में डेंगू के प्रारंभिक लक्षण भी सामने आए हैं. इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू की संभावित चुनौती से निबटने की तैयारी शुरू कर दी है.
सदर अस्पताल में 10 बेड का डेंगू वार्ड तैयार
सदर अस्पताल समेत जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट रहने का निर्देश दिया गया है. डेंगू और चिकनगुनिया से बचाव को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं. सिविल सर्जन के निर्देश पर सदर अस्पताल के प्रबंधक राजेश्वर प्रसाद ने शनिवार को अस्पताल के डेंगू वार्ड का निरीक्षण किया. वार्ड में 10 बेड उपलब्ध कराए गए हैं. हालांकि, अब तक इस वार्ड में डेंगू से पीड़ित एक भी मरीज भर्ती नहीं हुआ है. कुछ वायरल बुखार से पीड़ित गंभीर मरीजों का इलाज इस वार्ड में किया गया है. वार्ड के लिए दो चिकित्सकों की भी नियुक्ति की गयी है.
अनुमंडलीय अस्पतालों में चार और पीएचसी में दो बेड सुरक्षित
सिविल सर्जन ने बताया कि डेंगू एवं चिकनगुनिया नियंत्रण के लिए सदर अस्पताल में 10 बेड, सभी अनुमंडलीय अस्पतालों में चार-चार बेड तथा सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में दो-दो बेड सुरक्षित किए गए हैं. सभी बेड को मेडिकेटेड मच्छरदानी से युक्त किया गया है. मरीजों के उपचार के लिए पर्याप्त मात्रा में आवश्यक दवाओं की व्यवस्था भी सभी अस्पतालों में उपलब्ध करायी गयी है.
रैपिड रिस्पांस टीम और नियंत्रण कक्ष गठित
डेंगू की रोकथाम और प्रभावी नियंत्रण के लिए जिले में रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया गया है. साथ ही एक नियंत्रण कक्ष भी बनाया गया है. डेंगू नियंत्रण के लिए नोडल चिकित्सा पदाधिकारी की नियुक्ति की गयी है. वहीं फॉगिंग और लार्विसाइडल स्प्रे के लिए भी नोडल पदाधिकारी बनाया गया है. स्वास्थ्य विभाग की ओर से संभावित डेंगू मरीजों की पहचान और समय पर उपचार सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है.
सावधान रहें, बरसात में तेजी से पनपते हैं डेंगू फैलाने वाले मच्छर
चिकित्सक डॉ. राजेश रंजन ने बताया कि बरसात के मौसम में डेंगू फैलाने वाले एडिस मच्छर घरों के आसपास रखे टूटे-फूटे बर्तनों, गमलों, पुराने टायरों, छोटे प्लास्टिक या कागज के डिस्पोजेबल कप और नारियल के खोल में जमा बारिश के पानी में अंडे देते हैं. करीब एक सप्ताह में इनसे मच्छर तैयार हो जाते हैं.
उन्होंने बताया कि डेंगू से बचाव के लिए घर के आसपास, छत या घर के अंदर पानी जमा नहीं होने देना चाहिए. पानी के बर्तनों को नियमित रूप से साफ करने के साथ सप्ताह में कम से कम दो बार पानी बदलते रहना चाहिए. एडिस मच्छर साफ पानी में पनपता है और मुख्य रूप से दिन में काटता है.
नगर निगम ने भी शुरू करायी फॉगिंग
डेंगू की संभावित चुनौती को देखते हुए नगर निगम की ओर से भी शहर के कई इलाकों में देर शाम फॉगिंग करायी जा रही है. इसके लिए नगर निगम कर्मियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं. एक क्विक रिस्पांस टीम का भी गठन किया गया है. कई मोहल्लों के लोग नगर निगम में फोन कर अपने इलाके में फॉगिंग कराने की मांग कर रहे हैं. शिकायत और मांग मिलने के बाद नगर निगम की टीम संबंधित इलाके में जाकर फॉगिंग कर रही है.
जलजमाव वाले इलाकों पर विशेष नजर
शहर के कई इलाकों में इस समय भारी जलजमाव की स्थिति बनी हुई है. कई मोहल्लों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण खाली जमीन और अन्य स्थानों पर बारिश का पानी जमा है. ऐसे स्थानों पर डेंगू फैलाने वाले मच्छरों के पनपने का खतरा अधिक है. नगर निगम की ओर से ऐसे जलजमाव वाले इलाकों को चिह्नित कर प्राथमिकता के आधार पर फॉगिंग कराने का निर्देश दिया गया है.
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