सारण: नवस्थापित डिग्री कॉलेजों में योगदान नहीं करने वाले 9 शिक्षकों पर कार्रवाई, वेतन रोकने का आदेश

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डिग्री कॉलेजों में योगदान नहीं देने वाले शिक्षकों के हाजिरी बनाने पर भी लगी रोक

जयप्रकाश विश्वविद्यालय ने नवस्थापित राजकीय डिग्री महाविद्यालयों में योगदान न करने वाले आठ प्रभारी प्राचार्यों और एक शिक्षक सह अर्थपाल पर सख्त कार्रवाई की है. विश्वविद्यालय ने ऐसे शिक्षकों की मूल कॉलेज में उपस्थिति दर्ज करने और 27 जून के बाद उनका वेतन जारी करने पर रोक लगा दी है.

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सारण: जयप्रकाश विश्वविद्यालय (जेपीयू) के अंतर्गत नवस्थापित राजकीय डिग्री महाविद्यालयों में प्रभारी प्राचार्य एवं शिक्षक सह अर्थपाल के पद पर योगदान नहीं करने वाले आठ प्रभारी प्राचार्यों और एक शिक्षक सह अर्थपाल के खिलाफ विश्वविद्यालय प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है. विश्वविद्यालय ने ऐसे शिक्षकों की मूल कॉलेज में उपस्थिति दर्ज करने पर रोक लगाने के साथ 27 जून के बाद से उनका वेतन निर्गत नहीं करने का आदेश जारी किया है.

रजिस्ट्रार ने जारी किया नोटिफिकेशन

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. नारायण दास ने पत्र जारी कर बताया कि प्रमंडल के नवस्थापित राजकीय डिग्री महाविद्यालयों में विश्वविद्यालय के अंगीभूत कॉलेजों के वरीय शिक्षकों को प्रभारी प्राचार्य एवं शिक्षक सह अर्थपाल के रूप में प्रतिनियुक्त किया गया है.

उन्होंने बताया कि नौ ऐसे महाविद्यालय हैं, जहां नियुक्त प्रभारी प्राचार्य एवं शिक्षक सह अर्थपाल ने अब तक योगदान नहीं किया है.

स्पष्टीकरण के बाद भी नहीं किया योगदान

विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस संबंध में 27 जून को संबंधित शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा था. पत्र जारी होने के बाद भी इन शिक्षकों ने संबंधित महाविद्यालयों में योगदान नहीं किया, जबकि अपने मूल कॉलेज में उपस्थिति दर्ज कराते रहे.

इसी के मद्देनजर विश्वविद्यालय ने ऐसे शिक्षकों की मूल कॉलेज में उपस्थिति दर्ज करने पर रोक लगा दी है. साथ ही 27 जून के बाद से उनका वेतन भी निर्गत नहीं करने का निर्देश दिया गया है.

शिक्षकों ने हाईकोर्ट में दी है चुनौती

दूसरी ओर, जिन शिक्षकों ने नवस्थापित डिग्री महाविद्यालयों में योगदान नहीं किया है, उनका कहना है कि इस मामले में पहले से ही पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है.

शिक्षकों का आरोप है कि विश्वविद्यालय ने बिना किसी पूर्व सूचना के पिक एंड चूज के आधार पर प्रतिनियुक्ति से संबंधित अधिसूचना जारी की है. याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा है.

23 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

शिक्षकों के अनुसार, हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय प्रशासन को शिक्षकों के प्रतिवेदन पर विचार कर उचित आदेश पारित करने का निर्देश दिया है. साथ ही मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 जुलाई की तिथि निर्धारित की गई है.

वेतन रोकने के फैसले पर शिक्षकों ने जताई आपत्ति

वेतन रोकने के आदेश के बाद शिक्षकों ने कहा कि किसी भी सरकारी सेवक का मासिक वेतन उसके और उसके परिवार के जीवन-यापन का प्रमुख आधार होता है.

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के किसी भी अधिनियम में शिक्षकों का वेतन रोकने का कोई प्रावधान नहीं है. यहां तक कि निलंबन की स्थिति में भी कर्मचारी को जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाता है. ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन को अपने इस आदेश पर पुनर्विचार कर इसे वापस लेना चाहिए.

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