ePaper

देश को पहला राष्ट्रपति देने वाला जिला स्कूल का हाल बेहाल, संकट में है उसका अस्तित्व

Updated at : 27 Jun 2024 9:40 PM (IST)
विज्ञापन
देश को पहला राष्ट्रपति देने वाला जिला स्कूल का हाल बेहाल, संकट में है उसका अस्तित्व

सारण का ऐतिहासिक जिला स्कूल जहां से देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र बाबू ने 1901 में 10वीं पास की थी. स्कूल को अपग्रेड कर इंटर कॉलेज बना दिया गया है, लेकिन विभाग के अधिकारी ही देश के प्रथम राष्ट्रपति के नाम पर स्थापित इस स्कूल का अस्तित्व मिटाने में लग गये हैं.

विज्ञापन

छपरा सारण का ऐतिहासिक जिला स्कूल जहां से देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र बाबू ने 1901 में 10वीं पास की थी. स्कूल को अपग्रेड कर इंटर कॉलेज बना दिया गया है, लेकिन विभाग के अधिकारी ही देश के प्रथम राष्ट्रपति के नाम पर स्थापित इस स्कूल का अस्तित्व मिटाने में लग गये हैं. विभाग के जिला स्तर के तमाम अधिकारियों का दफ्तर भी इसी ऐतिहासिक कैंपस में स्थापित हो चुका है. यहां तक की बच्चों के थोड़ा बहुत खेलने वाले जगह पर शिक्षा भवन का निर्माण कराया जा रहा है. हद तो तब हो गई जब एक तरफ शिक्षा भवन बन रहा है तो दूसरी तरफ स्कूल के बच्चे शेष हिस्से पर विभागीय अधिकारी अपना निर्माण करवा रहे हैं. अपने कार्यालय को कार्पोरेट कार्यालय का रूप देने के लिए स्कूल के अस्तित्व को मिटा रहे हैं.

सरकारी राशि का हो रहा दुरुपयोग

स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों ने नाम नहीं छापने का शर्त पर बताया कि जब स्कूल परिसर में शिक्षा भवन बन रहा है तो फिर कैंपस में अन्य निर्माण करने की क्या जरूरत है.भविष्य में बच्चों के लिए काफी परेशानी होगी. बच्चे खेलकूद भी नहीं पाएंगे. आए दिन परीक्षा होती है ऐसे में एक रास्ते से आना जाना और असहज स्थिति उत्पन्न कर सकता है. अभी जो निर्माण हो रहा है उसमें भी आठ से 10 लाख रुपये खर्च होंगे. ऐसे में थोड़ा इंतजार कर लेने में क्या परेशानी थी जब शिक्षा भवन बन जाता तो अधिकारी अपना कार्यालय नये भवन में लेकर चले जाते कम से कम स्कूल का कैंपस बर्बाद नहीं होता.

शीशम का पेड़ भी गायब

अभिभावकों ने तो यहां तक बताया कि कैंपस में शीशम का पेड़ था. जो अब नहीं दिख रहा है. क्या पेड़ को काटने के लिए वन विभाग से अनुमति ली गयी थी. अगर ली गयी थी तो जो राशि बनती है. उसे सरकारी खाते में जमा करायी गयी की नहीं. यह तमाम सवाल अधिकारियों के काम करने के तौर तरीके पर सवाल उठाते हैं. कम से कम बच्चों के हित में और देश के प्रथम राष्ट्रपति के नाम पर स्थापित जिला स्कूल के लिए अतिक्रमण जैसे कदम नहीं उठाने चाहिए.

1100 छात्र है नामांकित

आज की स्थिति में स्कूल में 1100 के करीब स्टूडेंट्स हैं. ऐसे में कोई बड़ा कार्यक्रम हो जाये तो बच्चे कहां बैठेंगे या स्कूल कोई योजना बनाएं तो कहां कक्ष निर्माण करवायेगी. भवन पुराने हो चुके हैं. नये भवन बनाने की जगह पर विभागीय अधिकारियों के भवन बना रहे हैं. ऐसे में विभाग के अधिकारियों को सोचना चाहिए की कही हम इस स्कूल का अस्तित्व तो नहीं समाप्त कर रहे हैं. एक और बड़ी बात है कि इस स्कूल में जितने बच्चे हैं उसे अनुपात में टीचर नहीं है.

क्या कहती है प्राचार्य

स्कूल परिसर में क्या बन रहा है किस लिए बन रहा है मुझे कोई जानकारी नहीं है. पेड़ काटने की बात भी दूसरे से मालूम हुई. डॉ राजेंद्र प्रसाद के नाम पर स्थापित इस स्कूल को बेहतर करने का प्रयास होना चाहिए.

श्वेता श्रीवास्तव, प्राचार्य, जिला स्कूल छपरा

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
Prabhat Khabar News Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar News Desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन