जिले में भूगर्भ जल स्तर बढ़ा

छपरा (सदर) : जिले में भले ही अगस्त माह तक बारिश औसत से 50 फीसदी कम हुई है. लेकिन, जुलाई में गंडक की बाढ़ तो अगस्त में गंगा, सोन तथा घाघरा के बाढ़ ने जिले में भूगर्भ जल के स्तर को बेहतर कर दिया है. जिले में एकमा तथा मांझी को छोड़कर अन्य सभी प्रखंडों […]
छपरा (सदर) : जिले में भले ही अगस्त माह तक बारिश औसत से 50 फीसदी कम हुई है. लेकिन, जुलाई में गंडक की बाढ़ तो अगस्त में गंगा, सोन तथा घाघरा के बाढ़ ने जिले में भूगर्भ जल के स्तर को बेहतर कर दिया है.
जिले में एकमा तथा मांझी को छोड़कर अन्य सभी प्रखंडों में भूगर्भ जल स्तर वर्ष 2014 तथा 2015 से एक से डेढ़ फुट बेहतर हो गया है. जबकि एकमा तथा मांझी में ही यह स्तर लगभग एक फुट कम रह गया है. यह खुलासा जिला आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा सरकार को भेजी गयी बाढ़-सूखे की रिपोर्ट से हुआ है. आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा भेजी गयी रिपोर्ट के अनुसार जिले में तीन प्रखंडों में अगस्त में बाढ़ के कारण पूर्णत: आबादी प्रभावित हुई. जिनमें सोनपुर, दिघवारा तथा रिविलगंज प्रखंड शामिल है.
वहीं छपरा सदर, गड़खा के 75 फीसदी पंचायत तो दरियापुर के 50 फीसदी वहीं मांझी तथा जलालपुर के 15 फीसदी पंचायत में बाढ़ के पानी का असर रहा. ऐसी स्थिति में इन सभी प्रखंडों एवं पंचायतों में फसलों की क्षति बाढ़ के पानी के कारण हुई. इसी प्रकार जुलाई माह में गंडक में आयी बाढ़ के कारण जिले के पूर्वी छोड़ पर स्थित पानापुर, तरैया, अमनौर, मकेर, परसा तथा दरियापुर प्रखंडों में बाढ़ के कारण 50 फीसदी पंचायतों में खेतों में बेहतर नमी रही. बेहतर नमी के बाद बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बेहतर होने की उम्मीद है.
कई प्रखंडों में सूखे जैसी स्थिति : जिले के लहलादपुर, नगरा, बनियापुर, मशरक, एकमा, जलालपुर प्रखंडों में बारिश 50 फीसदी से कम होने के कारण सूखे की स्थिति है. हालांकि आपदा प्रबंधन ने भेजे रिपोर्ट में कहा है कि जिले में खरीफ फसल की बोआई 96 फीसदी हुई है. परंतु, बारिश नहीं होने के कारण खेतों में नमी कम होने के कारण खेतों में फसल की बेहतरी की उम्मीद किसानों को नहीं दिखती. वहीं सरकार के द्वारा किसानों को सूखे की स्थिति में खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए विभिन्न प्रखंडों को डेढ़ माह पूर्व ही डीजल सब्सिडी की राशि उपावंटित की गयी.
लेकिन, दो करोड़ 98 लाख रुपये की राशि में से अबतक महज 88 लाख रुपये की निकासी सूखे की स्थिति से जूझ रहे किसानों को वितरण के लिए हो पायी है. जबकि महज 45 लाख रुपये ही अबतक किसानों के बीच सब्सिडी मद में बंट पाये है.
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