सात विकलांग बच्चे-बच्चियों की देखभाल बनी चुनौती

Published at :06 Dec 2015 6:18 PM (IST)
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सात विकलांग बच्चे-बच्चियों की देखभाल बनी चुनौती

छपरा (सदर) : सीमित संसाधनों के बीच विशेष दत्तक ग्रहण केंद्र, छपरा में रहनेवाले आधा दर्जन अनाथ के साथ-साथ विकलांग बच्चों की देख-रेख संचालक के लिए बड़ी समस्या बनी है. एक से तीन वर्ष की उम्र के इन शारीरिक व मानसिक रूप से विकलांग बच्चे व लड़कियों के जीवन को बेहतर करने में समाज कल्याण […]

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छपरा (सदर) : सीमित संसाधनों के बीच विशेष दत्तक ग्रहण केंद्र, छपरा में रहनेवाले आधा दर्जन अनाथ के साथ-साथ विकलांग बच्चों की देख-रेख संचालक के लिए बड़ी समस्या बनी है. एक से तीन वर्ष की उम्र के इन शारीरिक व मानसिक रूप से विकलांग बच्चे व लड़कियों के जीवन को बेहतर करने में समाज कल्याण विभाग के पदाधिकारियों को बेहतर प्रयास करने की जरूरत है.

10 बच्चों की क्षमता वाले छपरा स्थित दत्तक ग्रहण केंद्र में 21 लावारिस बच्चे हैं, जिनमें दो बच्चियां अंधी, दो चलने-फिरने में लाचार, एक की जांच के दौरान एचआइवी पॉजिटिव तो किसी के ओठ व तालू कटे हैं. ऐसी स्थिति में इनकी देख-भाल करना निश्चित तौर पर कठिन दायित्व है.

नेहा, आकृति देखने से लाचार, तो प्रिंस व दिव्या उठने व चलने में लाचारविशेष दत्तक ग्रहण केंद्र की संयोजक की माने तो मुजफ्फरपुर स्थित विशेष दत्तक ग्रहण केंद्र से आये सात बच्चों में पांच बच्चे तथा पूर्व से छपरा केंद्र के दो विकलांग बच्चों की देख-भाल निश्चित तौर पर चुनौती है. डेढ़ वर्ष की दिव्या, एक वर्ष की आकृति जहां देख नहीं सकतीं, वहीं डेढ़ वर्ष का प्रिंस तथा डेढ़ वर्ष की दिव्या उठने व चलने में लाचार है. वहीं, एक वर्ष की कृति, दो वर्ष के सोनू के तालु व ओठ दोनों कटे हुए हैं.

वहीं, तीन साल की एक बच्ची की जांच के दौरान एचआइवी पॉजिटिव पायी गयी है. मुजफ्फरपुर से आये सात बच्चों की देख-रेख ज्यादा मुश्किलछपरा में बालक गृह तथा मुजफ्फरपुर में विशेष दत्तक ग्रहण केंद्र संचालित करनेवाली संस्था बीआर अांबेडकर के कार्यकलापों से नाराज समाज कल्याण विभाग के निदेशक ने मुजफ्फरपुर के सात बच्चों को छपरा केंद्र में भेजा है, जिनमें पांच विकलांग हैं. ऐसी स्थिति में खास कर विकलांग बच्चों की देख-रेख मुश्किल हो रही है.

समन्वयक श्वेता कुमारी अपने संसाधनों के साथ इन सात विकलांग बच्चों के साथ-साथ चार वर्ष से कम उम्र के सभी 21 बच्चों की बेहतर देख-रेख का प्रयास कर रही हैं. समाज कल्याण विभाग के निदेशक के निर्देश के आलोक में ही मुजफ्फरपुर स्थित विशिष्ट दत्तक ग्रहण केंद्र तथा छपरा स्थित बाल गृह को बंद कर बच्चों को छपरा स्थित दत्तक ग्रहण केंद्र व खुला आश्रय में भेजा गया है.

मुजफ्फरपुर तथा छपरा में चलनेवाले क्रमश: विशिष्ट दत्तक ग्रहण केंद्र तथा बाल गृह के लिए नया विज्ञापन निकाल कर शीघ्र ही इनके संचालकों का चयन किया जायेगा. वहीं, इन बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए संबंधित गृहों के संचालकों को जिम्मेवारी दी जायेगी. भास्कर प्रियदर्शी सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई, सारण

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