सामान्य मूर्तियों के सहारे ही मां सरस्वती की आराधना को विवश रहेंगे श्रद्धालु

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 09 Jan 2020 6:53 AM

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दिघवारा : सर्दी का सितम अपने परवान पर है और भीषण ठंड के कारण लोगों की परेशानी बढ़ गयी है. ठंड ने दिसंबर माह से ही मां सरस्वती की मूर्तियों के निर्माण में जुटे दिघवारा प्रखंड के सैकड़ों मूर्तिकारों की मुश्किलों को भी बढ़ा दी है. प्रखंड भर में मां सरस्वती की आराधना के लिए […]

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दिघवारा : सर्दी का सितम अपने परवान पर है और भीषण ठंड के कारण लोगों की परेशानी बढ़ गयी है. ठंड ने दिसंबर माह से ही मां सरस्वती की मूर्तियों के निर्माण में जुटे दिघवारा प्रखंड के सैकड़ों मूर्तिकारों की मुश्किलों को भी बढ़ा दी है. प्रखंड भर में मां सरस्वती की आराधना के लिए बन रही मूर्तियों के निर्माण की रफ्तार काफी धीमी पड़ गयी है.

सूर्य भगवान के निरंतर दर्शन न देने के कारण मूर्तिकारों की मुश्किलों में काफी इजाफा हुआ है और वे लोग हर दिन धूप खिलने के इंतजार में दिन भर का वक्त गुजारते नजर आ रहे हैं. पिछले एक पखवारे से मौसम की बेरुखी के चलते इस साल प्रखंड अधीन क्षेत्रों में रहने वाले मूर्तिकारों ने काफी कम संख्या में मूर्तियों का निर्माण किया है और धूप न खिलने के कारण बनी मूर्तियां भी सूखने में लंबा वक्त ले रही है.
इस कारण मूर्तिकारों की चिंता की लकीरें निरंतर बढ़ती जा रही है. धूप का दर्शन न होने से मूर्तियों के सूखने में दुगना से भी ज्यादा वक्त लग रहा है और मूर्तियों के निर्माण की रफ्तार मंद पड़ गयी है.
मौसम ने तैयारियों में डाला है खलल :प्रखंड अधीन क्षेत्रों में मूर्ति बनाने का काम करने वाले मूर्तिकार की तैयारियों में मौसम ने खूब खलल डाला और वे लोग इस वर्ष काफी कम संख्या में मां सरस्वती की मूर्तियों का निर्माण कर रहे हैं.
नगर के आंबेडकर चौक, सैदपुर, स्टेशन रोड, हेमतपुर समेत शीतलपुर व बस्तीजलाल आदि जगहों के कई मूर्तिकारों ने बताया कि पूर्व के वर्षों में जितनी संख्या में मूर्तियों का निर्माण किया जाता था, इस वर्ष उसकी तुलना में आधी मूर्तियों का ही निर्माण हो सका है. मौसम की प्रतिकूलता के चलते उन लोगों ने काफी कम संख्या में मूर्तियों का निर्माण किया है, ताकि समय सीमा के अंदर ग्राहकों को मूर्तियों की डिलीवरी आसानी से दी जा सके.
हर दिन मूर्तिकार धूप खिलने की उम्मीद के बीच मूर्तियों के निर्माण कार्य में जुटते हैं, मगर धूप न खिलने से निर्माण कार्य रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है. इन जगहों के मूर्तिकारों का कहना है कि जब तक मूर्तियां सूख नहीं जायेगी, तब तक इनको रंग पाना संभव नहीं है. ऐसी स्थिति में निर्माण कार्य में खूब परेशानी आ रही है.
धूप न खिलने से कला की नुमाइश करने से परहेज कर रहे हैं मूर्तिकार
मूर्तिकारों का कहना है कि इस बार मौसम के प्रतिकूल होने, धूप के अधिक न खिलने व समय-समय पर बूंदा-बांदी होने के कारण वे लोग सामान्य तरीके से ही मूर्तियों का निर्माण कर रहे हैं. धूप की कमी के कारण इस बार मूर्तियों में बेहतर कला की नुमाइश नहीं हो सकी है, क्योंकि बेहतर कला से बनी मूर्तियों को सूखने में लंबा वक्त लगता है,
ऐसी स्थिति में कोई भी मूर्तिकार रिस्क लेना नहीं चाहता है. लिहाजा इस बार भक्तों तक सामान्य मूर्तियां ही पहुंच सकेगी, क्योंकि मौसम ठीक न होने से प्रखंड के अधिकांश मूर्तिकार अपने द्वारा निर्मित होने वाली मूर्तियों में अपनी कला की छाप छोड़ने से परहेज कर रहे हैं.
क्या कहते हैं मूर्तिकार
पिछले एक महीने से बनी मूर्तियां अब तक नहीं सूख सकी है. ऐसी स्थिति में मूर्तियों को बनाने में काफी परेशानी उठानी पड़ रही है. धूप खिलने के बाद ही निर्माण की रफ्तार तेज हो सकती है.
मिंटु कुमार, मूर्तिकार
इस साल मूर्तियों के निर्माण में सबसे ज्यादा परेशानी आ रही है. मौसम के चलते मूर्तियों को सूखने में लंबा वक्त लग रहा है. इस बार बीते वर्ष की तुलना में काफी कम संख्या में मूर्तियों का निर्माण किया गया है.
झुनी देवी, महिला मूर्तिकार
मूर्तियों में बेहतर आकर्षण के लिए उसका ठीक से सूखना बहुत जरूरी होता है. पिछले 15 दिनों से मौसम की जो स्थिति है उसके अनुसार धूप का दर्शन मुश्किल हो गया है. मूर्तियों के निर्माण में परेशानी उठानी पड़ रही है.
बुनिया देवी, महिला मूर्तिकार
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