रब को राजी करने में गुजरा रमजान का तीसरा जुमा
Updated at : 17 Jun 2017 10:01 AM (IST)
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छपरा : अल्लाह, मुल्क में अमन व शांति कायम करना. मुझे बुराइयों से बचाये रखना और इंसानियत की सीख देना. मसजिदों में हाथ फैलाये रोजेदार अल्लाह से यही इबारत कर रहे थे. मौका था माह-ए-रमजान के तीसरे जुम्मे की खास नमाज अदा करने का. इस सिलसिले में जिले की मसजिदों में खास तैयारी की गयी […]
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छपरा : अल्लाह, मुल्क में अमन व शांति कायम करना. मुझे बुराइयों से बचाये रखना और इंसानियत की सीख देना. मसजिदों में हाथ फैलाये रोजेदार अल्लाह से यही इबारत कर रहे थे. मौका था माह-ए-रमजान के तीसरे जुम्मे की खास नमाज अदा करने का. इस सिलसिले में जिले की मसजिदों में खास तैयारी की गयी थी.
माह-ए-रमजान के तीसरे जुमा की नमाज शहर की छोटी बड़ी तमाम मसजिदों में अदा की गयी. फर्ज नमाजों के साथ कसरत से नफल नमाज अदा की गयी. शुक्रवार के भोर में रोजेदारों ने सहरी खायी.
पुरुषों ने मसजिदों में तो महिलाओं ने घरों में नमाज अदा की. इसके बाद कुरआन शरीफ की तिलावत की गई और जुमा की नमाज की तैयारी शुरू हो गयी.
जुमा की अजान होने तक मसजिद नमाजियों से भर गयी. इसके बाद नमाजियों ने सुन्नतें अदा की. इमाम ने तकरीर पेश की. खुदा की हम्द व सना बयान की. इमाम के साथ सभी ने खुदा के बारगाह में दुआ के लिए हाथ उठाए. इमाम की दुआ पर सभी ने आमीन की सदाएं बुलंद की. पुरुषों ने भी घर आकर तिलावत व तस्बीह की.
रोजा बीमारियों को दूर करता है: मौलाना कादिर
मौलाना कादिर ने कहा कि रोजा रखने में बहुत सी हिकमतें हैं. रोजा रखने से भूख और प्यास की तकलीफ का पता चलता है. इससे खाने-पीने की चीजों की अहमियत के बारे में वाकिफ होते हैं. इंसान खुदा का शुक्र अदा करता है.
रोजा से भूखे और प्यासे पर मेहरबानी का जज्बा पैदा होता है, क्योंकि मालदार अपनी भूख याद करके गरीब मुहताज की भूख का पता लगाते हैं. रोजा से भूख बर्दाश्त करने की आदत भी पड़ती है. अगर कभी खाना मयस्सर न हो तो इंसान घबराता नहीं है. भूख बहुत सी बीमारियों का इलाज है.
उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर अन्य महीनों में और खास तौर पर रमजान माह में फकीर व अन्य मांगने वालों को न झिड़कें. गरीबों, जरूरतमंंदों की मदद करें. अगर मौका मिले तो उनको इफ्तार और खाने में शरीक करें और सवाब हासिल करें.
छपरा : मुकद्दस रमजान माह तमाम महीनों का सरदार तो है ही साथ ही इस महीने में अल्लाह अपने बंदों की हर नेकी के बदले में इजाफा कर देता है. रमजान की इन्हीं विशेषताओं पर रोशनी डालते हुए मौलना अब्दुल कादिर ने कहा कि इस महीने में अल्लाह अपने बंदों को खास नेमतों से नवाजता है. गुरूवार को रमजान की फजीलतों का बखान करते हुए मौलाना कादिर ने कहा कि रमजान में हर इबादत और नेक अमल का सवाब बढ़ा दिया जाता है और बंदा-ए-मोमिन की हर नेकी के बदले में इजाफा हो जाता है. इसलिए रमजान को महीनों का सरदार कहा गया है. उन्होंने कहा कि रमजान माह में तीन हिस्से हैं और हर हिस्से का नाम दिया गया है. पहले 10 दिन के हिस्से को रहमत कहा जाता है, दूसरा हिस्सा जो रमजान की 11 तारीख से 20 रमजान तक होता है, उसे मगफिरत कहा जाता है और तीसरा हिस्सा जो 21 रमजान से शुरू होकर 30 रमजान को खत्म होता है उसे जहान्नुम से आजादी का हिस्सा कहा जाता है.
यानी रमजान माह में अल्लाह अपने बंदों पर रहमत, मगफिरत और जहान्नुम से आजादी के दरवाजे खोल देता है. मौलाना वाजदी ने कहा कि यह सब चीजें रोजा रखने वाले को मिलती है जो अल्लाह की नजदीकी पाने के लिए और उसे खुश रखने के लिए रोजा रखता है.
दि कोई रोजा नहीं रखता और जान बूझकर ऐसा करता है तो वो अल्लाह से बगावत का ऐलान करता है और अल्लाह ऐसे बागियों को सजा देता है. उन्होंने कहा कि जो लोग चाहते हैं कि उन्हें दुनिया और दूसरी दुनिया में आराम की जिंदगी गुजारें वो सिर्फ रमजान ही नहीं बल्कि आम दिनों में भी अल्लाह के हुक्म की तामील करें.
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