सतर्कता ही साइबर अपराध से बचाव की कुंजी

Updated at : 26 Feb 2025 11:06 PM (IST)
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सतर्कता ही साइबर अपराध से बचाव की कुंजी

साइबर अपराध की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए प्रभात खबर द्वारा चलाये जा रहे जन जागरूकता अभियान का कारवां मंगलवार को शहर के मोहनपुर रोड स्थित टेक्नो मिशन स्कूल पहुंचा

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समस्तीपुर : साइबर अपराध की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए प्रभात खबर द्वारा चलाये जा रहे जन जागरूकता अभियान का कारवां मंगलवार को शहर के मोहनपुर रोड स्थित टेक्नो मिशन स्कूल पहुंचा, यहां विद्यार्थियों और शिक्षकों को साइबर सुरक्षा और बचाव के उपायों की दी गयी जानकारी. प्रभात खबर प्रतिनिधि प्रकाश कुमार ने कहा कि समाज में साइबर जागरूकता की आवश्यकता आज के दौर में साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को देखते हुए इसकी रोकथाम और इससे बचने के उपायों की जानकारी समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना बेहद जरूरी है. प्रभात खबर का यह जन-आंदोलन न केवल विद्यार्थियों के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए एक सराहनीय पहल है, जिससे साइबर अपराध के खिलाफ एक मजबूत जागरूकता अभियान चलाया जा सके. इस तरह के आयोजनों से न केवल डिजिटल सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि लोग अपने ऑनलाइन गतिविधियों के प्रति अधिक सतर्क रहकर साइबर अपराधों से बच सकेंगे.

मोबाइल ने हमें खतरों के समक्ष भी ला खड़ा किया है

एचएम सौरभ कुमार ने कहा कि देश में साइबर अपराध एक बड़ी चुनौती बन गया है. साइबर अपराध से निपटने के लिए सरकार की ओर से कई कदम उठाए गए हैं, लेकिन साइबर अपराध की घटना लगातार बढ़ रही है. साइबर अपराध के अलावा साइबर हमले राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन गए है. साइबर अपराध से निपटने के लिए सरकार चार स्तरीय रणनीति पर काम कर रही है. अंतर-मंत्रालयी और गृह मंत्रालय में अंतर-विभागीय समन्वय को बढ़ाया गया है. गृह मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय, सर्ट इन, आई4सी, टेलिकॉम और बैंकिंग जैसे विभागों के बीच टेक्नोलॉजी और बैठकों के माध्यम से संवाद किया जा रहा है. मोबाइल हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा हो गया है. मोबाइल फोन के बिना तो हमारा जीवन जैसे अधूरा ही है. सूचनाएं हों अथवा कारोबार हो या फिर मनोरंजन मोबाइल फोन की लोगों लत लग गयी है. लेकिन इस मोबाइल ने हमें खतरों के समक्ष भी ला खड़ा किया है. यह जान लीजिए कि टेक्नोलॉजी दो तरफा तलवार है. एक ओर जहां यह वरदान है, तो दूसरी ओर मारक भी है. तकनीक ने चुपके से कब हमारे जीवन में इतने अंदर तक प्रवेश कर लिया कि हमें पता ही नहीं चला. अब हम सब, जाने अनजाने जब भी मौका मिलता मोबाइल के नये मॉडल और इसके सर्विस प्रोवाइडर की बातें करने लगते हैं. शायद आपने अनुभव किया हो कि यदि आप कहीं मोबाइल भूल जाएं या फिर वह किसी तकनीकी खराबी से वह बंद हो जाए, तो आप कितनी बेचैनी महसूस करते हैं. जैसे जीवन की कोई अहम हिस्सा अधूरा रह गया हो. यह समस्या भारत की ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की है.

कोई भी जानकारी साझा करने से बचें

शिक्षक सिद्धार्थ शंकर ने कहा कि सोशल मीडिया पर जानकारी सार्वजनिक करने से साइबर अपराधियों को मौका मिल सकता है. इसलिए सोशल मीडिया में संवेदनशील जानकारी साझा करने से बचें. कभी भी अपनी जन्मतिथि, पता, फोन नंबर व बैंक खाते की जानकारी सोशल मीडिया पर न दें. अपराधी इन जानकारियों का इस्तेमाल आपकी पहचान चुराने में कर सकते हैं. सोशल मीडिया प्रोफाइल की सेटिंग ऐसी रहे ताकि करीबी दोस्त ही आपकी जानकारी देख सकें. ध्यान रखना है कि आपका सोशल मीडिया प्रोफाइल पब्लिक (सार्वजनिक) न रहे कि उसे कोई भी देख सके. शादी के रिश्ते और जॉब के लिए अप्लाई करते हुए भी प्रोफाइल में बहुत अधिक जानकारी नहीं देनी है. साइबर अपराधी पर्सनल जानकारी हासिल कर उसका इस्तेमाल कर सकते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि किसी भी संदिग्ध ट्रांजेक्शन को रोकने के लिए 1930 पर कॉल करके 30 मिनट के भीतर अकाउंट से ट्रांजेक्शन रोक सकते हैं.सोशल मीडिया पर जानकारी सार्वजनिक करने से साइबर अपराधियों को मौका मिल सकता है. इसलिए सोशल मीडिया में संवेदनशील जानकारी साझा करने से बचें. सोशल मीडिया प्रोफाइल की सेटिंग ऐसी रहे ताकि करीबी दोस्त ही आपकी जानकारी देख सकें. जिन्हें आप नहीं जान रहें उन्हे सब कुछ बताने की कोई जरूरत नहीं है. आपका सोशल मीडिया प्रोफाइल पब्लिक (सार्वजनिक) न रहे कि उसे कोई भी देख सके.

आंदोलन में शामिल होइए और समाज को इन खतरों से बचाइए

शिक्षक डीएन पाठक ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट के लिए आपको अचानक ही एक फोन कॉल आएगा जिसमें कॉलर बतायेगा कि आपने अवैध सामान, ड्रग्स, नकली पासपोर्ट या अन्य प्रतिबंधित पार्सल भेजा था या आपको यह मिला है यानी आपने इसे रिसीव किया है. कई बार आपको निशाना बनाने के लिए यह फोन कॉल आपके रिश्तेदारों या दोस्तों को भी जा सकती है, जिन्हें बताया जायेगा कि आपके दोस्त या आपके रिश्तेदार ऐसे अपराध में शामिल हैं. आपको जैसे ही दोस्त या रिश्तेदार से यह सूचना मिलेगी, आप घबरा जायेंगे. इसके बाद अपराधी आपको स्काइप या अन्य वीडियो कॉल के माध्यम से आपसे संपर्क करेंगे. वे खुद को पुलिस या किसी जांच एजेंसी के अधिकारी के रूप में पेश करेंगे. वे किसी फर्जी पुलिस स्टेशन या सरकारी कार्यालय में बैठे दिखेंगे ताकि आपको विश्वास हो जाये. आपसे वो मामले को बंद करने के लिए पैसे मांगेंगे. इन्हीं अपराधियों से लोगों को बचाने के लिए प्रभात खबर साइबर अपराध के खिलाफ विशेष अभियान चला रहा है. आइए इस आंदोलन में शामिल होइए और समाज को इन खतरों से बचाइए.

10 टिप्स को अपना लेंगे तो फ्रॉड से बचे रहेंगे

1.आप ठान लें कि कभी भी अनजान कॉल या मेसेज पर ओटीपी शेयर नहीं करेंगे. नतीजा यह होगा कि आप अपने बैंक अकाउंट,मोबाइल, लैपटॉप को हैक होने से बचा सकेंगे. साथ ही, साइबर स्कैम के कई अन्य खतरों से बचे रहेंगे.

2. अनजान नंबर से विडियो कॉल रिसीव नहीं करें3. ””””जॉब फिशिंग”””” के कांटे में नहीं फंसना4. भारतीय कानून में ””””डिजिटल अरेस्ट”””” नाम की कोई चीज नहीं है। यह साइबर धोखाधड़ी का तरीका है. इसमें जालसाज पुलिस / खुफिया अफसर बनकर फोन (या ऑनलाइन कम्यूनिकेशन से) गिरफ्तार करने का झूठा दावा करते हैं. मकसद पीड़ित को यह यकीन दिलाना है कि वह किसी अपराध में शामिल है और आखिर में उससे बड़ी रकम ऐंठते हैं.

5.””””बिल अपडेट न होने के कारण आज रात बिजली / गैस ऐसे कनेक्शन कट जाएगा… इस साल ऐसे मेसेज ने लोगों से साइबर फ्रॉड किए. मगर अब ठान लें कि मेसेज इग्नोर करेंगे.

6. एआई से वॉयस क्लोनिंग में हूबहू आवाज से खबरदार.

7. सोशल मीडिया पर जानकारी सार्वजनिक करने से साइबर अपराधियों को मौका मिल सकता है. इसलिए सोशल मीडिया में संवेदनशील जानकारी साझा करने से बचें. कभी भी अपनी जन्मतिथि, पता, फोन नंबर, या बैंक खाते की जानकारी सोशल मीडिया पर न दें.

8. गूगल पर ””””कस्टमर केयर”””” सर्च से बचें.

9. ट्रेडिंग इन्वेस्टमेंट ऑफर ””””ना बाबा ना””””.

10. एक लिंक या अज्ञात मूल के फाइल पर क्लिक करने से पहले सत्यता जांचे. किसी भी तरह का साइबर अपराध होने पर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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