हसनपुर चीनी मिल ने लाल सड़न रोग से बचाव के लिए निकाली जागरूकता रैली, सकरपुरा में लगाई किसान चौपाल

Author Krishana murari|Edited by Sumit Kumar
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जागरूकता रैली को झंडी दिखाते पदाधिकारी एवं जागरूकता रैली में शामिल कर्मी  | Prabhat Khabar Network

जागरूकता रैली को झंडी दिखाते पदाधिकारी एवं जागरूकता रैली में शामिल कर्मी | Prabhat Khabar Network

हसनपुर में गन्ने की फसल को लालसड़न रोग से बचाने के लिए जागरूकता रैली निकाली गई। किसानों को रोग की पहचान और बचाव के प्रभावी उपाय बताए गए।

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Sugar Mill News: समस्तीपुर जिले अंतर्गत हसनपुर चीनी मिल प्रक्षेत्र में गन्ने की फसल को लाल सड़न (Red Rot) रोग से बचाने के लिए चीनी मिल गन्ना विभाग द्वारा एक विशाल जागरूकता रैली का आयोजन किया गया. इस 'संकल्प यात्रा' सह बाइक रैली को मिल के कार्यपालक अध्यक्ष अशोक कुमार मित्तल एवं कार्यपालक उपाध्यक्ष सर्बजीत सैनी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया.

25 से अधिक गांवों में बाइक रैली से फैलाया जागरूकता का संदेश

गन्ना विभाग के वरीय एवं कनीय अधिकारियों, पदाधिकारियों और फील्ड कर्मचारियों की टीम ने बाइक रैली के जरिए सकरपुरा, मालपुर, मोरतर, बरैपुरा, घोषदाहा, सपरी, देवरा, काले, महुआ छिपकी, रजवा, डुमरा, हसनपुर बाजार, बडगांव, शोभेपुरा, बगराहा, बहत्तर, शासन, मुर्राहा, आतेपुर, गढ़पुरा, धर्मपुर, कोरई, सुजानपुर, मालीपुर, मूसेपुर और रामपुर गांवों का भ्रमण किया. इस दौरान किसानों को गन्ने को लाल सड़न बीमारी से सुरक्षित रखने के तौर-तरीके बताए गए.

सकरपुरा में किसान चौपाल: महाप्रबंधक ने दिए बचाव के अहम टिप्स

रैली के समापन के बाद सकरपुरा गांव में किसान चौपाल का आयोजन किया गया. चौपाल को संबोधित करते हुए गन्ना महाप्रबंधक अरुण कुमार श्रीवास्तव ने किसानों को लाल सड़न रोग की पहचान और बचाव के उपाय विस्तार से समझाए.

  • स्वस्थ बीज का चयन: गन्ना रोपाई से पूर्व हमेशा स्वस्थ और रोगमुक्त बीज ही चुनें.
  • बीज का आकार: बुआई के लिए एक से दो आंख वाले टुकड़ों या गन्ने के ऊपरी एक-तिहाई हिस्से का उपयोग करें.
  • बीज उपचार: रोपाई से पहले बीज को रोको (Roko) या गाउचो (Gaucho) दवा से उपचारित जरूर करें.
  • ट्राइकोडर्मा का प्रयोग: बुआई के वक्त प्रति एकड़ 5 किलोग्राम ट्राइकोडर्मा को 2 क्विंटल सड़ी गोबर की खाद में मिलाकर खेत की अंतिम जुताई के दौरान डालें.
  • जल प्रबंधन: रोग प्रभावित खेत से खूंटी की फसल (Ratoon) न रखें. सिंचाई के समय प्रभावित खेत की मेड़बंदी कर दें ताकि दूषित पानी दूसरे स्वस्थ खेतों में न पहुंचे.

सीओ 0238 की जगह अपनाएं गन्ने की ये नई उन्नत किस्में

उपमहाप्रबंधक (गन्ना) रमाशंकर प्रसाद ने किसानों से शरदकालीन गन्ना बुआई का दायरा बढ़ाने और आधुनिक तकनीकों को अपनाने की अपील की. उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे बीमारी के प्रति संवेदनशील हो चुकी सीओ 0238 (Co 0238) किस्म के विकल्प के तौर पर सीओ 0118, सीओएलके 14201, सीओएस 13235, सीओएस 18231, सीओजे 85 और सीओएलके 16202 जैसी नई व उन्नत किस्मों की खेती करें. उन्होंने शरदकालीन गन्ने के साथ अंतर्वर्ती (Intercropping) फसलें लगाने पर भी जोर दिया.कार्यक्रम के दौरान मनोज प्रसाद, उदयराज सिंह, दीपक कुमार, अखिलेश धर द्विवेदी, दीपेंद्र सिंह, अभयनाथ मिश्रा, प्रमोद मणि त्रिपाठी, राम कृष्ण प्रसाद, सुशील कुमार सिंह, शिवराज सिंह समेत कई अधिकारी और स्थानीय किसान उपस्थित रहे.


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