बटन और ऑयस्टर मशरूम की खेती पर जोर, पूसा में ग्रामीण युवाओं को मिला विशेष प्रशिक्षण

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5 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न

5 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न

Samastipur News: समस्तीपुर के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) बिरौली में मशरूम उत्पादन और प्रसंस्करण पर 5 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ. 35 युवाओं और किसानों ने मशरूम की वैज्ञानिक खेती और स्वरोजगार के गुर सीखे. पढ़ें पूरी खबर…

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समस्तीपुर के पूसा से सुभाष चंद्र कुमार की रिपोर्ट

Samastipur News: समस्तीपुर जिले के पूसा स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के अधीनस्थ कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) बिरौली के सभागार में ‘मशरूम उत्पादन एवं प्रसंस्करण’ विषय पर चल रहा पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है. इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में कुल 35 प्रशिक्षुओं (ग्रामीण युवाओं, किसानों और महिलाओं) ने भाग लिया और स्वरोजगार के गुर सीखे.

इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को मशरूम की वैज्ञानिक खेती से अवगत कराना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाते हुए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना था.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

कृषि विज्ञान केंद्र बिरौली के वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ. आर.के. तिवारी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मशरूम उत्पादन आज के समय में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और अतिरिक्त आय का एक बेहतरीन साधन बन चुका है. उन्होंने बताया कि कम लागत और सीमित जगह में भी इसकी खेती कर किसान भारी मुनाफा कमा सकते हैं.

प्रशिक्षण में दी गई ये अहम जानकारियां

प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञ सुमित कुमार सिंह ने प्रशिक्षुओं को मशरूम उत्पादन की बारीकियों और आधुनिक तकनीकों से अवगत कराया. व्यावहारिक प्रदर्शन (Practical Demonstration) के माध्यम से निम्नलिखित जानकारियां दी गईं:

  • मशरूम के प्रकार: ऑयस्टर मशरूम, बटन मशरूम और मिल्की मशरूम की वैज्ञानिक खेती के तरीके.
  • तकनीकी प्रबंधन: कंपोस्ट तैयार करने की सही विधि, स्पॉन (बीज) उत्पादन, और कमरे के तापमान व आर्द्रता (Humidity) का सटीक प्रबंधन.
  • बचाव और मार्केटिंग: फसलों में रोग और कीट नियंत्रण के उपाय, तथा बाजार में मशरूम की मार्केटिंग (विपणन) व मूल्य संवर्धन (Value Addition) के तरीके.

प्रशिक्षुओं को यह भी सिखाया गया कि कैसे वे अपनी खुद की मशरूम उत्पादन इकाई स्थापित कर कम लागत में अधिक से अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं.

प्रमाण पत्र वितरण के साथ हुआ समापन

प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सभी प्रतिभागियों ने इस कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी बताया. उनका कहना था कि वैज्ञानिक तरीके से मशरूम उगाने की इस नई जानकारी से वे स्वयं का उद्यम स्थापित कर आत्मनिर्भर बन सकेंगे. उन्होंने भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन की मांग की.

अंत में सभी 35 प्रतिभागियों को सफलता का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया. इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक इंजीनियर विनीता कश्यप और उद्यान विशेषज्ञ डॉ. धीरू कुमार तिवारी सहित केंद्र के अन्य वैज्ञानिक एवं कर्मचारी प्रमुख रूप से मौजूद रहे.

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Aaruni Thakur

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By Aaruni Thakur

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