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samastipur :बच्चों के लिए पढ़ना अब होगा मनोरंजन का विकल्प

Updated at : 18 Jun 2025 4:50 PM (IST)
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samastipur :बच्चों के लिए पढ़ना अब होगा मनोरंजन का विकल्प

व्यक्तित्व के विकास में सहायक मनुष्य की अनेक आदतों में से पढ़ने की आदत सर्वाधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है.

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समस्तीपुर. व्यक्तित्व के विकास में सहायक मनुष्य की अनेक आदतों में से पढ़ने की आदत सर्वाधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है. इससे व्यक्ति में सक्रिय रूप से सोचने की क्षमता व उसकी रचनात्मकता में वृद्धि देखने को मिलती है. इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत विद्यार्थियों में कम उम्र से ही पढ़ने की आदत विकसित करने को बढ़ावा दिया जा रहा है. पीएन पणिक्कर की याद में 19 जून को राष्ट्रीय पठन दिवस मनाया जायेगा. इसी दिन से पठन माह की शुरूआत होगी. समारोह का समापन 18 जुलाई 2025 को होगा. इस दौरान विभिन्न प्रकार की गतिविधियां आयोजित होगी, जिसमें विद्यार्थी सक्रिय रूप से भाग लेंगे. शहर के सेंट्रल पब्लिक स्कूल के प्राचार्य मो. आरिफ ने बताया कि केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने डिजिटल पठन माह 2025 समारोह को लेकर नोटिस जारी किया है. स्कूल के प्रमुखों को छात्रों को इस समारोह में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने की सलाह दी है. संख्यात्मक विकास, भाषा अधिग्रहण विवेचनात्मक चिंतन के लिए पढ़ने को आवश्यक माना गया है. 19 जून को सभी स्कूलों की असेंबली में रीडिंग डे प्रतियोगिता के साथ इस पठन समारोह की शुरुआत होगी. इसके अलावा पढ़ने को प्रोत्साहित करने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन क्विज कॉम्पिटिशन का आयोजन भी किया जायेगा. प्री प्राइमरी और प्राइमरी कक्षाओं के लिए चित्रकला और ड्रॉइंग जैसी प्रतियोगिताएं ऑनलाइन और ऑफलाइन मोड में आयोजित होगी. बोर्ड ने अपने पत्राचार में कहा है कि कला के माध्यम से पढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश दिया है. उद्घाटन कार्यक्रम भी आयोजित किये जा सकते हैं. पठन दिवस उद्घोषणा जुलूस पद यात्राएं, “विकास के लिए पढ़ना विषय” पर संगोष्ठी और कार्यशालाओं का आयोजन भी स्कूल कर सकते हैं. छोटी और बड़ी पुस्तक प्रदर्शनियों का आयोजन, विद्यालयों में प्रसिद्ध लेखकों को आमंत्रित करके वाद विवाद का आयोजन और विद्यालयों में लगभग 50 पुस्तकों के साथ रीडिंग कॉर्नर स्थापित करने की सलाह भी बोर्ड ने विद्यालयों को दी है. इसके अलावा शराब और नशीले पदार्थों के खिलाफ छोटे और बड़े जागरूकता कार्यक्रम भी हो सकते हैं. नुक्कड़ नाटक, पढ़ी गई प्रसिद्ध पुस्तकों पर ग्रुप डिस्कशन, अंग्रेजी और स्थानीय भाषाओं में शब्द प्रतियोगिता, कविता पाठ प्रतियोगिता आदि कार्यक्रमों का आयोजन भी स्कूलों में हो सकता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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