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Samastipur: रबी फसलों की बोआई को खेतों की करें तैयारी

Updated at : 08 Oct 2025 9:27 PM (IST)
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Samastipur: रबी फसलों की बोआई को खेतों की करें तैयारी

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के द्वारा किसानों के लिये समसामयिक सुझाव जारी किया गया है.

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समस्तीपुर . डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के द्वारा किसानों के लिये समसामयिक सुझाव जारी किया गया है. कहा गया है कि किसान ऊंचास खेतों में अगात रबी फसलों की बोआई के लिए खेतों की तैयारी शुरु करें. गोबर की सड़ी खाद 150-200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से पूरे में अच्छी प्रकार बिखेड़ कर एवं जुताई कर मिला दें. यह खाद भूमि की जलधारण क्षमता एवं पोषक तत्वों की मात्र बढ़ाती है. तोरी की आरएयूटीएस-17,पंचाली, पीटी-303 एवं भवानी किस्में उत्तर बिहार के लिए अनुशंसित है. खेत की अन्तिम जुताई के समय 30 किलोग्राम नत्रेजन, 40 किलोग्राम स्फुर, 40 किलोग्राम पोटास एवं 20 से 30 किलोग्राम गंधक प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार करें. जिंक की कमी वाले खेत में 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट प्रति हेक्टयेर की दर से व्यवहार करें. शरदकालीन गन्ना, मसूर, मटर, राजमा, मेथी, लहसनु, धनियां, राई एवं सूर्यमुखी फसलों के समय से बोआई के लिए वर्षा उपरान्त खेतों की तैयारी शुरु करें. खेत से सटे मेड़ों, नालों व आसपास के रास्तों में उगे अवांछित जंगलों की साफ-सफाई आवश्य करें. ताकि इन जंगलों में छुपे कीट व रोगों के कारक आदि सम्पूर्ण रुप से नष्ट हो जाये. गोबर की सड़ी खाद 150-200 क्विंटल प्रति हेक्टयेर की दर से पूरे खेत में अच्छी प्रकार बिखेड़ कर एवं जुताई कर मिला दें. धान की फसल जो दुग्धावस्था में आ गयी हो उसमें गंधी कीट की निगरानी करें. इस कीट के शिशु एवं प्रौढ़ दोनों पौधों के बालियों का रस चूसना प्रारंभ कर देती है. इससे दाने खोखले एवं हल्के हो जाते हैं. छिलका का रंग सफेद हो जाता है. धान की दुग्धावस्था में यह पौधों को अधिक क्षति पहुंचाती है. इससे उपज में काफी कमी होती है. इसके शरीर से विशेष प्रकार का बदबू निकलती है. जिस वजह से इसे खेतों में आसानी से पहचानी जा सकता है. इसकी संख्या जब अधिक हो जाती है तो एक-एक बाल पर कई कीट बैठे मिलते हैं. इसके नियंत्रण के लिए फॉलीडाल 10 प्रतिशत धूल का प्रति हेक्टेयर 10-15 किलोग्राम की दर से भुरकाव करें. फूलगोभी की फसल में पत्ती खाने वाली कीट की निगरानी करें. इस कीट के पिल्लू फूलगोभी की मध्यवाली पत्तियों तथा सिर वाले वाले भाग को अधिक क्षति पहुंचाती है. शुरुआती अवस्था में यह पिल्लू पत्तियों की निचली सतह में सुरंग बना कर एवं उसके अन्दर पत्तियों को खाता है. इस कीट से बचाव हेतु स्पनेस्डे 48 ईसी दवा एक मिली प्रति 4 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें. फूलगोभी की पिछात किस्मों जैसे माघी, स्नोकिंग, पूसा स्नोकिंग-1, पूसा-2, पूसा स्नोवॉल-16, पूसा स्नोवॉल के-1 की बोआई नर्सरी में करें. बैगन की फसल में तना एवं फल छदेक कीट की निगरानी करें. शुरुआती रोकथाम के लिए बैगन की रोपाई के 10 से 15 दिनों बाद एक ग्राम फ्यूराडान 3 जी दानेदार दवा प्रति पौधा की दर से जड़ के पास मिट्टी में मिला दें. खड़ी फसल में इस कीट का आक्रमण होने पर कीट से ग्रसित तना एवं फल की तुराई कर मिट्टी में गाड़ दें. अगर कीट की संख्या अधिक हो तो स्पिनोसेड 48 ईसी प्रति 1 मिली प्रति 4 लीटर पानी या क्वीनालफॉस 25 ईसी दवा का 1.5 मिमी प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव आसमान साफ रहने करें. फूलगोभी की फसल में पत्ती खाने वाली कीट की निगरानी करें. इस कीट के पिल्लू फूलगोभी की मध्यवाली पत्तियों व सिर वाले भाग को अधिक क्षति पहुंचाती है. शुरुआती अवस्था में यह पिल्लू पत्तियों की निचली सतह में सुरंग बनाकर एवं उसके अन्दर पत्तियों को खाता है. इस कीट से बचाव हेतु स्पेनोसडे 48 ईसी दवा एक मिली प्रति 4 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें. फूलगोभी की पिछात किस्मों माघी, स्नोकिंग, पूसा स्नोकिंग 1, पूसा-2, पूसा स्नोवॉल 16, पूसा स्नोवॉल के 1की बोआई नर्सरी में करें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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