धान के पुआल से कमाई का नया फॉर्मूला, 45 दिन में तैयार होगी मशरूम की फसल

अब धान का पुआल फेंकने की बजाय कमाई का जरिया बनाएं. जानें कैसे ओएस्टर मशरूम की खेती से कम लागत में बेहतर मुनाफा कमाएं और पराली जलाने की समस्या का समाधान करें.
Mushroom Farming: धान का पुआल अब किसानों के लिए सिर्फ खेत का अवशेष नहीं, बल्कि कमाई का मजबूत जरिया बन सकता है. डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (आरपीसीएयू), पूसा के एडवांस सेंटर ऑफ मशरूम रिसर्च में आयोजित सात दिवसीय प्रशिक्षण में वैज्ञानिकों ने बताया कि पुआल और ओएस्टर मशरूम का उत्पादन कम लागत में बेहतर आय देने वाला कृषि आधारित व्यवसाय है. इससे पराली जलाने की समस्या भी कम होगी और किसानों को अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिलेगा.
पुआल से ऐसे तैयार होती है मशरूम की फसल
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए वैज्ञानिकों ने बताया कि ओएस्टर और पुआल मशरूम मुख्य रूप से धान के पुआल पर उगाए जाते हैं. निदेशक अनुसंधान डॉ. अनिल कुमार सिंह ने बताया कि वैज्ञानिक विधि के तहत पुआल को 2 से 3 इंच के टुकड़ों में काटकर फॉर्मेलिन के घोल में 10 से 14 घंटे तक उपचारित किया जाता है. इससे हानिकारक जीवाणु और फफूंद नष्ट हो जाते हैं.
20-25 दिनों में निकलना शुरू होता है मशरूम
इसके बाद पुआल में 65 से 70 प्रतिशत नमी बनाए रखते हुए इसे पारदर्शी पॉलीथीन बैग में मशरूम के बीज (स्पॉन) के साथ परत-दर-परत भरा जाता है. बैग को 15 से 20 दिनों तक अंधेरे कमरे में रखने के बाद पॉलिथीन में छोटे छेद किए जाते हैं और हल्का पानी का छिड़काव किया जाता है. करीब 20 से 25 दिनों में मशरूम निकलना शुरू हो जाता है और पूरी फसल लगभग 45 दिनों में तैयार हो जाती है.
मशरूम से बन सकते हैं कई वैल्यू एडेड उत्पाद
प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. रत्नेश कुमार झा ने बताया कि मशरूम में 90 प्रतिशत से अधिक नमी होती है, इसलिए इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए प्रसंस्करण जरूरी है. सूखे मशरूम से पाउडर, अचार, सूप पाउडर, कुकीज़ और नूडल्स जैसे उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग और बेहतर कीमत मिलती है.
सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद
विशेषज्ञों के अनुसार मशरूम शाकाहारी लोगों के लिए प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत है. इसमें 20 से 35 प्रतिशत तक प्रोटीन, आवश्यक अमीनो एसिड, विटामिन-डी और विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स पाया जाता है. साथ ही इसमें वसा, सोडियम और कैलोरी की मात्रा कम होती है, जिससे यह हृदय रोग और डायबिटीज के मरीजों के लिए भी लाभदायक माना जाता है.
कम पूंजी में शुरू करें अपना कारोबार
वैज्ञानिकों ने बताया कि मशरूम उत्पादन कम जगह और कम पूंजी में शुरू किया जा सकता है. ग्रामीण युवा और महिलाएं इसे कुटीर उद्योग के रूप में अपनाकर नियमित आय अर्जित कर सकते हैं. वहीं उत्पादन के बाद बचा हुआ पुआल भी वर्मी कम्पोस्ट जैसी जैविक खाद बनाने में उपयोग किया जा सकता है, जिससे यह पूरी तरह शून्य-अपशिष्ट आधारित तकनीक बन जाती है.
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