Education news from Samastipur:आउटसोर्स पर बहाल कर्मियों को पहले हटाया, फिर रिक्त पदों पर ली जा रही सेवा

Published by : PREM KUMAR Updated At : 04 Apr 2025 10:13 PM

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शिक्षा विभाग में हाल के दिनों में लगातार आदेश-निर्देशों की धज्जियां उड़ाई जा रही है. राज्य स्तर से कभी कोई आदेश जारी होता है तो उसका सही से अनुपालन भी नहीं हो पाता है कि नया आदेश जारी हो जाता है.

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समस्तीपुर : शिक्षा विभाग में हाल के दिनों में लगातार आदेश-निर्देशों की धज्जियां उड़ाई जा रही है. राज्य स्तर से कभी कोई आदेश जारी होता है तो उसका सही से अनुपालन भी नहीं हो पाता है कि नया आदेश जारी हो जाता है. ऐसे में शिक्षा विभाग के राज्य स्तरीय अधिकारियों के आदेश- निर्देश को भी आमलोग अब गंभीरता से नहीं लेते हैं. नया मामला एमडीएम योजना में आउटसोर्स के माध्यम से बहाल कर्मियों का से जुड़ा है. विभागीय आदेश में पूर्व में कहा गया था कि आउटसोर्स के माध्यम से बहाल जिला शिक्षा विभाग में कार्यरत कर्मियों को हटा दिया गया है व उनसे अब सेवा नहीं लेनी है. डीईओ व संबंधित डीपीओ ने भी इसको लेकर आदेश जारी कर दिया था. मध्याह्न भोजन योजना में हटाये गये कर्मियों के जगह पर विभाग के बीआरपी को अन्य प्रखंडों में प्रतिनियुक्ति भी कर दिया गया था लेकिन फिर तीन अप्रैल को मध्याह्न भोजन योजना के निदेशक विनायक मिश्र ने कहा कि है कि आउटसोर्स के माध्यम से उपलब्ध कराये गये पदाधिकारी व कर्मियों जिसमें डीपीएम, जिला लेखापाल व प्रखंड साधनसेवी की सेवा 31 दिसंबर 2025 तक की जाती है. मालूम हो कि मध्याह्न भोजन योजना में अब 6 की सेवा विस्तार कर दिया गया है जबकि अन्य की सेवा समाप्त ही है.

– सवालों के घेरे में शिक्षा विभाग का राज्य कार्यालय भी

डीपीओ पीएम पोषण योजना सुमित कुमार सौरभ ने बताया कि रिक्त सृजित पद पर ही सेवा ली जा रही है. चार प्रखंड साधन सेवी व दो जिला साधन सेवी का पद रिक्त था, इन्हीं पदों पर सेवा ली गयी है. इन पदों पर कार्यरत कर्मियों का वेतन भुगतान मध्याह्न भोजन योजना के प्रबंधन, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन मद से ही किया जा रहा है. मध्याह्न भोजन योजना के सफल संचालन के लिए उपरोक्त कर्मियों की सेवा, नितांत आवश्यकता थी. विदित हो कि शिक्षा विभाग ने 24 फरवरी 2025 को एक पत्र जारी कर स्पष्ट कर दिया था कि बजट के अभाव में आउटसोर्सिंग से नियुक्तकर्मियों की सेवाएं 31 मार्च 2025 के बाद नहीं ली जायेंगी. इस फैसले ने शिक्षा विभाग की कार्य संस्कृति और प्रशासनिक नीतियों पर सवाल खड़े कर दिये हैं.

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