समस्तीपुर में डीएम के आदेश की अनदेखी, 'हिसाब-किताब' के चक्कर में स्थानांतरित कर्मियों को नहीं किया जा रहा विरमित

प्रतीकात्मक तस्वीर
समस्तीपुर में जिलाधिकारी के आदेशों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है. बाल विकास परियोजना कार्यालय में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका के चलते स्थानांतरित कर्मचारियों को कार्यमुक्त नहीं किया जा रहा है. यह स्थिति सरकारी कार्यों को बाधित कर रही है.
समस्तीपुर के मोरवा से मनोज वर्मा की रिपोर्ट
Morwa Transfer Ignored: प्रखंड क्षेत्र में जिलाधिकारी (डीएम) के सख्त निर्देशों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. डीएम के हस्ताक्षर से जारी सरकारी आदेश का प्रखंड स्तरीय अधिकारी और कर्मी पालन करने को तैयार नहीं हैं. पूरा मामला बाल विकास परियोजना कार्यालय (आईसीडीएस) में बड़े पैमाने पर वित्तीय घालमेल से जुड़ा बताया जा रहा है. आलम यह है कि न तो प्रखंड के अधिकारी स्थानांतरित कर्मियों को विरमित (रिलीव) कर रहे हैं और न ही कर्मी अपना पुराना ठिकाना छोड़ने को राजी हैं. इस अड़ंगेबाजी से कार्यालय में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है.
26 जून को ही जारी हुआ था ट्रांसफर का पत्र, निरीक्षण और सरकारी कार्य पूरी तरह शिथिल
मिली जानकारी के अनुसार, बाल विकास परियोजना कार्यालय सहित अन्य विभागों के कर्मियों के तबादले को लेकर जिलाधिकारी द्वारा गत 26 जून को ही आधिकारिक पत्र निर्गत किया गया था. इस आदेश के आलोक में सभी महिला पर्यवेक्षिकाओं (एलएस), समन्वयकों और डेटा ऑपरेटरों को एक सप्ताह के भीतर स्थानांतरित जगहों पर योगदान देना था. आदेश जारी होते ही इन कर्मियों ने दफ्तर का मूल काम बंद कर दिया, जिससे आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण समेत कई महत्वपूर्ण विभागीय कार्य पूरी तरह शिथिल हो गए हैं, लेकिन अंदरूनी 'हिसाब-किताब' का खेल काफी तेज हो गया है.
पोषाहार राशि में अवैध उगाही का खेल, 'क्लियर' होने के बाद ही रिलीव करने का फरमान
सूत्रों का दावा है कि जिस महिला पर्यवेक्षक के जिम्मे जो सेक्टर था, वहां पोषाहार की राशि से होने वाली अवैध उगाही को लेकर कार्यालय में जवाबदेही तय की जा रही है. अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर निर्देश दिए गए हैं कि पहले अवैध राशि की वसूली कर पूरा हिसाब क्लियर करें, उसके बाद ही उन्हें विरमित किया जाएगा.बताया जा रहा है कि जून महीने में पोषाहार का आवंटन अब मिला है, जिसकी निकासी के बाद सेविकाओं से वसूली का गणित बिठाया जा रहा है. इस मनमानी पर आम लोगों ने सवाल उठाए हैं, वहीं महिला पर्यवेक्षकों का कहना है कि जब तक प्रखंड स्तर से अधिकारी उन्हें विरमित नहीं करेंगे, तब तक वे नए प्रोजेक्ट में योगदान कैसे दे सकती हैं.
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