मनरेगा में 3.75 लाख रुपये के गबन का खुलासा, जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर

Author Prakash kumar|Edited by Sarfaraz Ahmad
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​मनरेगा में महाघोटाला: समस्तीपुर में बिना काम किए कागजों पर चमका खेल मैदान, ₹3.75 लाख की वसूली का आदेश

मध्य विद्यालय सिलौत

समस्तीपुर में मनरेगा के तहत खेल मैदान निर्माण में वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है. जांच रिपोर्ट में 3.75 लाख रुपये की वसूली की अनुशंसा की गई है. यह घोटाला सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करता है.

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Samastipur News: समस्तीपुर जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत खेल मैदान निर्माण में कथित वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है. जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) की जांच रिपोर्ट में योजना के क्रियान्वयन में गंभीर गड़बड़ियों का उल्लेख किया गया है. शिकायत के बाद हुई भौतिक जांच में पाया गया कि कागजों पर पूर्ण दर्शाए गए कार्य का बड़ा हिस्सा मौके पर नहीं मिला.

क्या है मामला

मामला समस्तीपुर प्रखंड की पोखरैरा पंचायत के सिलौत गांव स्थित मध्य विद्यालय परिसर में खेल मैदान निर्माण से जुड़ा है. वित्तीय वर्ष 2024-25 में योजना कोड AV/20433618 के तहत इस कार्य के लिए 8,24,300 रुपये का प्राक्कलन स्वीकृत किया गया था.

मनरेगा पोर्टल पर योजना को 28 मार्च 2026 को पूर्ण दर्शाया गया तथा मापी पुस्तिका में 77,103 सीएफटी मिट्टी भराई दर्ज करते हुए 5,54,442 रुपये का भुगतान कर दिया गया.

भौतिक जांच में सामने आई अनियमितता

समाजसेवी विनोद ठाकुर एवं अन्य ग्रामीणों की शिकायत के बाद सहायक अभियंता (मनरेगा) ने स्थल का निरीक्षण किया. जांच रिपोर्ट के अनुसार, मापी पुस्तिका में दर्ज 77,103 सीएफटी मिट्टी भराई के मुकाबले मौके पर केवल 24,521 सीएफटी कार्य ही मिला.

रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग 52,582 सीएफटी मिट्टी भराई का कार्य मौके पर नहीं पाया गया. साथ ही योजना में प्रस्तावित पेवर ब्लॉक भी नहीं लगाए गए, जबकि योजना को पूर्ण दिखा दिया गया था.

3.75 लाख रुपये की वसूली की अनुशंसा

जांच रिपोर्ट के अनुसार, भुगतान की गई राशि का लगभग 68.2 प्रतिशत, यानी 3,75,060 रुपये, वास्तविक कार्य के अनुरूप नहीं पाया गया. सहायक अभियंता ने इस राशि की सरकारी खजाने में वसूली की अनुशंसा की है.

जांच में नियमों के उल्लंघन का भी उल्लेख

रिपोर्ट में कहा गया है कि नियमानुसार मापी पुस्तिका का सत्यापन कनीय अभियंता और सहायक अभियंता द्वारा किया जाना चाहिए, लेकिन इस मामले में तत्कालीन कार्यपालक अभियंता द्वारा बिना आवश्यक सत्यापन के मापी पुस्तिका अनुमोदित कर दी गई. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि पूर्व की कुछ अन्य योजनाओं में भी इसी प्रकार की प्रक्रिया अपनाई गई थी.

इन अधिकारियों से हो सकती है वसूली

जांच अधिकारी ने अनुशंसा की है कि वसूली योग्य राशि संबंधित जिम्मेदार पदाधिकारियों एवं कर्मियों से समानुपातिक आधार पर की जाए. इनमें शामिल हैं:

  • रोजगार सेवक
  • पंचायत तकनीकी सहायक
  • तत्कालीन कनीय अभियंता
  • तत्कालीन कार्यपालक अभियंता
  • तत्कालीन प्रखंड लेखापाल
  • तत्कालीन प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी

स्कूल परिसर में मिला निर्माणाधीन यज्ञशाला

निरीक्षण के दौरान स्कूल परिसर में 24×24 फीट आकार की एक निर्माणाधीन यज्ञशाला भी मिली. स्थानीय लोगों ने बताया कि इसका निर्माण ग्रामीणों के चंदे से कराया जा रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संबंध में प्रधानाध्यापक और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से भी जानकारी ली जा सकती है.

अब इस जांच रिपोर्ट के आधार पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई को लेकर पूरे जिले की नजरें प्रशासन पर टिकी हैं.


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