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Samastipur News:खतरनाक रूप ले रहा डायपर का उपयोग

Updated at : 24 Aug 2025 5:08 PM (IST)
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Samastipur News:खतरनाक रूप ले रहा डायपर का उपयोग

डायपर का उपयोग मनुष्य के लिए तो सुविधाजनक है, लेकिन प्रकृति और पर्यावरण पर इसका काफी विपरीत प्रभाव पड़ा रहा है.

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Samastipur News:मोरवा : डायपर का उपयोग मनुष्य के लिए तो सुविधाजनक है, लेकिन प्रकृति और पर्यावरण पर इसका काफी विपरीत प्रभाव पड़ा रहा है. इसके निष्पादन की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि यह काफी दिनों तक मिट्टी में यूं ही पड़ा रहता है। इसकी गंदगी और प्रदूषण से न केवल मिट्टी प्रभावित होती है बल्कि खेतों में काम करने वाले लोगों पर भी बुरा असर पड़ता है. घर की कामकाजी महिलाएं डायपर लगाकर निश्चित हो जाती हैं कि बच्चे सुरक्षित हैं लेकिन कीटाणु से भरे डायपर पर बच्चे कई घंटे तक पड़े रहते हैं जिससे उन्हें कई तरह की बीमारी का खतरा उत्पन्न हो जाता है. आज हालात यह हो रहा है कि डायपर के डिस्पोजल को लेकर काफी समस्याएं उत्पन्न हो रही है. हर घर से दर्जनों डायपर रोज या तो खुले में या फिर जमीन के नीचे फेंक जाते हैं. दोनों ही सूरत में यह प्रकृति और मानव के लिए काफी नुकसानदायक है. बताया जाता है कि प्रतिदिन एक बच्चे को 8 से 10 डायपर का इस्तेमाल कराया जाता है. एक आंकड़े के मुताबिक जन्म से लेकर ढाई से 3 साल तक के बच्चों के डायपर पर ही 60 से 70000 रुपए खर्च किये जाते हैं. प्रबुद्ध लोगों का कहना है कि अगर इस राशि को पढ़ाई के लिए खर्च किये जाती है तो बच्चों के लिए भी काफी लाभदायक होता और परिवार पर भी आर्थिक बोझ नहीं पड़ता. आज हालात ऐसे हो गये हैं कि पंचायत में कचरा उठाने वाले लोग डस्टबिन में डायपर देखकर नाक-भौं सिकोड़ने लगते हैं. कचरा उठाने से इनकार करते हैं. जानकारों की मानें तो एक डिस्पोजेबल डायपर को पूरी तरह गलने-सड़ने में चार सौ से पांच सौ साल लग सकते हैं. डॉक्टर का कहना है कि इससे केमिकल प्रदूषण होता है. डायपर में प्लास्टिक सुपर अब्जॉर्बेंट, पॉलीमर, डाई और खुशबू वाले केमिकल होते हैं. डॉक्टर का कहना है कि डायपर का उपयोग कम से कम करें. इस्तेमाल के पहले इससे होन होने वाले नुकसान के बारे में पूरी जानकारी हासिल कर लें.

बोले चिकित्सक

मोरवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत सर्जन डॉ के. विद्यार्थी ने बताया कि जिस हिसाब से डायपर का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है और इसके डिस्पोजल की कोई व्यवस्था नहीं है आने वाले समय में यह कई बीमारियों का कारण बन सकता है. बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए डायपर का उपयोग करने वाले लोगों को इससे होने वाली हानि के बारे में भी जानकारी रखने की जरूरत है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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KRISHAN MOHAN PATHAK

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By KRISHAN MOHAN PATHAK

KRISHAN MOHAN PATHAK is a contributor at Prabhat Khabar.

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