बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना : 3548 विद्यार्थियों को लोन देने का सांकेतिक लक्ष्य

Updated at : 04 May 2024 11:35 PM (IST)
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बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना : 3548 विद्यार्थियों को लोन देने का सांकेतिक लक्ष्य

वित्तीय वर्ष 2024-25 में बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत राज्य में इंटर पास बच्चों के अनुपात में प्रत्येक जिले में लोन देने का लक्ष्य निर्धारित कर दिया गया है.

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समस्तीपुर : वित्तीय वर्ष 2024-25 में बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत राज्य में इंटर पास बच्चों के अनुपात में प्रत्येक जिले में लोन देने का लक्ष्य निर्धारित कर दिया गया है. वर्ष 2024 में 12 वीं पास छात्र-छात्राओं की संख्या के जिलावार प्रतिशत के आधार पर ही लक्ष्य निर्धारित किया गया है. अगर लोन लेने के लिए लक्ष्य से अधिक विद्यार्थी आगे आते हैं, तो उन्हें भी लोन दिया जायेगा. जानकारी के मुताबिक इस वर्ष सूबे में 11 लाख 37 हजार 72 परीक्षार्थी इंटर परीक्षा में सफल हुये हैं. इसी के अनुरूप 85 हजार स्टूडेंट्स के लिए लक्ष्य निर्धारित किया गया है. जिला शिक्षा कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक समस्तीपुर से इंटर की परीक्षा में 50 हजार 947 स्टूडेंट सफल हुये है. इनमें से 3548 विद्यार्थियों को लोन देने का सांकेतिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है. बता दें कि इस योजना के तहत उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को अधिकतम चार लाख रुपये का ऋण मिलता है. पहले इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और वोकेशनल सहित अन्य कोर्स के छात्रों को भी लाभ दिया जाता था, लेकिन अब इसमें चार वर्षीय स्नातक कोर्स को भी शामिल कर लिया गया है. यानी बीए, बीएससी व बीकॉम और एमए, एमएससी व एमकॉम के विद्यार्थी भी इसका लाभ ले सकते हैं. कोर्स पूरा होने के एक साल के बाद से ब्याज की गणना की जाती है. 4 प्रतिशत साधारण ब्याज देना पड़ता है जबकि छात्रा, दिव्यांग व ट्रांसजेंडर को एक प्रतिशत ब्याज देना होता है.इस योजना के तहत लोन चुकता नहीं करने वाले चिन्हित छात्रों को नोटिस दी गई है. नोटिस के बाद भी लोन नहीं चुकाने पर सर्टिफिकेट केस किया जा रहा है. 2016 में शुरू योजना के तहत छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए चार प्रतिशत की दर पर चार लाख तक का लोन दिया जाता है. महिलाओं, दिव्यांगों को महज एक प्रतिशत ब्याज देना पड़ता है. लिया गया कर्ज पढ़ाई पूरी होने के सालभर बाद लौटाना पड़ता है. वहीं पहले नौकरी लग जाने पर यह छह माह में लौटाने की व्यवस्था है. पहले बैंक से लोन का भुगतान होता था. 2018 में बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम की स्थापना के बाद वहीं से भुगतान होता है. पढ़ाई पूरी करने के बाद भी रकम चुकाना शुरू नहीं करने पर 925 छात्रों पर सर्टिफिकेट केस भी दायर किया गया है. हालांकि, जिनपर केस दायर किया गया है वे राशि चुकाकर इससे मुक्त हो सकते हैं. नोटिस के बावजूद कर्ज वापसी शुरू नहीं करने वाले छात्रों पर सर्टिफिकेट केस किया गया है. डीईओ कामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने कहा कि छात्रों के उज्ज्वल भविष्य के लिए यह लोन दिया जाता है. इसे समय से चुकाएं जरूर. लोन नहीं चुकाने पर भविष्य में दूसरा लोन नहीं मिल सकता. नौकरी में भी समस्या आएगी.

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