कॉमर्स में 35 % छात्र फेल

Published at :01 Jun 2017 9:38 AM (IST)
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कॉमर्स में 35 % छात्र फेल

समस्तीपुर : इतने बुरे परिणाम की उम्मीद लोगों को बिल्कुल नहीं थी़ खराब परिणाम से बौखलाये विद्यार्थियों ने सरकार की शैक्षणिक व्यवस्था पर ही प्रश्न लगा दिया़ उनका कहना था कि कपियों के सही मूल्यांकन कराने में सरकार विफल रही़ माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों से पुस्तिका का मूल्यांकन कराना कितना उचित कहा जा सकता है़ […]

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समस्तीपुर : इतने बुरे परिणाम की उम्मीद लोगों को बिल्कुल नहीं थी़ खराब परिणाम से बौखलाये विद्यार्थियों ने सरकार की शैक्षणिक व्यवस्था पर ही प्रश्न लगा दिया़ उनका कहना था कि कपियों के सही मूल्यांकन कराने में सरकार विफल रही़
माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों से पुस्तिका का मूल्यांकन कराना कितना उचित कहा जा सकता है़ हालांकि, विद्यार्थियों के बीच पनप रहे आक्रोश को शांत कराने के लिए सरकार ने जुलाई में पूरक परीक्षा लेने की घोषणा की है, पर शिक्षा की ऐसी लचर व्यवस्था से शैक्षणिक स्तर सुधर पायेगा़ यह बात सभी के मन में कौंध रही है़ कभी सख्ती तो कभी इतनी नरमी कि सालों से पुस्तक स्पर्श नहीं करने वाले विद्यार्थी भी अच्छे अंक से पास हो जाते हैं. इस बार हालात अलग थे़
मूल्यांकन करने वाले शिक्षकों में अधिकांश ने अपनी मांगों को लेकर उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन से स्वयं को अलग रखा़ इसके कारण कई जगहों में प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों का सहयोग लिया गया़
काॅपी की जांच तो किसी तरह से संपन्न हो गयी, लेकिन परिणाम ने सब कुछ उजागर कर दिया़ वहीं कदाचारमुक्त परीक्षा का असर और बार कोडिंग व्यवस्था का असर इस बार इंटरमीडिएट परीक्षा के रिजल्ट पर साफ दिखा़ सफल होने वाले परीक्षार्थियों की तुलना में असफल होने वाले परीक्षार्थियों का प्रतिशत कहीं ज्यादा रहा़ चंद परीक्षार्थियों को ही प्रथम श्रेणी नसीब हो सका और सेकेंड व थर्ड डिवीजन पाने वालों की संख्या से फेल का प्रतिशत ज्यादा रहा़
जिले को इंटर की परीक्षा में टॉपर देने वाले संस्थानों का भी परिणाम काफी खराब रहा़ साइबर कैफे पर रिजल्ट लेने पहुंचने वाले अधिकांश परीक्षार्थियों को आशा के अनुरूप रिजल्ट न आने का मलाल दिखा़ सैकड़ों ऐसे परीक्षार्थी रहे जिन्हें सभी विषयों में न्यूनतम अहर्ता का अंक भी नसीब नहीं हो सका़
अधिकांश छात्र फिजिक्स, केमिस्ट्री व बायोलजी में फेल रहे़ विज्ञान संकाय में महज 11 फीसदी परीक्षार्थी ही सफल हो सके़ वहीं वाणिज्य संकाय में 28 फीसदी परीक्षार्थियों ने बाजी मारी़ कला संकाय के परिणाम की स्थिति और भी खराब रही, जिसमें मात्र नौ फीसदी परीक्षार्थी ही सफल हो पाये. कुल मिलाकर वर्ष 2017 के रिजल्ट ने छात्र-छात्राओं को खूब रुलाया़ विज्ञान संकाय में महज आठ, कला संकाय में छह व वाणिज्य संकाय में 33 फीसदी परीक्षार्थी ही प्रथम श्रेणी से पास हुए.
प्राइवेट से परीक्षा भी बड़ा कारण :इंटरमीडिएट के खराब रिजल्ट के लिए बड़ी संख्या में छात्रों के प्राइवेट रूप से परीक्षा में शामिल होना भी बताया जाता है़ कई स्कूलों खासकर वित्त रहित कॉलेजों द्वारा वैसे छात्रों का पंजीयन कराकर परीक्षा में शामिल कराया जाता है, जिनका स्कूलों में नामांकन नहीं होता. जानकार बताते हैं कि जब परीक्षा में कदाचार की छूट नहीं मिलती है, तो ऐसे छात्र असफल हो जाते हैं. इसका असर पूरे परिणाम पर पड़ता है.
मिडिल को हाइस्कूल का दर्जा, नहीं मिले शिक्षक : अगर आठवीं के शिक्षक नौवीं के बच्चे को पढ़ायेंगे, तो ऐसे में पढ़ाई के स्तर का अंदाजा आप लगा सकते हैं. 56 मध्य विद्यालय तो उच्च विद्यालय में अपग्रेड हो गया, लेकिन एक भी शिक्षक की उच्च विद्यालय में बहाली नहीं होने से बच्चे का भविष्य पर तो प्रश्नचिह्न लग रहा है़
इन अपग्रेड विद्यालयों में पांच विषयों के शिक्षकों के नियोजन का प्रस्ताव विभाग के द्वारा भेजा गया था, लेकिन नियोजन की अनुमति नहीं मिली. जिले में 103 उच्च, स्थापना अनुमति प्राप्त 36, अपग्रेड विद्यालयों की संख्या 113 है. सूत्रों की मानें, तो इन विद्यालयों में 38 फीसदी विषयवार शिक्षकों की कमी है़ अधिकांश संस्थानों में लैब की व्यवस्था नहीं है. कुछ जगहों पर लैब है, तो उपकरण नहीं.
छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए कोचिंग पर आश्रित होना पड़ता है़ जहां मोटी रकम लेकर शिक्षा दी जाती है़ सबसे खराब स्थिति जिले के अंगीभूत कॉलेज के विद्यार्थी की रही़ अंगीभूत काॅलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थी भी कुछ खास नहीं कर सके़
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