मिट गयी राजू चौधरी के वंश की रेखा

परिजनों का रो -रोकर हुआ बुरा हाल भाग्य को कोसते दिखे परिजन मातमी सन्नाटा में समाया सिवैसिंहपुर गांवप्रतिनिधि, मोहिउद्दीननगर . अपने नन्हे – मुन्ने बच्चों को बुधवार की शाम राजू चौधरी अपनी दवा की दुकान से घर भेजते वक्त यह नहीं समझ पाया था कि वह आज संतानहीन हो जायेगा. उसका दोनों लाड़ला घर पहुंचने […]
परिजनों का रो -रोकर हुआ बुरा हाल भाग्य को कोसते दिखे परिजन मातमी सन्नाटा में समाया सिवैसिंहपुर गांवप्रतिनिधि, मोहिउद्दीननगर . अपने नन्हे – मुन्ने बच्चों को बुधवार की शाम राजू चौधरी अपनी दवा की दुकान से घर भेजते वक्त यह नहीं समझ पाया था कि वह आज संतानहीन हो जायेगा. उसका दोनों लाड़ला घर पहुंचने के बजाय ईश्वर के प्यारे हो जायेंगे. अगर इसकी भनक होती तो वह दोनों बच्चों को अकेला नहीं छोड़ा होता. ट्रैक्टर की ठोकर से दीवार के नीचे दबकर जिया और ख्वाहिश की मौत ने उसकी कमर ही तोड़ दी है. कुछ यही हाल उसकी पत्नी तेजू जायसवाल की है. उसका रो – रोकर बुरा हाल है. उसके करुण चीत्कार से वातावरण में मातम छा रहा है. हर किसी की आंखें नम है. अपने परिवार को खुशहाल बनाने के लिए राजू और उसकी पत्नी तेजू ने छोटे परिवार का सपना देखा था. राजू की बगिया के अचानक उजड़ जाने से उसके बड़े भाई ओम प्रकाश व जयप्रकाश भी काफी विचलित दिख रहे थे. इन दोनों बड़े भाइयों की पत्नियां भी विलख – विलख परिवार के चिराग के बुझने का शोक मना रही थी. मासूमों की किलकारियों से गूंजने वाले आंगन के सूना हो जाने को लेकर उपस्थित जन समूह भी आह भर रहा था.
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