समाज सेवा की भावना ने जगायी आइएएस बनने की हसरत : सुहर्ष
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :05 Jul 2015 7:32 AM
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समस्तीपुर : समस्तीपुर के सुहर्ष को भले ही यूपीएससी में पांचवीं रैंक मिली है, लेकिन छात्रों की बात करें, तो उसमें टॉप किया है सुहर्ष ने. उसकी सफलता से पैतृक गांव भगवानपुर देसुआ व समस्तीपुर शहर के आवास में बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है. उसके चिकित्सक पिता डॉ फूलेंद्र भगत अपने बेटे […]
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समस्तीपुर : समस्तीपुर के सुहर्ष को भले ही यूपीएससी में पांचवीं रैंक मिली है, लेकिन छात्रों की बात करें, तो उसमें टॉप किया है सुहर्ष ने. उसकी सफलता से पैतृक गांव भगवानपुर देसुआ व समस्तीपुर शहर के आवास में बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है. उसके चिकित्सक पिता डॉ फूलेंद्र भगत अपने बेटे की सफलता से उत्साहित हैं.
उन्होंने ने ही सुहर्ष को 2010 में आइआइटी मुंबई से इंजीनियरिंग करने के क्रम में आइएएस बनने की प्रेरणा जगायी थी. उस वक्त पिता की बात सुहर्ष के दिलो-दिमाग में छाया कि उसने कैरियर को मुकाम देने की ठान ली.मुंबई में ही तैयारी के क्रम में अपने दोस्तों से मदद मिली.
वो लगातार वह चार बार इस परीक्षा में सफल रहा, लेकिन वो प्रॉपर आइएएस बनना चाहता था. इस वजह से लगातार परीक्षा में बैठता रहा. पहली बार लेखा, दूसरी बार सूचना प्रशाखा, तो तीसरी बार आयकर विभाग अधिकारी बना था, लेकिन इससे संतुष्ट नहीं हुआ. उसने फिर से जोरदार तैयारी कर यूपीएससी परीक्षा में बैठने का फैसला किया. 28 वर्षीय सुहर्ष ने पांचवीं रैंक लाकर अपनी प्रतिभा का लोहा पूरे देश में मनवाया है. परीक्षा के बदले पैटर्न को उसने चुनौती के रूप में लेते हुए भूगोल विषय से यह सफलता अर्जित की है.
बहादुरपुर में अपने चिकित्सक पिता के साथ खुशियां मना रहे सुहर्ष ने कहा कि कैरियर के साथ समाज सेवा की भावना ने ही उसे इस मुकाम तक पहुंचने में मदद की है. आज के युवा वर्ग संघर्ष को जीवन मानते हुए अपने कैरियर के लिए संघर्ष तब तक करते रहें, जब तक मंजिल मिल नहीं जाती है.
इस राह में इस बात का खास ध्यान रखना होगा कि मुकाम पाने के लिए किसी भी परिस्थिति में न तो उन्हें उतावला होने की जरूरत है और न ही उसे दिल से लेना है. वह अपनी सफलता का श्रेय माता मधु भगत व पिता डॉ फूलेंद्र भगत के साथ अपने उन दोस्तों को देता है, जिसने उन्हें लगातार प्रेरित कर यहां तक की राह तय करने में मदद की. उसने बताया कि शनिवार को उसे पीएमओ से ज्वाइनिंग के लिए फोन आ चुका है. पदाधिकारियों ने उसे मंगलवार तक योगदान देने की सलाह दी है.
ग्रामीण वातावरण में ही मिली प्रारंभिक शिक्षा
समस्तीपुर जैसे छोटे से शहर में सुहर्ष ने आरंभिक शिक्षा ग्रामीण वातावरण में ही हासिल की. उसकी प्रतिभा को देखते हुए पिता ने उसे देवघर के आरके मिशन स्कूल में दाखिल करा दिया, जहां से उसने 2003 में दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की. इसके बाद दिल्ली के आरकेपुरम स्थित डीपीएस से 2005 में बारहवीं की परीक्षा पास की.
उस वक्त इंजीनियरिंग को अपना कैरियर मान कर सुहर्ष ने परिश्रम करते हुए 2010 में आइआइटी मुंबई में दाखिला लिया. इसमें उसे 941 वां रैंक प्राप्त हुआ था. इसके बाद पिता ने उसे आइएएस बनने के लिए प्रेरित किया, तो उसके कैरियर की राह बदल गयी.
बेटे की सफलता से गदगद डॉ फूलेंद्र भगत ने कहा कि अभिभावकों को सदैव अपने बच्चों को अच्छा करने के लिए प्रेरित करते रहना चाहिए. इससे उनके अंदर बेहतर करने की चाहत जगती है, जो एक दिन उन्हें उनके कैरियर तक पहुंचाने में मदद करता है. उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी मधु अपने घरेलू काम काज के बाद बचने वाले समय को हमेशा समाज में लगाने की इच्छा रखती थी, लेकिन बच्चों की पढ़ाई के कारण उसे ऐसा क रने का मौका नहीं मिला.
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चिकित्सक भाई ने भेजा बधाई संदेश
सुहर्ष का छोटा भाई डॉ निकेत हर्ष नयी दिल्ली में मौलाना आजाद मेडिकल कालेज में एमएस कर रहा है. बड़े भाई की सफलता की जानकारी मिलते ही उसने फोन कर बधाई संदेश दिया.
साथ ही पिता को भी प्रेरणा देने के लिए धन्यवाद दिया. उसने कहा कि पिता की प्रेरणा जिस तरह से बड़े भाई को काम आयी है, ठीक उसी तरह से वह भी अपने जीवन के लक्ष्य को हासिल कर एक दिन अपने पिता के सपनों को साकार कर दिखायेगा.
नानी के निधन से दुखी सुहर्ष ने नहीं मनाया जश्न
10 दिन पहले मेरी नानी आद्या देवी का निधन हो गया, इसलिए हम कामयाबी का जश्न नहीं मना रहे हैं.
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