बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष बने डॉ दुर्गेश राय
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 05 Jun 2015 8:46 AM
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समस्तीपुर : राज्य सरकार ने डॉ दुर्गेश राय को बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष नियुक्त किये गये हैं. मानव संसाधन विकास मंत्रलय की ओर से गुरुवार को इस आशय से संबंधित पत्र डॉ राय को प्राप्त हुआ है. वे अगले तीन वर्ष तक इस पद पर कार्यरत रहेंगे. छात्र जीवन से ही राजनीति में […]
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समस्तीपुर : राज्य सरकार ने डॉ दुर्गेश राय को बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष नियुक्त किये गये हैं. मानव संसाधन विकास मंत्रलय की ओर से गुरुवार को इस आशय से संबंधित पत्र डॉ राय को प्राप्त हुआ है.
वे अगले तीन वर्ष तक इस पद पर कार्यरत रहेंगे. छात्र जीवन से ही राजनीति में कदम रखने वाले डॉ राय समस्तीपुर जिला के जितवारपुर निजामत गांव के रहने वाले हैं. वर्ष 1992 में उन्होंने समस्तीपुर कॉलेज, समस्तीपुर से संस्कृत विषय में स्नातकोत्तर किया. फिर डॉ दिनेश्वर यादव की देखरेख में संस्कृत काव्य में जन साधारण एक विेषण विषय पर वर्ष 2014 के जून में पीएचडी किया. फिलहाल वे एसएमआरसीके कॉलेज मथुरापुर में संस्कृत विभाग में प्राध्यापक पद पर कार्यरत हैं. बचपन से ही सामाजिक कार्यो में रुचि रखने वाले डॉ राय छात्र आंदोलनों के अलावा युवाओं के विभिन्न गतिविधयों में सक्रिय भूमिका निभायी.
वर्ष 1994 में नीतीश कुमार के नेतृत्व में स्थापित समता पार्टी को समस्तीपुर में पहचान दिलाने में अग्रणी भूमिका निभायी. इसके बाद से वे लगातार नीतीश के नेतृत्व में जदयू की सक्रिय राजनीति में भागीदारी निभा रहे हैं. दूरभाष पर जानकारी देते हुए डॉ राय ने बताया कि शुक्रवार को वे विधिवत अध्यक्ष पद पर योगदान करेंगे. बिहार राज्य संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष पद के लिये दुर्गेश राय के चयन पर जदयू कार्यकर्ताओं ने हर्ष व्यक्त किया है. मौके पर जिलाध्यक्ष अश्वमेघ देवी, शारिक रहमान लवली, तकी अख्तर, छेदीलाल भरतिया, सुधा आर्या आदि शामिल थे.
मोहनपुर : पर्यावरण दिवस के दिन वैवाहिक जोड़े में बंधने वाले वर वधू शुक्रवार पर्यावरण रक्षा की संकल्प लेंगे. जलालपुर गांव के शिक्षक सत्येंद्र कुमार महतो की सुपुत्री डिंपल कुमारी गढ़ी मोहनपुर निवासी राज कुमार राय के पुत्र पंकज कुमार के साथ वैवाहिक सूत्र में बंधेगी.
विवाह के बाद नव दंपती पर्यावरण सुरक्षा का संकल्प लेंगे. विवाह के तुरंत बाद फलदार आम के पौधे नव दंपती द्वारा लगाये जायेंगे. गांव की बेटी जब दुल्हन बनकर विदा होगी तो अपनी स्मृति छोड़ जायेगी. वृक्ष की रक्षा का संकल्प बेटी के माता-पिता तथा दूसरे परिजन भी लेंगे. बेटी के द्वारा लगाये गये पौधे की सिंचाई करते हुए पर्यावरण सुरक्षा का संदेश फैलायेंगे. जलालपुर गांव में भले ही यह पहली घटना हो लेकिन बगल के कई गांव में बेटी विवाह के मौके पर लोग पेड़ लगाने की परंपरा कायम कर चुके हैं. पूरे देश में मोहनपुर प्रखंड में पर्यावरण तथा बेटी बचाने का जो संदेश दिया है वह यह सिद्ध करता है कि पिछड़े क्षेत्रों में भी अच्छे विचार व सकारात्मक सोच के लोग मौजूद हैं.
डिंपल के चाचा एवं सकलदीप कुमार ने बताया कि बेटी विवाह ने का जितना बड़ा सुख मिलता है उससे कहीं अधिक सुख पौधे लगाने का होता. पूरे देश में बेटी तथा पर्यावरण सुरक्षा का जो कार्यक्रम किया गया है वह मोहनपुर प्रखंड में फलीभूत होते दिख रहा है. विवाह में फिजूलखर्ची पर रोक लगाने की पूरी सावधानी बरती गयी है. संयोग से शुक्रवार पर्यावरण दिवस भी है और यह दिवस जलालपुर गांव में नयावतरीके से मनेगी.
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