जल स्तर गिरने से निजी बोर फेल, हैंडपंप भी सूखने लगे
Updated at : 14 Apr 2019 1:42 AM (IST)
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जलस्तर घटने से शहर में पानी का संकट समस्तीपुर : भीषण गर्मी और गिरते जलस्तर से शहरी क्षेत्र में भी पेयजल संकट गहराने लगा है. शहर के विभिन्न क्षेत्रों में चापाकल ही जलस्रोत का मुख्य साधन है. जलस्तर घटने से लोग बूंद-बूंद को पानी को तरस रहे हैं. शहर के कई क्षेत्रों में चापाकल या […]
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जलस्तर घटने से शहर में पानी का संकट
समस्तीपुर : भीषण गर्मी और गिरते जलस्तर से शहरी क्षेत्र में भी पेयजल संकट गहराने लगा है. शहर के विभिन्न क्षेत्रों में चापाकल ही जलस्रोत का मुख्य साधन है. जलस्तर घटने से लोग बूंद-बूंद को पानी को तरस रहे हैं. शहर के कई क्षेत्रों में चापाकल या तो खराब पड़े हैं या फिर उनका जलस्तर इतना नीचे चला गया है कि काफी देर पसीना बहाने के बाद भी ठीक से पानी नहीं मिल पाता. वही शहरी क्षेत्र में चल रहे जल नल योजना भी कछुए की गति से चल रही है.
वार्ड आठ के पार्षद कुमारी मीरा मिश्र का कहना है कि दिनों दिन घटते जलस्तर व पानी के नए स्रोत विकसित नहीं होने से स्थिति और अधिक कठिन होती जा रही है. वहीं जल स्तर गिरने से निजी बोर भी फेल हो गए हैं. जिसकी वजह से अधिक परेशानी हो रही है. इधर शहर के गली और मोहल्लों में सबमर्सिबल पंपों के चलते पानी संकट गहराने लगा है. बिना अनुमति के लग रही सबमर्सिबल पंपों से जमीन का जल स्तर इतना ज्यादा नीचे पहुंच गया है कि 40 से 50 फीट गहरे हैंडपंपों की जलधारा सूखने लगी है.
यदि इस ओर जल्द ही नगर परिषद प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई न हुई तो हैंडपंपों पर निर्भर शहर की आधी से ज्यादा आबादी पानी की एक-एक बूंद को तरस जाएगी. नप के टैक्स दरोगा भूपेन्द्र सिंह कहते हैं कि सरकार को पर्यावरण (सुरक्षा) अधिनियम, 1986 को कड़ाई से लागू करना होगा. इसके तहत भूमिगत जल के अनियंत्रित दोहन पर अंकुश लगाने का प्रावधान है. साथ ही भूमिगत जल के घटते स्तर को रोकने के लिए वर्षा के पानी के संरक्षण के ठोस उपाय करने होंगे.
आरओ केन से बुझ रही प्यास
शहर के अधिकांश लोग पानी के लिए आरओ केन पर निर्भर हैं. क्योंकि मोहल्लों में पानी के संकट से जूझ रहे शरहवासी नहाने और धोने के पानी का उपयोग जैसे तैसे कर लेते हैं, लेकिन पीने के लिए समस्या रहती है. इसलिए ज्यादातर लोगों ने आरओ केन लेना शुरू कर दिया हैं. जबकि आरओ प्लांट संचालक लोगों से हर माह मनमाने तरीके से करीब 600 रुपए तक ऐंठ रहे हैं. बता दें कि शहर में लगाए गए आरओ प्लांट भी बिना लाइसेंस के संचालित किए जा रहे हैं.
ऐसे में आरओ प्लांट संचालक पानी का दुरुपयोग कर निजी लाभ कमाने में लगे हुए हैं, जिन पर नगर परिषद के अधिकारी भी कार्रवाई करने में हिचकिचाते हैं. प्रोफेसर कॉलोनी के आयुष बताते है कि 500 लीटर की टंकी भरने में मोटर को डेढ़ घंटे से अधिक लग रहे है. इधर भू-वैज्ञानिकों के मुताबिक, साल भर में होने वाली कुल बारिश का कम से कम 31 प्रतिशत पानी धरती के भीतर रीचार्ज के लिए जाना चाहिए. तब जल स्रोतों से लगातार पानी मिल सकेगा. लेकिन एक शोध के मुताबिक,कुल बारिश का औसतन 13 प्रतिशत पानी ही धरती के भीतर जमा हो रहा है.
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