"आज का भारत नयी ऊर्जा व पराक्रम से भरपूर" : लालजी टंडन

Updated at : 13 Mar 2019 12:47 AM (IST)
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"आज का भारत नयी ऊर्जा व पराक्रम से भरपूर" : लालजी टंडन

दरभंगा : कुलाधिपति लालजी टंडन ने कहा कि भारतीयता हमारी चिंतन धारा के केंद्र में होनी चाहिए. ग्लोबल और और लोकल के बीच सुखद संतुलन बना कर रखना चाहिए. आधुनिकता के नाम पर भारतीयता को तिलांजलि नहीं दी जा सकती है. श्री टंडन मंगलवार को लनामिवि के डॉ नागेंद्र झा स्टेडियम में आयोजित नौवें दीक्षांत […]

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दरभंगा : कुलाधिपति लालजी टंडन ने कहा कि भारतीयता हमारी चिंतन धारा के केंद्र में होनी चाहिए. ग्लोबल और और लोकल के बीच सुखद संतुलन बना कर रखना चाहिए. आधुनिकता के नाम पर भारतीयता को तिलांजलि नहीं दी जा सकती है. श्री टंडन मंगलवार को लनामिवि के डॉ नागेंद्र झा स्टेडियम में आयोजित नौवें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए बोल रहे थे.

उन्होंने कहा कि हम लोग भूमंडलीकरण की दौर से गुजर रहे हैं. क्षेत्र और देश की सीमाएं विलुप्त होती जा रही है. संचार माध्यमों में क्रांति आई है. किताबी दुनिया से निकल कर इंटरनेट और वेब की दुनिया में लोग आ गए हैं. रोजगार का स्वरूप बदल रहा है. उसकी संभावनाएं देश-देशांतर तक परिव्याप्त है. शिक्षण प्रविधि बदल गई है.

कुलाधिपतिने कहा कि युवाओं की राष्ट्रभक्ति में अटूट निष्ठा के कारण आज का भारत नई ऊर्जा और पराक्रम से भरा हुआ है. हमारे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक वैभव का पुनरुत्थान हो रहा है. युवाओं में राष्ट्रीयता की उद्दाम लहरें प्रवाहित हो रही है.

आतंकवाद के विरुद्ध हमारे संघर्ष को पूरी दुनिया का समर्थन
कुलाधिपति ने कहा कि जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले का प्रतिकार करते हुए देश ने अपने प्रचंड पौरुष को प्रकट किया है. आतंकवाद के विरुद्ध हमारे संघर्ष को पूरी दुनिया ने समर्थन दिया है. कहा कि हमारे देश का राष्ट्रवाद वसुधैव कुटुंबकम की भावना पर आधारित है, जो सर्वे भवंतु सुखिन: में विश्वास करता है. हमारी राष्ट्रीयता हमें विश्व मैत्री का पाठ पढ़ाती है. आतंकवाद पूरी मानवता के लिए चुनौती बनता जा रहा है. विश्व के अधिकतर देशों के लिए आतंकवाद विकट समस्या बन गयी है. इसे समूल उखाड़ फेंकने के लिए हमारी प्रतिबद्धता जगजाहिर है. हमारी युवा शक्ति, सैन्य शक्ति एवं राष्ट्रीय एकता इस चुनौती से निबटने में मददगार है.
पूरे विश्व की नजर भारत पर
पूरे विश्व की नजर आस्था और विश्वास के साथ आज भारत पर टिकी है. हमारी सांस्कृतिक विरासत के अक्षुण्ण बने रहने के पीछे हमारी वसुधैव कुटुंबकम की उद्दात्त मैत्री भावना है. भारत सबको साथ लेकर चलने वाला राष्ट्र है. जगदगुरु के रूप में हमारी विश्व प्रसिद्धि रही है. हम मानवता और सृजनात्मकता के पुजारी रहे हैं.
राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में बिहार का प्रदर्शन सर्वोत्कृष्ट
कुलाधिपति ने कहा कि प्राचीन भारत का इतिहास बिहार का ही इतिहास है. नालंदा और विक्रमशिला विद्या का ऐसा केंद्र था, जहां देश-देशांतर के लोग आकर ज्ञान अर्जन करते थे. वर्तमान में परिस्थिति बदल गई है. बिहार के छात्र बाहर जाकर उच्च शिक्षा ग्रहण करने लगे हैं. हालांकि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में बिहार के छात्रों का प्रदर्शन सर्वोत्कृष्ट है. इसके कारण बिहार के विद्यार्थी बाहर जाकर उच्च शिक्षा की खबर बनते हैं, लेकिन बिहार की उच्च शिक्षा खबर नहीं बन पाती है.
उच्च शिक्षा में गुणात्मक परिवर्तन और विकास की आवश्यकता
कुलाधिपति ने कहा कि बिहार की उच्च शिक्षा में गुणात्मक परिवर्तन और विकास की आवश्यकता है. गुणात्मक शिक्षा की दिशा में इन दिनों महत्वपूर्ण कदम उठाये गये हैं. किए जा रहे प्रयास का सार्थक परिणाम भी आने लगा है. हम उस गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए प्रयत्नशील हैं, जो नई पीढ़ी की आंखों में नया सपना और होठों पर मुस्कान लाने में सक्षम हो.
पदमश्री डॉ सीपी ठाकुर को डीएससी व पद्मश्री गोदावरी दत्ता को दी गयी डिलीट की मानद उपाधि
समारोह में यूजीसी के चेयरमैन प्रो. धीरेंद्र पाल सिंह ने दीक्षांत भाषण दिया. कुलपति प्रो. सुरेंद्र कुमार सिंह ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया. मंच से पदमश्री डॉ सीपी ठाकुर को डीएससी एवं पद्मश्री गोदावरी दत्ता को डिलीट की मानद उपाधि कुलाधिपति के हाथों प्रदान कराया गया. इसके अलावा दो सत्रों के 51 विषयवार पीजी टॉपर एवं ओवर आल टॉपर को गोल्ड मेडल एवं उपाधि दी गयी. मानविकी संकाय के अंग्रेजी विषय के इकलौता डीलिटधारी प्रो. पुनीता झा सहित सभी संकाय से पीएचडी के 262, दो सत्र के पीजी, एमएसी बायोटेक्नोलॉजी, एमएड, एमबीए के 2425 डिग्री एवार्ड किये जाने की घोषणा मंच से की गयी. संचालन कुलसचिव निशीथ कुमार राय ने किया.
गोल्ड मेडलिस्ट छात्रों के नामों की घोषणा परीक्षा नियंत्रक डॉ अशोक कुमार मेहता ने की. सभी संकाय के डीन की अनुशंसा पर डिग्री अवॉर्ड किए जाने की घोषणा कुलपति प्रो. सिंह ने की. इस दौरान राजभवन के प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह, प्रतिकुलपति प्रो. जय गोपाल, संस्कृत विवि के कुलपति प्रो. सर्वनारायण झा, विधायक संजय सरावगी, विप सदस्य डॉ दिलीप चौधरी, मेयर बैजयंती देवी खेड़िया, पूर्व कुलपति प्रो. राजमणि प्रसाद सिंहा आदि मौजूद रहे.
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