झुंड में नीलगाय, घोड़पाड़ा सहित अन्य जंगली जानवर फसलें कर रहे बर्बाद

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झुंड में नीलगाय, घोड़पाड़ा सहित अन्य जंगली जानवर फसलें कर रहे बर्बाद

किसान इन दिनों जंगली जानवर घोड़पाड़ा, नीलगाय व अन्य जंगली जानवरों के आतंक से काफी परेशान हो गये हैं.

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जंगली जानवरों के आतंक से परेशान हैं किसान

पतरघट. क्षेत्र के धबौली, कपसिया, कमलजडी, कहरा, विशनपुर सहित आसपास के बस्तियों के सभी किसान इन दिनों जंगली जानवर घोड़पाड़ा, नीलगाय व अन्य जंगली जानवरों के आतंक से काफी परेशान हो गये हैं. जानवरों का झुंड यहां के स्थानीय किसानों के लिए नासूर बन चुका है. दर्जनों से अधिक के झुंड में नीलगाय, घोड़पाड़ा सहित अन्य जंगली जानवरों का झुंड धबौली के घने बगीचे एवं धबौली के अशुआ बांध के समीप स्थित जंगली पेड़ पौधे के बीच शरण लिए रहते है. जो रात के अंधेरे एवं दिन के उजाले में धबौली, कपसिया, कमलजड़ी, कहरा, विशनपुर सहित अन्य जगहों पर स्थित किसानों के खेतों में लगे गेंहू, मक्का सहित अन्य फसलों को बर्बाद कर रहे हैं. साथ-साथ छोटे-छोटे आम, लीची, कटहल, कदम सहित अन्य पेड़ पौधे को जड़ से तोड़कर बर्बाद कर रहें हैं. जंगली जानवरों के आतंक को रोकने के लिए यहां के स्थानीय किसान अपने सामर्थ्य के अनुसार खेतों के मेड़ को बांस बत्ती से घेरकर फसलों के बचाव का भरपूर प्रयास कर रहे हैं. उसके अलावे दिन के उजाले में फसलों की पहरेदारी भी करते हैं. लेकिन किसानों के लिए प्रत्येक दिन पहरेदारी कर पाना मुश्किल हीं नहीं बमुश्किल काम है. समय बीतने के साथ हीं नीलगाय, घोड़पाड़ा, सुअर, बंदर, की संख्या में दिन प्रतिदिन काफी बढ़ोतरी देखी गयी.

किसानों ने बताया कि पहले तो ये जानवर लोगों को देखते ही भाग जाते थे, लेकिन अब वे किसानों की मौजूदगी में भी निडर होकर झुंड में बेखौफ होकर फसलों की बर्बादी में लगे रहते हैं. क्षेत्र के दर्जनों किसानों ने बताया कि जंगली जानवरों के आतंक से निजात दिलाए जाने के संबंध में हमलोगों ने तकरीबन साल भर पहले पूर्व मंत्री सह स्थानीय विधायक, डीएम, बीडीओ, सीओ, ओपी प्रभारी सहित अन्य को ज्ञापन सौंपा था. उन्होंने किसानों के हित में आवश्यक कार्रवाई किए जाने का आग्रह किया. बावजूद अब तक किसी भी प्रकार का निष्कर्ष नहीं निकला है तथा समस्या जस की तस बनी हुई है. अब तक किसी भी अधिकारियों के द्वारा किसानों की इस महत्वपूर्ण समस्या के समाधान की दिशा में पहल नहीं की जा रही है. किसानों ने जिला प्रशासन से मांग करते हुए अविलंब वन्य जीवों के उत्पात से निजात दिलाए जाने की मांग की है.

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दीपांकर श्रीवास्तव

लेखक के बारे में

By दीपांकर श्रीवास्तव

दीपांकर श्रीवास्तव प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के सहरसा कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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