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दो अभियुक्तों को तीन-तीन वर्ष का सश्रम कारावास, पांच हजार का लगाया अर्थदंड

Updated at : 21 Jan 2026 7:01 PM (IST)
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दो अभियुक्तों को तीन-तीन वर्ष का सश्रम कारावास, पांच हजार का लगाया अर्थदंड

जिले के सौरबाजार थाना क्षेत्र से जुड़े आर्म्स एक्ट के एक गंभीर मामले में न्यायालय एसीजेएम टू ने सख्त रुख अपनाते अवैध हथियार रखने के दोष में दो अभियुक्तों को सजा सुनायी है.

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अवैध हथियार रखने के दोष में न्यायालय ने सुनायी सजा

सहरसा. जिले के सौरबाजार थाना क्षेत्र से जुड़े आर्म्स एक्ट के एक गंभीर मामले में न्यायालय एसीजेएम टू ने सख्त रुख अपनाते अवैध हथियार रखने के दोष में दो अभियुक्तों को सजा सुनायी है. सौरबाजार थाना कांड संख्या 513/24 में न्यायालय ने अभियुक्त ललटू कुमार एवं नीतीश कुमार को दोषी ठहराते आर्म्स एक्ट के तहत प्रत्येक को तीन वर्ष का सश्रम कारावास एवं पांच हजार अर्थदंड की सजा सुनायी. साथ ही यह भी आदेश दिया कि अभियुक्त अर्थदंड की राशि अदा नहीं करते हैं तो उन्हें 15 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा. इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने अभियुक्तों को धारा 26(1) आर्म्स एक्ट के तहत भी दोषी पाते तीन वर्ष का सश्रम कारावास एवं एवं पांच हजार अर्थदंड से दंडित किया. इस मद में भी अर्थदंड अदा नहीं करने पर अभियुक्तों को नियमानुसार अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.

जानकारी के अनुसार, पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि थाना क्षेत्र में कुछ व्यक्ति अवैध हथियार लेकर घूम रहे हैं. सूचना के सत्यापन के बाद पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई करते छापेमारी की गयी, जिसमें दोनों अभियुक्तों को पकड़ा गया. तलाशी के दौरान उनके पास से अवैध देशी पिस्तौल एवं जिंदा कारतूस बरामद किया गया. पूछताछ के दौरान अभियुक्त हथियार रखने से संबंधित कोई वैध लाइसेंस या कागजात प्रस्तुत नहीं कर सका. जिसके बाद उनके विरुद्ध आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया. अनुसंधान के क्रम में पुलिस द्वारा घटनास्थल से संबंधित साक्ष्य एकत्र किये गये. बरामद हथियारों की विधिवत जब्ती की गयी एवं गवाहों के बयान दर्ज किये गये. अनुसंधान पूर्ण होने के बाद पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित किया. विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयान एवं दस्तावेजों का न्यायालय ने गहन परीक्षण किया. न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि अवैध हथियार रखना ना केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि समाज में भय एवं अपराध को बढ़ावा देता है. अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में सफल रहा है. जिसके फलस्वरूप अभियुक्तों को दोषी ठहराते सजा सुनायी गयी. मामले में अभियोजन पदाधिकारी अनुसुइया देवी ने सुसंगत, तथ्यात्मक एवं प्रभावी ढंग से अभियोजन पक्ष रखा. अभियोजन की मजबूत पैरवी एवं साक्ष्यों की स्पष्ट प्रस्तुति के कारण न्यायालय अभियुक्तों को दंडित करने में सक्षम हुआ.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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