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सुगमा को फिर से पंचायत बनाने की मांग पकड़ रही जोर

Updated at : 27 Nov 2025 5:58 PM (IST)
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सुगमा को फिर से पंचायत बनाने की मांग पकड़ रही जोर

सुगमा को फिर से पंचायत बनाने की मांग पकड़ रही जोर

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बनमा ईटहरी. बिहार विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद अब पंचायत चुनाव की चर्चा तेज होने लगी है. क्योंकि अगलें वर्ष साल 2026 में राज्य में पंचायत निर्वाचन होना तय है. ऐसे में 30 वर्षों के बाद एक बार फिर से सुगमा को पंचायत बनाने की मांग जोड़ पकड़ती जा रही है. ग्रामीणों की एक विशेष बैठक जल्द ही होने वाली है. बैठक में बड़ा फैसला लिया जा सकता है. सुगमा मौजा के अंतर्गत आने वाले सभी गांव को मिलाकर एक पंचायत बनाने की मांग उठ सकती है. लोग निर्णय लेगें कि सुगमा को फिर से पंचायत का दर्जा दिलाया जाये, इसके लिए ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री, पंचायती राज मंत्री, स्थानीय विधायक सहित डीएम व बीडीओ को ज्ञापन देने का निर्णय लिया है. बता दे कि वर्ष 1995 तक सुगमा पंचायत अस्तित्व में था. लेकिन उसके बाद वर्ष 2001 में अचानक सहुरिया को पंचायत बना दिया गया और सुगमा को भी उसी पंचायत में शामिल कर दिया. यह केसै हुआ अबतक स्पष्ट नहीं है. इतने वर्षों के बाद सुगमा की जनसंख्या भी 5100 सौ हो गई है. सुगमा मौजा के अंतर्गत अम्बाडीह, क्षमीनिया, ठढ़िया, बहुअरबा, मनिया गांव की जनसंख्या जोड़ दी जाये तो जनसंख्या 10 हजार से भी के पार हो जाती है. पंचायती राज अधिनियम 2006 के अनुसार किसी भी गांव और उसके आसपास के छोटे-छोटे गांव को मिलाकर यदि जनसंख्या 7000 या उसके पार होती तो उसे पंचायत का दर्जा दिया जा सकता है. ग्रामीण विरेंद्र नारायण सिंह, लड्डू सिंह, कृषनानंद सिंह, शिवानंद सिंह, अमरेंद्र यादव, ब्यास नंदन सिंह, शंकर ठाकुर, रत्नेश रंजन, राजकुमार शर्मा, सुमन सिंह, चुलबुल ठाकुर, मनीष कुमार, सूरज झा समेत अन्य ने यह भी बताया कि अलग पंचायत होने के बाद सुगमा सहित आसपास के छोटे-छोटे गांवों का अपेक्षित विकास हो सकेगा. सुगमा पंचायत का गठन होने के बाद के पहले मुखिया सूर्य नारायण सिंह चुने गये. उसके बाद के हुए चुनावों में पितांबर ठाकुर, प्रमोद नारायण सिंह मुखिया बने थे. वर्तमान में सहुरिया पंचायत कि जनसंख्या एंव भौगोलिक दृष्टिकोण से भी परिसिमन के आधार पर सहुरिया मौजा व सुगमा मौजा को अलग-अलग पंचायत का दर्जा दिया जा सकता है. अलग पंचायत का दर्जा मिलने पर कई गांव में होगा विकास दिन प्रतिदिन जनसंख्या अत्यधिक बढ़ती जा रही है. सरकार द्वारा चलायी जा रही जनकल्याणकारी योजना विभिन्न गांवों तक शत प्रतिशत नहीं पहुंच पा रही, जिस कारण विकास पूर्ण रूपेण नहीं हो पा रहा है. सुगमा मौजा के अंतर्गत आने वाले गांव को मिलाकर अगर एक पंचायत का गठन कर दिया जाये तो शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पानी और बुनियादी ढांचे पर काम किया जा सकता है. इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री जन धन योजना, अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना जैसी वित्तीय योजनाओं के क्रियान्वयन में भी सहायता मिलेगीं. वे कृषि, भूमि सुधार, सामाजिक कल्याण और ग्रामीण रोजगार जैसी अन्य सरकारी योजनाओं को लागू करने में भी भूमिका निभायेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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