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बगैर एप्रोच के दो साल से तैयार है पुल, लोगों को परेशानी

Updated at : 04 Sep 2025 6:14 PM (IST)
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बगैर एप्रोच के दो साल से तैयार है पुल, लोगों को परेशानी

बगैर एप्रोच के दो साल से तैयार है पुल, लोगों को परेशानी

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बड़गांव पंचायत में सुरसर नदी के सोनेसत्तर घाट पर करोड़ों की लागत से बना है पुल सोनवर्षाराज. सूबे के सरकार बड़े-बड़े वादे करती है कि सभी जिले में योजना का पिटारा खोल दिया है. वहीं सोनवर्षा विधानसभा के बड़गांव पंचायत में पुल का निर्माण कर दिया गया है, लेकिन दोनों तरफ एप्रोच नहीं बनने से लोगों को परेशानी हो रही है. सुरसर नदी के सोनेसत्तर घाट पर करोड़ों की लागत से पुल का निर्माण तो हो गया, लेकिन एप्रोच पथ नहीं बनने से परेशानी हो रही है. करोड़ों की लागत से बड़गांव पंचायत के सुरसर नदी पर बना पुल अनोखा है. एप्रोच पथ नहीं बनाने से पुल बनाना बेकार साबित हो रहा है. नदी पर बने पुल से गुजरने के लिए लोग बांस लगा कर पहले पुल पर चढ़ते हैं फिर नदी पार करते हैं. पुल पार करने के लिए लोग बांस की सीढ़ी की जगह खोंचहा बांस की जरूरत होती है. वर्षों से एप्रोच पथ के अभाव में किसान नदी के पार अपने खेतों पर जाने के लिए पुल के निकट एक बांस रखे हुए है. उसी के सहारे नदी आरपार करते हैं बड़गांव पंचायत से मधेपुरा जिला के ग्वालपाड़ा तक सीधे जाने के लिए कई वर्ष पहले बड़गांव नहर से सुरसर नदी स्थित सोनेसत्तर घाट तक 1.5 किलोमीटर की दूरी में करोड़ों की लागत से उच्चस्तरीय पुल बनाया गया. लेकिन यह बेकार साबित हो गया है. इससे क्षेत्र के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. बताते चलें कि संवेदक द्वारा निर्माण स्थल पर निर्माण कार्य से संबंधित किसी भी तरह की सूचना पट्ट नहीं लगाये जाने से इस बात की कोई जानकारी भी नहीं मिलती है कि आखिरकार करोड़ों की लागत से सड़क व पुल किस संवेदक ने बनाया है. इस पुल पर आवागमन चालू होने से नदी के पार स्थित बड़सम एवं बड़गांव पंचायत सहित मधेपुरा के ग्वालपाड़ा प्रखंड के लोगों को काफी सहुलियत होती. इस संबंध में बड़गांव पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि बौआ खां, जिला परिषद प्रतिनिधि मनोज कुमार पासवान, भाजपा नेता मुकेश मानस, भीमशंकर झा सहित दर्जनों लोगों ने कहा कि कई बार इस मामले को लेकर संबंधित विभाग को कहा गया, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा. इससे साफ जाहिर होता है कि सोनवर्षा विधानसभा के जनप्रतिनिधि या अधिकारी के द्वारा दिलचस्पी नहीं लेने के कारण करोड़ों रुपए के लागत से पुल का निर्माण तो किया गया, लेकिन संवेदक के द्वारा एप्रोच पथ का निर्माण नहीं होना सरकार की राशि का दुरुपयोग करना सा साबित हुआ है. इस बाबत प्रखंड विकास पदाधिकारी अमित आनंद ने बताया कि मेरे कार्य काल का मामला नहीं है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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