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जब-जब अत्याचार, अनाचार व अन्याय बढ़ा है, तब-तब प्रभु का अवतार हुआ है : मिथिलेश

Updated at : 19 Jan 2026 6:28 PM (IST)
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जब-जब अत्याचार, अनाचार व अन्याय बढ़ा है, तब-तब प्रभु का अवतार हुआ है : मिथिलेश

अंचल क्षेत्र के मकदमपुर गांव के संजय पंडित के आवास पर आयोजित सात दिवसीय भागवत कथा के चौथे दिन श्रद्धालुओं की काफी भीड़ देखी गयी.

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बनमा ईटहरी. अंचल क्षेत्र के मकदमपुर गांव के संजय पंडित के आवास पर आयोजित सात दिवसीय भागवत कथा के चौथे दिन श्रद्धालुओं की काफी भीड़ देखी गयी. यज्ञ में महिलाओं की तादाद काफी संख्या में दिखी. श्रोता भागवत कथा के प्रसंग व भजन पर भक्ति में लीन होकर ताली बजाते हुए झूम रहे थे. इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया. कथा पंडाल में प्रसिद्ध भजन नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की पर सभी श्रद्धालु काफी देर तक झूमते व थिरकते रहे. श्रीकृष्ण जन्मोत्सव कार्यक्रम को लेकर कथा पंडाल को गुब्बारे व फूल-माला से आकर्षक ढंग से सजाया गया था. प्रख्यात कथावाचक मिथिलेश दास महाराज ने प्रवचन के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन कर धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की महत्ता पर व्याख्यान किया.

कथावाचक ने कहा कि जब-जब अत्याचार, अनाचार व अन्याय बढ़ा है, तब-तब प्रभु का अवतार होता है. अत्याचार को समाप्त कर धर्म की स्थापना को लेकर ही प्रभु का अलग-अलग रूपों में अवतार होता है. जब कंस ने सभी मर्यादाएं तोड़ दी तो प्रभु श्रीकृष्ण का जन्म हुआ. कथा के दौरान वासुदेव, यशोदा व श्रीकृष्ण के बाल-रूप की झांकी देख सभी श्रद्धालु जयकारा लगाते हुए नृत्य करने लगे. प्रवचन के क्रम में कथावाचक ने कहा कि जीवन में अच्छे रास्ते पर जाना है, तो संकल्प लेना जरूरी है. हर बच्चे को अपने माता-पिता व गुरू की बातों को मानना चाहिए. जिन बच्चों के उपर माता-पिता का आशीर्वाद है, उन्हें संसार में सब कुछ प्राप्त है. हर एक माता-पिता को चाहिए कि अपने साथ बच्चों को भागवत कथा, सत्संग, कीर्तन में जरूर साथ लायें. धर्म की कथा सुनने से बच्चों में अच्छी संस्कार आती है. उन्होंने कहा कि भागवत सांसारिक व दैविक रहस्य को बताता है. जो इस रहस्य को समझेगा उसे तन-मन की शाति व मोक्ष अवश्य मिलेगी.

ईश्वर की इच्छा मानकर जीना सीख लेने पर ही मिल सकती है मन की शांति

आज लोग अधिक से अधिक कमाई कर भौतिक सुख के साथ मन की शाति चाहते हैं, लेकिन मन की शाति लाखों, करोड़ों खर्च कर भी नहीं मिल सकती है. मन की शांति तभी मिलेगी, जब लोग भौतिक सुख के पीछे भागना छोड़कर संतोष करना सीख लेंगे. ईश्वर से जितना मिला, उसी को ईश्वर की इच्छा मानकर जीना सीख लेने पर ही मन की शांति मिल सकती है. उन्होंने भगवान कृष्ण के भागवत उपदेश की चर्चा करते हुए उनकी लीलाओं व विवाह प्रसंग की व्याख्या की. मौके पर जयजमान देव नारायण दास, मुखिया प्रतिनिधि पवन कुमार यादव, शंभु पंडित, सुरेंद्र पंडित, रामपुकार पंडित, करण पंडित, सुभाष पंडित, प्रमोद पंडित, अरुण यादव, विश्वनाथ यादव, पंजक भगत, उपेंद्र पंडित समेत अन्य मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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