सहरसा में डिग्री कॉलेज की मांग पर भड़का आंदोलन, मशाल जुलूस के बाद आज से धरना

Published by : Pratyush Prashant Updated At : 08 Jun 2026 9:26 AM

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मशाल जुलूस निकालते युवा व स्थानीय लोग

Saharsa News: सहरसा के नवहट्टा में डिग्री कॉलेज की मांग अब जनआंदोलन का रूप लेती दिख रही है. रविवार शाम निकाले गए मशाल जुलूस में छात्र, युवा, अभिभावक और समाजसेवी बड़ी संख्या में शामिल हुए. आंदोलनकारियों ने साफ कहा है कि यदि कॉलेज का संचालन प्रखंड मुख्यालय में नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा.

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नवहट्टा (सहरसा) से राजेश डेनजील

Saharsa News: नवहट्टा प्रखंड मुख्यालय में डिग्री कॉलेज संचालित करने की मांग को लेकर रविवार को आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया. दुर्गास्थान परिसर में आयोजित बैठक के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बाजार क्षेत्र में मशाल जुलूस निकालकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की. आंदोलनकारियों ने सोमवार से प्रशासनिक अनुमति के साथ धरना-प्रदर्शन शुरू करने की घोषणा की है.

स्थानीय समाजसेवी प्रमोद कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में छात्र-छात्राओं, युवाओं, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया. सभी ने एक स्वर में कहा कि नवहट्टा मुख्यालय डिग्री कॉलेज संचालन के लिए आवश्यक सुविधाओं और मानकों को पूरा करता है, इसलिए कॉलेज का संचालन यहीं से होना चाहिए.

काशिमपुर में कॉलेज चिन्हित होने से बढ़ा असंतोष

राज्य सरकार की हर प्रखंड डिग्री कॉलेज योजना के तहत नवहट्टा को भी कॉलेज की सौगात मिली है. हालांकि प्रखंड मुख्यालय से लगभग सात किलोमीटर दूर काशिमपुर स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय को कॉलेज संचालन के लिए चिन्हित किए जाने के बाद क्षेत्र में विरोध शुरू हो गया.

छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि दूरस्थ स्थान पर कॉलेज संचालित होने से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ेगा. यही वजह है कि स्थानीय लोग लगातार मुख्यालय में ही कॉलेज स्थापित करने की मांग कर रहे हैं.

संघर्ष समिति का गठन, आंदोलन को मिला संगठनात्मक रूप

बैठक के दौरान डिग्री कॉलेज बचाओ संघर्ष समिति का गठन किया गया. समिति ने नवहट्टा मुख्यालय में स्थायी और अस्थायी दोनों स्तर पर डिग्री कॉलेज संचालन की मांग उठाई. आंदोलनकारियों का कहना है कि यह किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा और युवाओं के भविष्य से जुड़ा जनआंदोलन है.

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की, लेकिन स्थानीय जनता शिक्षा के मुद्दे पर एकजुट है और आंदोलन को गैर-राजनीतिक स्वरूप में आगे बढ़ाना चाहती है.

मांग नहीं मानी गई तो और तेज होगा आंदोलन

मशाल जुलूस में शामिल लोगों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा. आंदोलनकारी चरणबद्ध तरीके से लोकतांत्रिक तरीके से अपनी लड़ाई जारी रखने की बात कह रहे हैं.

रविवार को शुरू हुए इस अभियान में बड़ी संख्या में छात्र, युवा, अभिभावक, समाजसेवी और बुजुर्ग शामिल हुए. अब सबकी नजर सोमवार से शुरू होने वाले धरना-प्रदर्शन और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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