सहरसा में जैविक खेती से आत्मनिर्भर बन रहीं जीविका दीदियां, सोनवर्षा में खुलेगा बायो-रिसोर्स सेंटर

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सहरसा में जैविक खेती से आत्मनिर्भर बन रहीं जीविका दीदियां, सोनवर्षा में खुलेगा बायो-रिसोर्स सेंटर

कृषि गतिविधियों में जुटी जीविका दीदियां

Saharsa news: जिला परियोजना प्रबंधक श्लोक कुमार ने बताया कि प्रखंड के पांच क्लस्टरों की 912 जीविका दीदियां करीब 385.87 हेक्टेयर भूमि में जैविक खेती कर रही हैं. इन क्षेत्रों में गेहूं, मखाना, सब्जी, गृह पोषण वाटिका, मूंग और मक्का की खेती की जा रही है. विशेष बात यह है कि खेती में उपयोग होने वाले जैविक खाद और जैविक घोल का निर्माण भी दीदियां स्वयं कर रही हैं, जिससे खेती की लागत घट रही है और रसायन मुक्त उत्पादन को बढ़ावा मिल रहा है.

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सहरसा से विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट:

Saharsa news: ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए जीविका की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. इसी कड़ी में सोनवर्षा प्रखंड की जीविका दीदियां जैविक खेती के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण की नई मिसाल पेश कर रही हैं.

जिला परियोजना प्रबंधक श्लोक कुमार ने बताया कि प्रखंड के पांच क्लस्टरों की 912 जीविका दीदियां करीब 385.87 हेक्टेयर भूमि में जैविक खेती कर रही हैं. इन क्षेत्रों में गेहूं, मखाना, सब्जी, गृह पोषण वाटिका, मूंग और मक्का की खेती की जा रही है. विशेष बात यह है कि खेती में उपयोग होने वाले जैविक खाद और जैविक घोल का निर्माण भी दीदियां स्वयं कर रही हैं, जिससे खेती की लागत घट रही है और रसायन मुक्त उत्पादन को बढ़ावा मिल रहा है.

पीजीएस के तहत किसानों का पंजीकरण

जीविका के माध्यम से किसानों का पीजीएस (पार्टिसिपेटरी गारंटी सिस्टम) के तहत पंजीकरण कराया गया है. अगले वर्ष ये किसान प्रमाणित ऑर्गेनिक किसान बन जाएंगे. इससे उनके उत्पादों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी.

सोनवर्षा में खुलेगा बायो-रिसोर्स सेंटर

प्राकृतिक खेती को और मजबूत बनाने के लिए सोनवर्षा प्रखंड में जल्द ही बायो-रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) की स्थापना की जाएगी. यह केंद्र स्थानीय सीएलएफ के स्वामित्व में संचालित होगा और समुदाय आधारित उद्यमियों तथा कृषि उद्यमियों द्वारा इसका संचालन किया जाएगा.

बीआरसी में जैविक एवं प्राकृतिक खेती के लिए आवश्यक विभिन्न जैविक इनपुट का निर्माण, भंडारण, पैकेजिंग और वितरण किया जाएगा. यहां मांग के अनुसार जैविक घोल तैयार किए जाएंगे तथा उनका सुरक्षित भंडारण भी किया जाएगा.

किसानों को मिलेगा स्थानीय स्तर पर लाभ

बायो-रिसोर्स सेंटर के माध्यम से किसानों को स्थानीय स्तर पर जैविक इनपुट उपलब्ध होंगे. इससे रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होगी, मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार आएगा और किसानों की आय बढ़ेगी. साथ ही ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी सृजित होंगे.

ऑर्गेनिक आउटलेट से मिलेगा बाजार

जिले में ऑर्गेनिक रिटेल आउटलेट स्थापित करने की भी तैयारी की जा रही है. इन केंद्रों पर जैविक एवं रसायन मुक्त कृषि उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराए जाएंगे. यहां ताजी सब्जियां, दालें, मसाले, जैविक गुड़, अचार सहित अन्य उत्पाद बिक्री के लिए रखे जाएंगे.

इस पहल के तहत करीब 200 से 240 किसानों को बाजार से जोड़ने और 500 से अधिक परिवारों तक रसायन मुक्त उत्पाद पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. जीविका की यह पहल महिला सशक्तिकरण, स्थानीय रोजगार सृजन और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

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Shruti Kumari

लेखक के बारे में

By Shruti Kumari

श्रुति कुमारी एक पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया है। वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें विभिन्न प्लाटफॉर्म्स पर डिजिटल पत्रकारिता और कंटेंट राइटिंग का लगभग दो वर्षों का अनुभव है। सामाजिक मुद्दों, महिला सशक्तिकरण, राजनीति, शिक्षा और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखना उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है। इसके अलावा वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्क्रिप्ट राइटिंग करती हैं तथा हिंदी कविता और अंगिका भाषा में लेखन का भी शौक रखती हैं। प्रकृति से उनका विशेष लगाव है और वे मानती हैं कि संवेदनशील, तथ्यपरक और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है।

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