स्वास्थ्य केवल बीमारी का अभाव नहीं, स्वयं में स्थित होना है: सहरसा में डॉ अरुण कुमार जायसवाल

फोटो - सहरसा - कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालु | Prabhat Khabar Network
सहरसा में आयोजित व्यक्तित्व परिष्कार सत्र में स्वास्थ्य प्रबंधन पर गहन चर्चा हुई. डॉ. अरुण कुमार जायसवाल ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य का वास्तविक अर्थ केवल रोगों का अभाव नहीं, बल्कि स्वयं में स्थित होना है. जानें कैसे सात्विक चिंतन, अनुशासित दिनचर्या और सकारात्मक विचार एक स्वस्थ व सफल जीवन का आधार बनते हैं.
Saharsa News: सहरसा के गायत्री शक्तिपीठ में रविवार को आयोजित व्यक्तित्व परिष्कार सत्र में स्वास्थ्य प्रबंधन, मानसिक संतुलन और व्यक्तित्व निर्माण पर गहन चर्चा हुई. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ट्रस्टी डॉ अरुण कुमार जायसवाल ने कहा कि स्वास्थ्य का वास्तविक अर्थ केवल रोगों का अभाव नहीं, बल्कि स्वयं में स्थित होना है. उन्होंने स्वच्छ जीवन, सात्विक चिंतन, अनुशासित दिनचर्या और सकारात्मक विचारों को स्वस्थ एवं सफल जीवन का आधार बताया.
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गायत्री परिजन, युवा मंडल, युक्ति मंडल और कार्यकारिणी समिति के सदस्य शामिल हुए. सत्र के दौरान आध्यात्मिक दृष्टिकोण से स्वास्थ्य, चरित्र निर्माण और आत्मविकास के विभिन्न आयामों पर विस्तार से विचार रखे गए.
स्वास्थ्य का वास्तविक अर्थ क्या है
डॉ अरुण कुमार जायसवाल ने कहा कि मनुष्य स्वाभाविक रूप से स्वस्थ होता है, जबकि अधिकांश बीमारियां शरीर और मन में बढ़ते विषैले तत्वों, दूषित विचारों और अव्यवस्थित जीवनशैली का परिणाम होती हैं.
उन्होंने कहा कि डॉक्टर बीमारी दूर कर सकते हैं, लेकिन वास्तविक स्वास्थ्य व्यक्ति की प्राकृतिक अवस्था है, जिसे सही जीवनशैली, संतुलित सोच और आत्मिक अनुशासन के माध्यम से बनाए रखा जा सकता है.
तनाव और अव्यवस्थित दिनचर्या बना रही है कमजोर
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अनियमित दिनचर्या, मानसिक तनाव, अत्यधिक अपेक्षाएं और गलत आदतें व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आत्मिक रूप से कमजोर बना रही हैं.
उनके अनुसार, व्यक्ति का चिंतन, चरित्र और व्यवहार जितना अधिक प्राकृतिक और संतुलित होगा, वह उतना ही स्वस्थ और प्रसन्न रहेगा.
महर्षि पतंजलि के सिद्धांत का किया उल्लेख
डॉ जायसवाल ने महर्षि पतंजलि के ‘चित्तवृत्ति निरोध’ सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि चित्त की शुद्धि से ही संपूर्ण स्वास्थ्य प्राप्त होता है. उन्होंने समझाया कि भावना से विचार, विचार से कर्म, कर्म से आदत, आदत से स्वभाव, स्वभाव से चरित्र और चरित्र से भविष्य का निर्माण होता है.
इसीलिए प्रार्थना, प्राणायाम और ध्यान को दैनिक जीवन का अनिवार्य हिस्सा बनाना चाहिए.
सुबह का समय आत्मविकास के लिए सबसे उपयुक्त
उन्होंने कहा कि प्राणबल और इच्छाशक्ति का विकास व्यक्ति के स्वभाव और जीवन को सकारात्मक दिशा देता है. सुबह का समय आत्मविकास के लिए सबसे उपयुक्त होता है, इसलिए सभी को नियमित दिनचर्या अपनानी चाहिए.
उन्होंने उपस्थित लोगों से कंफर्ट जोन से बाहर निकलकर अनुशासित जीवन जीने और आत्मविकास के लिए निरंतर प्रयास करने का संदेश दिया.
कार्यकारिणी बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में ट्रस्टी एवं कार्यकारिणी समिति की बैठक आयोजित हुई. बैठक में निर्णय लिया गया कि 16 अगस्त को कार्यकारिणी समिति का पुनर्गठन किया जाएगा.
इसके साथ ही 13 सितंबर को वार्षिक बैठक और 20 सितंबर को वंदनीय माताजी का जन्मदिवस मनाने का भी निर्णय लिया गया.
Saharsa News: जीवनशैली सुधार और स्वच्छता पर विशेष जोर
बैठक में सभी कार्यकर्ताओं से गुरुदेव के विचारों के अनुरूप खान-पान, रहन-सहन और जीवनशैली में सुधार लाने का आह्वान किया गया. साथ ही गायत्री शक्तिपीठ परिसर और शिवालय की साफ-सफाई में सक्रिय सहयोग देने की अपील भी की गई.
कार्यक्रम में युवा मंडल, युक्ति मंडल, कार्यकारिणी समिति के सदस्य और बड़ी संख्या में गायत्री परिजन उपस्थित रहे.
Also Read: TRE-4 के लिए BPSC को भेजा गया प्रस्ताव हुआ वापस, क्या अब होगा आंदोलन? शोभा अहोतकर से लगाई उम्मीद
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










