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राजकीय शिक्षक सम्मान पाना एक नयी जिम्मेवारी का कराता है एहसास: कुमार विक्रमादित्य

Updated at : 07 Sep 2025 7:19 PM (IST)
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राजकीय शिक्षक सम्मान पाना एक नयी जिम्मेवारी का कराता है एहसास: कुमार विक्रमादित्य

राजकीय शिक्षक सम्मान पाना एक नयी जिम्मेवारी का कराता है एहसास: कुमार विक्रमादित्य

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उच्च माध्यमिक विद्यालय नरियार के प्रधानाध्यापक को शिक्षक दिवस पर किया गया था सम्मानित सहरसा . उच्च माध्यमिक विद्यालय नरियार के प्रधानाध्यापक कुमार विक्रमादित्य को श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल पटना में शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षा मंत्री सुनील कुमार के हाथों राजकीय शिक्षक सम्मान 2024 से सम्मानित किया गया. मौके पर अपर मुख्य सचिव बी राजेन्दर, प्राथमिक शिक्षा निदेशक साहिला, उप सचिव उर्मिला व अन्य वरीय पदाधिकारी मौजूद थे. पिता आदित्यनाथ झा एवं माता शीला देवी के पुत्र व गढ़िया निवासी कुमार विक्रमादित्य ने बनारस हिंदु विश्वविद्यालय वाराणसी एवं जामिया मिल्लिया इस्लामिया न्यू दिल्ली से शिक्षा के गुरों को सीखा. उच्च माध्यमिक विद्यालय लगमा सहरसा से इन्होंने अपनी शिक्षण कार्य की शुरुआत की. जिसके बाद श्री दुर्गा उच्च माध्यमिक विद्यालय सिहौल में अपनी शिक्षा देने के बाद बिहार लोक सेवा आयोग के द्वारा आयोजित प्रधानाध्यापक की परीक्षा 2022 में जिले के एक मात्र प्रधानाध्यापक के रूप में सफलता प्राप्त कर उच्च माध्यमिक विद्यालय नरियार में योगदान दिया. इन विद्यालयों में इन्होंने ना केवल छात्र-छात्राओं व ग्रामीणों के दिल में अपना स्थान बनाया. बल्कि यहां के छात्र-छात्राओं को विज्ञान व कला के क्षेत्र में राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर पहुंचाने का काम किया. राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस, वैज्ञानिक प्रयोग, विज्ञान मेला, विज्ञान ड्रामा, विज्ञान क्विज, विज्ञान प्रदर्शनी सहित कई गतिविधियों में उनकी देखरेख में छात्र-छात्राओं ने राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में अपनी पहचान बनायी है. गांव के ऐसे बच्चों को जिसने आजतक ट्रेन का सफर तक नहीं किया, उसे राज्य स्तरीय व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में स्थान दिलाना उनकी सफलता को बयां करता है. विज्ञान व राष्ट्रीय पाठ्यचर्या से संबंधित शिक्षक प्रशिक्षण में वे कई बार राज्यस्तरीय व जिला स्तरीय प्रशिक्षक रहे. इसके अलावा श्री कुमार चाइल्ड एब्यूज व चाइल्ड राइट्स से संबंधित कई सारे वर्कशॉप का एससीईआरटी, यूनिसेफ व बिहार शिक्षा परियोजना का मास्टर प्रशिक्षक रहे. इन्होने कैरियर काउंसेलिंग का भी काम किया. श्री कुमार ने अपने विद्यालय में एक सामुदायिक पुस्तकालय खोल रखा है. जिसमें उन्होंने कई पुस्तकें दान में दे रखी है. जिससे बच्चों में लिखने व पढने की प्रवृति बढी है. आधुनिक समय की मांग है कि हर एक क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रयोग करके मानवोनुकूल वातावरण तैयार किया जाये. शिक्षा में इस क्षेत्र का प्रयोग बहुत ही आवश्यक है. यह जाना माना स्वयं सिद्ध बात है कि ऑडियो वीडियो के माध्यम से दिया गया ज्ञान बच्चों के विकास में सहायक है. आज मोबाइल सभी व्यक्तियों के हाथ में है एवं टेलीविजन की पहुंच घर-घर तक है. विद्यालय का एक फेसबुक पेज खोल रखा है. जहां शिक्षा से संबंधित तथ्यों को वे साझा करते रहते हैं. साथ ही नवाचार से विद्यालय में नामांकन का स्तर बढ़ा है. श्री कुमार शिक्षण प्रशिक्षण के अलावे लेखन भी करते हैं. हिन्दी, मैथिली व अंगरेजी में ये लगातार लिखते रहते हैं. मास्टरबा, हर हर शूलीन, मेघलेखा, अन्हारक दीप, हमहूं छुअब चान, धुंध, रिदम एंड रिदम जैसे कई पुस्तकों की रचना इन्होंने की है. उनको यह सम्मान मिलने से शिक्षकों व जिले के लोगों में खुशी व्याप्त है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Dipankar Shriwastaw

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