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13 को होगा ओठगन, 14 को जितिया का व्रत

Updated at : 10 Sep 2025 7:02 PM (IST)
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13 को होगा ओठगन, 14 को जितिया का व्रत

ब्रज किशोर ज्योतिष संस्थान संस्थापक के ज्योतिषाचार्य पंडित तरुण झा ने बताया कि हर वर्ष आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जितिया का व्रत किया जाता है.

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15 को सुबह 06.36 के बाद होगा पारण : पंडित तरुण झा

सहरसा. ब्रज किशोर ज्योतिष संस्थान संस्थापक के ज्योतिषाचार्य पंडित तरुण झा ने बताया कि हर वर्ष आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जितिया का व्रत किया जाता है. जितिया व्रत को भक्ति एवं उपासना के सबसे कठिन व्रतों में एक माना जाता है. इस दिन माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र एवं स्वस्थ जीवन के लिए व्रत रखती हैं. माताएं इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं. उन्होंने कहा कि मिथिला विश्वविद्यालय पंचांग के अनुसार 13 सितंबर को रात्री के अंत तक या संभव हो तो सुबह चार बजे तक ओठगन कर सकती हैं, जबकि जितिया का उपवास 14 सितंबर रविवार को होगा. वहीं 15 सितंबर सोमवार को सुबह 06.36 के बाद पारण होगा. उन्होंने कहा कि जितिया के पीछे की कहानी यह है कि महाभारत युद्ध में पिता की मृत्यु के बाद अश्वत्थामा बहुत क्रोधित थे. पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए पांडवों के शिविर गये एवं उसने पांच लोगों की हत्या कर दी. उसे लगा कि उसने पांडवों को मार दिया, लेकिन पांडव जिंदा थे. जब पांडव उसके सामने आये तो उसे पता लगा कि वह द्रौपदी के पांच पुत्रों को मार आया है. यह सब देखकर अर्जुन ने क्रोध में अश्वत्थामा को बंदी बनाकर दिव्य मणि छीन लिया. अश्वत्थामा ने इस बात का बदला लेने के लिए अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रही संतान को मारने की योजना बनायी. उसने गर्भ में पल रहे बच्चे को मारने के लिए ब्रह्मास्त्र चलाया. जिससे उत्तरा का गर्भ नष्ट हो गया. लेकिन उस बच्चे का जन्म लेना बहुत जरूरी था. इसलिए भगवान कृष्ण ने उत्तरा की अजन्मी संतान को गर्भ में ही फिर से जीवित कर दिया. गर्भ में मरकर जीवित होने की वजह से इस तरह उत्तरा के पुत्र का नाम जीवितपुत्रिका पड़ गया और तब से ही संतान की लंबी आयु के लिए जितिया व्रत किया जाने लगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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