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जिले में जीविका गढ़ रही इतिहास

Updated at : 30 Dec 2025 5:55 PM (IST)
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जिले में जीविका गढ़ रही इतिहास

जिले में जीविका गढ़ रही इतिहास

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तीन लाख 80 हजार 388 परिवार जुड़कर अपने जीवन में ला रही सकारात्मक बदलाव सहरसा . बिहार में ग्रामीण गरीबी उन्मूलन व ग्रामीण परिवारों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से जीविका की स्थापना की गयी. इस परियोजना का संचालन बिहार ग्रामीण आजीविका संवर्धन सोसाइटी द्वारा किया जाता है. जो ग्रामीण विकास विभाग, बिहार सरकार के तहत एक स्वायत्त संस्था है. समय के साथ इसका विस्तार पूरे राज्य के 534 प्रखंडों तक हो चुका है. जिले में जीविका की शुरुआत 23 दिसंबर 2010 को प्रथम चरण में तीन प्रखंडों सौरबाज़ार, सोनवर्षा व पतरघट से हुई. जबकि द्वितीय चरण में एक अप्रैल 2013 से शेष प्रखंडों को जोड़ा गया. जो आज सशक्तिकरण व सतत विकास की दिशा में अग्रसर है. जिले में अब तक 31 हजार 113 स्वयं सहायता समूह का गठन किया जा चुका है. जिनसे तीन लाख 80 हजार 388 परिवार जुड़कर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं. इन समूहों को मजबूत करने के लिए 1633 ग्राम संगठन व 29 संकुल संघ स्थापित किये गये हैं. इन संगठनों के माध्यम से दीदियों का सतत् क्षमतावर्द्धन किया जा रहा है. प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर प्रशिक्षण व शिक्षण केंद्र व दो समुदाय प्रबंधित प्रशिक्षण केंद्र संचालित हो रहे हैं. 31 हजार 113 समूहों में से 22 हजार 547 समूहों का बैंक खाता खोला गया है. समूहों ने अब तक 89.75 करोड़ रुपये की बचत की है. 22 हजार 547 समूहों को 63.33 करोड़ रुपये परिक्रामी निधि के रूप में प्राप्त हुआ है. जिले में जीविका दीदियों द्वारा 157 ग्राहक सेवा केंद्र संचालित किये जा रहे हैं. जिनसे रोजगार व आय का नया अवसर मिला है. अब तक 57.85 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन हुआ है व दीदियों की औसत मासिक आय सात से 10 हजार रुपये तक पहुंच गयी है. कृषि, गैर कृषि एवं पशुधन आधारित अनेक कार्य जीविका द्वारा संचालित किये जा रहे हैं. जीविका दीदी की रसोई का संचालन सदर अस्पताल, अनुमंडल अस्पताल सिमरी बख्तियारपुर एवं राजकीय आंबेडकर आवासीय विद्यालय अमरपुर कहरा के साथ पुलिस लाइन में दीदी की रसोई का सफल संचालन किया जा रहा है. पिछड़ा वर्ग कन्या आवासीय प्लस टू उच्च विद्यालय मेनहा सत्तरकटैया में बहुत जल्द दीदी की रसोई की शुरुआत होनी है. अस्पतालों, प्रखंड सह अंचल कार्यालयों व अन्य सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता बनाए रखने की जिम्मेदारी अब जीविका दीदियों को सौंपी गयी है. इस पहल से एक ओर सरकारी कार्यालयों में साफ-सफाई की व्यवस्था सुदृढ हुई है. वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं को रोजगार का नया अवसर भी मिला है. वर्तमान में स्थानीय स्तर पर 100 से अधिक जीविका दीदियां इस कार्य से जुड़कर ना केवल नियमित आय अर्जित कर रही है. बल्कि आत्मनिर्भर भी बन रही है. जिले में आंगनवाड़ी केंद्रों के तीन से छह वर्ष के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण पोशाक अब जीविका दीदियां तैयार करेंगी. इसके लिए दीदियों को शर्ट, पैंट एवं स्कर्ट की सिलाई का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है. खास बात यह है कि प्रशिक्षण के बाद तैयार पोशाक बच्चों को निशुल्क वितरित किये जायेंगे. इस पहल से जिले के एक हजार जीविका दीदियों को सिलाई के माध्यम से रोजगार का अवसर प्राप्त होगा. जिले के एक लाख 12 हजार 670 परिवार कृषि गतिविधियों से जुड़े हैं. जिले में 16 कृषि यंत्र बैंक स्थापित किये गये हैं. जहां से कम दर पर किसानों को आधुनिक यंत्र उपलब्ध हो रहे हैं. जैविक खेती के तहत 926 परिवारों ने 385.87 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं, मक्का एवं सब्जी का उत्पादन किया है. कौशिकी महिला दुग्ध उत्पादक कंपनी लिमिटेड के अलावा दो नयी एफपीओ आधारित कंपनियां गठित की गयी है. जिले में 51 हजार 934 दीदियों की वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक हो चुकी है. जिले के तीन लाख 80 हजार 388 जीविका दीदियों में से तीन लाख 72 हजार 438 जीविका दीदियों को मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का लाभ अब तक दिया जा चुका है.

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