विवेकानंद के महान आदर्शों को जीवन में उतारने की दी प्रेरणा

Published by :Dipankar Shriwastaw
Published at :19 Jan 2026 7:27 PM (IST)
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विवेकानंद के महान आदर्शों को जीवन में उतारने की दी प्रेरणा

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान व युवा परिवार सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को युवा दिवस व स्वामी विवेकानंद की जयंती पर नशा उन्मूलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

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विवेकानंद जयंती पर नशा उन्मूलन कार्यक्रम आयोजित

सत्तरकटैया. दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान व युवा परिवार सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को युवा दिवस व स्वामी विवेकानंद की जयंती पर नशा उन्मूलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जिसमें आशुतोष महाराज के शिष्य स्वामी यादवेंद्रानंंद ने विवेकानंद के महान आदर्शों को जीवन में उतारने की प्रेरणा दी. उन्होंंने बताया की विद्यार्थी का नैतिक विकास उसके चरित्र निर्माण और समाज के प्रति उत्तरदायित्व पूर्ण व्यवहार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. यह प्रक्रिया उसके परिवार, शिक्षकों,समाज और व्यक्तिगत अनुभवों के माध्यम से होती है. नैतिक विकास में सहानुभूति, ईमानदारी, अनुशासन व सामाजिक सेवा जैसी मूल्यवान आदतों का समावेश होता है. युवा देश का भविष्य हैं, लेकिन नशे के दलदल में फंसकर देश के निर्माण में सहयोगी नहीं हो सकता है. नशा समाज के लिए अभिशाप बन गया है, जो स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत निर्माण करने में अवरोधक साबित हो रहा है.

इस कार्यक्रम में डॉ आरपी कोचिंग सहित कई स्कूलों के बच्चों ने भागीदारी दी. सत्संग में साध्वी सुनीता भारती ने भक्ति के महत्व बताते हुए कहा कि मानव जीवन में भक्ति के माध्यम से मुक्ति प्राप्त की जा सकती है. जीवन का उद्देश्य ईश्वर की प्राप्ति है और भक्ति के बिना यह संभव नहीं है. मानव जीवन का सर्वोच्च आभूषण है. यह वह साधन है जिसके द्वारा मनुष्य सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर परमात्मा से जुड़ता है. भक्ति का अर्थ केवल पूजा-पाठ व्रत उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस गहन प्रेम, श्रद्धा और समर्पण की भावना है. भक्त का जीवन प्रेम, करुणा और त्याग से ओतप्रोत हो जाता है, जिसमें स्नान करने से मनुष्य पवित्र होकर मुक्त हो जाता है. भक्ति ही वह सेतु है जो जीव और परमात्मा को जोड़ती है. ज्ञान बिना भक्ति सूखा रहता है और कर्म बिना भक्ति के केवल अहंकार को बढ़ाता है. मानव जीवन का सच्चा उद्देश्य भक्ति के मार्ग पर चलकर ईश्वर से एकाकार होना है. भक्ति ही जीवन की दिशा, शांति का आधार और मोक्ष का द्वार है. जो मनुष्य भक्ति में लीन रहता है, वही वास्तव में जीवन के अर्थ को समझ पाता है. इस मौके पर स्वामी सुकर्मानंद सुश्री महामाया भारती, सुनीता भारती, संजय सिंह, विशेश्वर यादव, कमलेश,चंदन सिंह, रौशन चौपाल, सुमित, शिवम मौजूद थे.

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