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पीठ में नही बल्कि सीने में गोली खाकर दी थी अपनी शहादत

Updated at : 29 Aug 2024 5:44 PM (IST)
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पीठ में नही बल्कि सीने में गोली खाकर दी थी अपनी शहादत

पीठ में नही बल्कि सीने में गोली खाकर दी थी अपनी शहादत

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शहीद दिवस पर प्राणों की आहुति देने वाले जिले के छह वीर सपूत को दी गयी श्रद्धांजलि सहरसा . 29 अगस्त 1942 को सहरसा रेलवे स्टेशन के समीप अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ भारत छोड़ों आंदोलन में अपने सीने पर गोली खाकर भारत माता की आजादी के लिए प्राणों की आहुति देने वाले जिले के छह वीर सपूत के बलिदान पर गुरुवार को शहीद चौक पर श्रद्धांजलि अर्पित की गयी. स्मारक स्थल पर आयोजित पुष्पांजलि कार्यक्रम में सम्मिलित होकर अपने पुरखों की शहादत को महापौर बैन प्रिया ने नमन कर श्रद्धासुमन अर्पित किया. पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष सह वरिष्ठ भाजपा नेता शालिग्राम देव के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में महापौर बैन प्रिया ने कहा कि देश को आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अमर शहीदों व स्वतंत्रता सेनानियों को पूर्व विधायक स्व संजीव झा श्रद्धापूर्वक याद कर उनके बलिदानों को अमर रखने के लिए प्रतिवर्ष शहीद चौक पर कार्यक्रम आयोजित करते थे. उन्हीं की प्रेरणा से वह भी प्रतिवर्ष आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर श्रद्धा सुमन अर्पित करती हैं. आजादी के आंदोलन में कोसी क्षेत्र के कई रणबांकुरों ने भी बहुमूल्य योगदान दिया. वर्ष 1942 में अगस्त क्रांति के दौरान अंग्रेजी फौज से मुकाबला करते जिले के छह नौजवानों ने 29 अगस्त को शहादत देकर आजादी की लड़ाई में कोसी क्षेत्र का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित करा दिया. अगस्त क्रांति के दौरान आजादी के मतवालों ने यहां के सत्ता की बागडोर अंग्रेजों से छीन सरकारी खजाने पर कब्जा जमा लिया था. बौखलाये अंग्रेजों ने अपनी सत्ता की पुर्नस्थापना के लिए आग्नेयास्त्रों से लैस फौजी दस्ते को सहरसा भेजा. लेकिन डरने की बजाय उस समय यहां के युवा क्रांतिकारियों की भीड़ इस अंग्रेजी सैन्य टुकड़ी का मुकाबला करने रेलवे स्टेशन के समीप उमड़ पड़ी. 29 अगस्त 1942 को आजादी के मतवालों ने अपने पारंपरिक हथियार लाठी, भाला, ढेलौरी से ही अंग्रेजी सेना का डट कर मुकाबला किया. इस क्रम में अंग्रेजों की गोली का शिकार बने बनगांव के हरिकांत झा, पुलकित कामत व बलहा गढ़िया के कालेश्वर मंडल मौके पर ही शहीद हो गये. वही गोली लगने से घायल चैनपुर के भोला ठाकुर व नरियार के केदारनाथ तिवारी की क्रमश: तीन दिन व एक माह बाद मौत हुई. इस दौरान गिरफ्तार किये गये एकाढ़ के धीरो राय को गंभीर यातना देकर जेल में ही मार डाला गया. वीरतापूर्वक अंग्रेजी सेना का सामना करते आजादी के इन मतवालों ने पीठ में नही बल्कि सीने में गोली खाकर अपनी शहादत दी. कार्यक्रम में कई वक्ताओं ने संबोधित करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित किया. कार्यक्रम में शहीद के परिजन मदन तिवारी एवं दिलीप राय मौजूद थे. कार्यक्रम में शशिशेखर सम्राट, संजय गुप्ता, गौतम कुमार, माधव झा, कन्हैया, बजरंग गुप्ता, जय प्रकाश दास, सुदीप सुमन, मनोज कुमार सिन्हा, प्रो मिथिलेश झा, शशिनाथ सिंह, विनय ठाकुर, राजा मिश्रा, अकबर हुसैन, ,कुंदन राय, बालेश्वर भगत, पारस झा, सुमन समाज, प्रभाकरण देव, नीतीन ठाकुर, अधिवक्ता मणि राज, सुजीत सन्याल, प्रशांत सिंह, बुल्लू झा, अविजित सिंह, पंकज ठाकुर, मनीष चौपाल, प्रिंस सिंह, शिवम वर्मा, कृष्णकांत गुप्ता, अमन, राहुल, पिंटू सिंह, मोनु महाकाल, दीपक दिनकर, गोविंद पासवान सहित अन्य मौजूद थे.

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