पराली जलाने से बढ़ रहा प्रदूषण, उर्वरा शक्ति पर असर

पराली जलाने से उठने वाला धुआं वायुमंडल को प्रदूषित कर रहा है,
रसलपुर बहियार में धड़ल्ले से जल रहा पराली बनमा ईटहरी गुरुवार को रसलपुर पंचायत के सड़क किनारे बहियार क्षेत्र में कई किसानों द्वारा खेतों में पराली जलाये जाने की घटनाएं सामने आ रही है. पराली जलाने से न केवल मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, बल्कि खेतों में मौजूद केंचुए और लाभदायक जीवाणु भी नष्ट हो रहे हैं. इससे भूमि की उत्पादकता में गिरावट का खतरा बढ़ता जा रहा है. पराली जलाने से उठने वाला धुआं वायुमंडल को प्रदूषित कर रहा है, जिससे स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार अगर समय रहते ऐसे कार्यों पर रोक नहीं लगी तो आने वाले वर्षों में जमीन के बंजर होने का खतरा बढ़ सकता है. जानकारी के अभाव में कई किसान धान की कटाई के बाद पराली को खेत में ही जला दे रहें है. किसानों का मानना है कि इससे खेत की जुताई कम करनी पड़ती है, जबकि इसके दुष्परिणामों से वे अनभिज्ञ हैं. कृषि विभाग की ओर से जागरूकता की कमी और लचर कानून व्यवस्था के कारण पराली जलाने वालों पर उचित कार्रवाई नहीं हो पाती, जिससे किसान बेखौफ होकर ऐसा करते रहते हैं. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पराली को खेत में जुताई कर उस पर यूरिया का छिड़काव कर दिया जाये तो वह जल्दी सड़कर खाद में बदल जाती है, जिससे खेती को लाभ होता है और मिट्टी की उर्वरा क्षमता बनी रहती है.
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