सहरसा के आनंद कुमार मिश्र बने SDM, पहले ही प्रयास में हासिल की 90वीं रैंक
सहरसा - आनंद कुमार मिश्र
BPSC Success Story: : सहरसा के सोनवर्षा प्रखंड के अतलखा गांव निवासी आनंद कुमार मिश्र ने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में पहले ही प्रयास में 90वीं रैंक हासिल कर एसडीएम बनने का गौरव प्राप्त किया है. उनकी सफलता से पूरे जिले में खुशी की लहर है.
सहरसा से विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट
BPSC Success Story: सहरसा जिले के सोनवर्षा प्रखंड स्थित अतलखा गांव के रहने वाले आनंद कुमार मिश्र उर्फ बंटी ने 70वीं बीपीएससी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) पद के लिए चयनित होकर जिले का मान बढ़ाया है. पहले ही प्रयास में 90वीं रैंक प्राप्त करने वाले आनंद की इस उपलब्धि से गांव से लेकर शहर तक खुशी का माहौल है और उनके घर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है.
गांव से निकलकर प्रशासनिक सेवा तक का सफर
आनंद कुमार मिश्र ने प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद वर्ष 2013 में धनबाद से मैट्रिक और रांची से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की. इसके बाद उन्होंने गणित विषय से स्नातक प्रतिष्ठा की पढ़ाई पूरी की. छात्र जीवन से ही वे पढ़ाई के प्रति गंभीर रहे और लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल करते रहे.
एक के बाद एक कई परीक्षाओं में हासिल की सफलता
आनंद ने अपने करियर की शुरुआत भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय में एलडीसी के रूप में चयनित होकर की. इसके बाद दूसरे प्रयास में वे शहरी विकास एवं आवासन मंत्रालय में अकाउंटेंट बने. तीसरे प्रयास में उन्होंने भारत सरकार के कस्टम विभाग में निवारक अधिकारी के पद पर सफलता हासिल की और गोवा में अपनी सेवा दी.
गोवा में नौकरी के दौरान शुरू की बीपीएससी की तैयारी
कस्टम विभाग में सेवा के दौरान ही आनंद के मन में समाज और गांव के लिए कुछ करने का विचार आया. इसी उद्देश्य से उन्होंने बीपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू की. मेहनत और लगन का परिणाम यह रहा कि 70वीं बीपीएससी परीक्षा में उन्होंने पहले ही प्रयास में 90वीं रैंक हासिल कर बिहार प्रशासनिक सेवा में अपनी जगह बनाई.
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BPSC Success Story: बड़े चाचा को दिया सफलता का श्रेय
आनंद कुमार मिश्र ने अपनी सफलता का श्रेय अपने बड़े चाचा शोभाकांत मिश्र को दिया है. उन्होंने कहा कि उनके चाचा हमेशा शिक्षा के माध्यम से समाज और जनहित में योगदान देने की प्रेरणा देते रहे, जिससे उन्हें आगे बढ़ने की ऊर्जा मिली.
आनंद की सफलता से उनके पिता सुधाकांत मिश्र, माता वीणा देवी, बहन निवेदिता कुमारी और दिव्या, भाभी शुभ्रा तथा भाई अनुज मिश्रा सहित पूरे परिवार में खुशी का माहौल है. ग्रामीणों और शुभचिंतकों ने इस उपलब्धि को क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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