सहरसा का बाबा वाणेश्वर मंदिर जहां सावन व महाशिवरात्रि में उमड़ते हैं श्रद्धालु, मनोकामना पूर्ण होने की है मान्यता
बाबा वाणेश्वर मंदिर. | Prabhat Khabar Network
Baba Baneshwar Temple : सहरसा के देवना स्थित बाबा वाणेश्वर मंदिर श्रद्धा और शिवभक्ति का एक प्रमुख केंद्र है. ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा और जलाभिषेक से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. सावन और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है.
Baba Baneshwar Temple : सहरसा के कहरा प्रखंड के देवना स्थित बाबा वाणेश्वर मंदिर श्रद्धा, शिवभक्ति और आध्यात्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है. वर्षों पुराने इस मंदिर से स्थानीय लोगों की गहरी धार्मिक आस्था जुड़ी है. मान्यता है कि बाबा वाणेश्वर के दरबार में सच्चे मन से की गयी पूजा और जलाभिषेक से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं. यही वजह है कि सामान्य दिनों में भी यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, जबकि सावन और महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर परिसर में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है.
शिवलिंग के दर्शन से प्रगाढ़ होती है श्रद्धा
मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को शांत और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव होता है. बाबा वाणेश्वर के शिवलिंग के दर्शन और जलाभिषेक के लिए सुबह से ही भक्त पहुंचने लगते हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार बाबा के प्रति लोगों की आस्था पीढ़ियों से चली आ रही है.
श्रद्धालु परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और मंगलकामना के लिए यहां विशेष पूजा-अर्चना करते हैं. मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और आरती का आयोजन भी होता रहता है.
सावन में कांवरियों से गुलजार होता है मंदिर
श्रावण मास में बाबा वाणेश्वर मंदिर का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है. दूर-दराज के इलाकों से कांवरिया और श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठता है.
सावन के दौरान सुबह की पूजा से लेकर शाम की आरती तक मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है. विशेष अवसरों पर बाबा का आकर्षक श्रृंगार किया जाता है और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा संपन्न होती है.
महाशिवरात्रि पर दिखता है भव्य धार्मिक नजारा
महाशिवरात्रि के अवसर पर बाबा वाणेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है. सुबह की आरती से शुरू होने वाला पूजा-अर्चना का सिलसिला देर रात तक चलता है. इस दौरान भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है.
महाशिवरात्रि पर कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी भव्य आयोजन किया जाता है. इससे धार्मिक आयोजन के साथ सांस्कृतिक रंग भी देखने को मिलता है.
सौंदर्यीकरण से बढ़ी मंदिर की भव्यता
हाल के वर्षों में मंदिर परिसर की साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है. इससे मंदिर परिसर की भव्यता और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं बढ़ी हैं. शांत वातावरण और प्राचीन धार्मिक परंपरा के कारण यह स्थान धार्मिक पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बनता जा रहा है.
देवना स्थित बाबा वाणेश्वर मंदिर आज भी कोसी क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र है. सावन, महाशिवरात्रि और अन्य विशेष अवसरों पर यहां उमड़ने वाली भीड़ इस मंदिर से लोगों के गहरे धार्मिक जुड़ाव की कहानी कहती है.
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