सहरसा में जहां हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजता है पूरा इलाका, सावन में उमड़ती है आस्था की भीड़

Published by : Pratyush Prashant Updated At : 22 May 2026 7:15 AM

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बाबा मटेश्वर धाम महादेव मंदिर

Aaj Ka Darshanसहरसा के काठो गांव स्थित बाबा मटेश्वर धाम महादेव मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लोकआस्था, शिवभक्ति और चमत्कारी विश्वास का ऐसा केंद्र है जहां हर दिन भक्तों की मनोकामनाएं लेकर भीड़ पहुंचती है.

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Aaj Ka Darshan: सहरसा से विनय कुमार मिश्र की विशेष रिपोर्ट — सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के काठो गांव स्थित बाबा मटेश्वर धाम महादेव मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है. सावन हो या महाशिवरात्रि, यहां शिवभक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. मान्यता है कि बाबा मटेश्वरनाथ के दरबार में सच्चे मन से मांगी गयी हर मुराद पूरी होती है. यही वजह है कि आसपास के गांवों के साथ दूर-दराज इलाकों से भी श्रद्धालु यहां जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.

स्वयंभू शिवलिंग से जुड़ी है गहरी मान्यता

स्थानीय लोगों के अनुसार बाबा मटेश्वर धाम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्राचीनता और लोकविश्वास है. कहा जाता है कि मंदिर में स्थापित शिवलिंग स्वयंभू रूप में प्रकट हुआ था. तभी से यहां पूजा-पाठ का सिलसिला लगातार जारी है. मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही भक्तों को आध्यात्मिक शांति और भक्ति का विशेष अनुभव होता है.

सुबह की आरती से लेकर शाम की पूजा तक मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है. ग्रामीणों का मानना है कि बाबा मटेश्वरनाथ की कृपा से पूरे क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है.

सावन में दिखती है शिवभक्ति की अनोखी तस्वीर

सावन महीने में बाबा मटेश्वर धाम का नजारा बेहद खास होता है. मुंगेर जिले के छर्रापट्टी से श्रद्धालु गंगाजल लेकर पैदल यहां पहुंचते हैं और बाबा का जलाभिषेक करते हैं. पूरे सावन महीने मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजता रहता है.

महाशिवरात्रि पर यहां हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है. इस दौरान कला संस्कृति विभाग की ओर से दो दिवसीय भव्य सांस्कृतिक आयोजन भी कराया जाता है. मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजा-अर्चना संपन्न होती है.

धार्मिक पर्यटन के रूप में बढ़ रही पहचान

बाबा मटेश्वर धाम अब धार्मिक पर्यटन के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है. यहां आने वाले श्रद्धालु पूजा-अर्चना के साथ ग्रामीण संस्कृति और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव करते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर परिसर में सुविधाओं के विस्तार और विकास कार्यों के कारण श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है.

भक्तों का विश्वास है कि बाबा मटेश्वरनाथ के दरबार से कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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