पीएम व शाह के खिलाफ केस दर्ज कराए चुनाव आयोग : वृंदा

Published at :27 Feb 2017 5:48 AM (IST)
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पीएम व शाह के खिलाफ केस दर्ज कराए चुनाव आयोग : वृंदा

सहरसा : उत्तर प्रदेश के चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह के प्रचार से बहुत कुछ स्पष्ट हो रहा है. भारत के इतिहास में पहली बार देश के प्रधानमंत्री बगैर किसी हिचकिचाहट के पार्टी के मंच पर खड़े होकर खुलेआम सांप्रदायिक प्रचार किया है. एक तरफ सुप्रीम कोर्ट […]

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सहरसा : उत्तर प्रदेश के चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह के प्रचार से बहुत कुछ स्पष्ट हो रहा है. भारत के इतिहास में पहली बार देश के प्रधानमंत्री बगैर किसी हिचकिचाहट के पार्टी के मंच पर खड़े होकर खुलेआम सांप्रदायिक प्रचार किया है. एक तरफ सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि धर्म व सांप्रदायिकता से राजनीति को अलग रखा जाये. चुनावी फायदे के लिए भाषणों में धर्म संबंधी प्रचार की अनुमति नहीं है. यह बातें राष्ट्रीय वामपंथी नेत्री वृंदा करात ने रविवार को सहरसा में कही.

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के चुनाव में जब पीएम मोदी व भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह ने देखा कि पहले और दूसरे चरण के मतदान में वे पीछे जा रहे हैं, तो खुलेआम सांप्रदायिक प्रचार का उपयोग करना शुरू कर दिया. करात ने कहा कि मेरा सवाल है कि क्या देश के पीएम कानून से ऊपर हैं. क्या उन पर सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट लागू नहीं होता है. क्या देश के शासक दल के अध्यक्ष अमित शाह जैसे लोगों पर कानून लागू नहीं होता. चुनाव आयोग उन्हें क्यों नहीं नोटिस दे रही है.
पीएम व शाह…
नोटिस देकर केस दर्ज करने की क्यों नहीं सिफारिश कर रही है.
बताएं कहां से आयी राशि : एक तरफ आर्थिक नीतियों के आधार पर खुलेआम देश के पीएम बड़े घरानों के बड़े उद्योगपतियों का पक्ष ले रहे हैं. दूसरी तरफ जनता की एकता को तोड़ने के लिए धर्म को हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं. वामपंथी नेत्री ने कहा कि एक तरफ पीएम पारदर्शिता की बात करते हैं. दूसरी ओर वे यूपी के चुनाव में लाखों-करोड़ों रुपये झोंक रहे हैं. पीएम व उनकी पार्टी पहले उसका हिसाब दें. इतनी बड़ी राशि कहां से आयी. कौन से बड़े उद्योगपतियों से उन्होंने पैसा लिया है. अरुण जेटली ने बजट में सुझाव दिया है कि बड़े कॉरपोरेट कूपन खरीद कर पार्टी को दें और उनका नाम नहीं बता जायेगा. इससे स्पष्ट होता है कि इनकी और बड़े उद्योगपतियों की सांठ-गांठ है. उनसे पैसे लेकर कालाधन को किस रूप में चुनाव प्रचार में खर्च किया जा रहा है. यह सवाल उठता है. उन्होंने कहा कि आरएसएस का मतलब ‘राष्ट्रीय सर्वनाश समिति’ है. जो आरएसएस देश के झंडे को नहीं माने. जो आरएसएस देश की आजादी के संघर्ष में विभाजन के बीज बोये. जो आरएसएस ब्रिटिश हुकूमत के सामने सिर झुका कर माफी मांगे. क्या देश की जनता ने आज आरएसएस को वोट दिया है. भाजपा ने पूरे तौर पर देश की सत्ता को आरएसएस के अधीन कर दिया है.
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