जल नहीं, शुद्ध पेयजल की है दरकार
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :22 Feb 2017 5:39 AM (IST)
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स्वास्थ्य की चिंता. कोसी इलाके के पानी में है आयरन की अधिक मात्रा कोसी इलाके के तीनों जिले सहरसा, सुपौल व मधेपुरा में पेयजल में आयरन की अत्यधिक मात्रा बड़ी समस्या है. जिले के विभिन्न जल स्रोतों की जांच में इस प्रकार की समस्या निकल कर सामने आयी है. सरकार द्वारा पहले उन जगहों पर […]
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स्वास्थ्य की चिंता. कोसी इलाके के पानी में है आयरन की अधिक मात्रा
कोसी इलाके के तीनों जिले सहरसा, सुपौल व मधेपुरा में पेयजल में आयरन की अत्यधिक मात्रा बड़ी समस्या है. जिले के विभिन्न जल स्रोतों की जांच में इस प्रकार की समस्या निकल कर सामने आयी है. सरकार द्वारा पहले उन जगहों पर आयरन रिमूवल प्लांट लगाने की योजना थी, लेकिन अभी उक्त योजना का क्रियान्वयन नहीं किया जा रहा.
सहरसा : बिहार सरकार के लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के कार्यालय में जल जांच के लिए प्रयोगशाला स्थापित है. जहां औसतन छह माह में लगभग 12 सौ चापाकल के पानी का परीक्षण कराया गया है. इस परीक्षण के बाद ये आंकड़े सामने आये हैं. इन आंकड़ों के मुताबिक सहरसा के महिषी, नवहट्टा, बनमा, सलखुआ प्रखंड के पानी में आयरन की अधिक मात्रा पायी गयी है, जबकि अन्य प्रखंडों में पानी कमोबेश पीने लायक है. खास तौर पर कोसी नदी से सटे इलाकों के गांव में आयरन की अधिकता से प्रभावित हैं. इसी वजह से इन इलाकों को काला पानी भी कहा जाता रहा है. इन इलाकों में लोगों को स्वाभाविक रूप से गैस और कब्जियत की शिकायत रहती है. पानी का स्वाद तो कसैला हो ही जाता है.
वैसे तो राज्य सरकार की ओर से इन समस्याओं से निबटने के लिए कई स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं. हैंडपंपों में वाटर प्यूरीफिकेशन यंत्र लगाने से लेकर बड़े-बड़े वाटर ट्रीटमेंट प्लांट प्रभावित इलाकों में लगाये गये हैं. मगर ये उपाय बहुत जल्द बेकार हो जा रहे हैं, क्योंकि समाज इनमें अपनापन नहीं महसूस करता. न इनकी ठीक से देखभाल की जाती है, न ही खराब होने पर ठीक कराने की कोई सुनिश्चित व्यवस्था है. ऐसे में इन इलाकों में लोगों को शुद्ध पेयजल हासिल हो पाना उनकी आर्थिक स्थिति पर निर्भर है. जो लोग फिल्टर खरीद सकते हैं और आरओ लगवा पाते हैं वे शुद्ध पानी पी रहे हैं. बाकी उसी दूषित और हानिकारक पानी पीने को विवश हैं.
पनप रही है जलजनित बीमारी
दूषित पानी पीने से कई बीमारियां चपेट में ले सकती हैं. ये बीमारियां गंदे पानी में रहने वाले छोटे-छोटे जीवाणुओं के कारण होती है, जो गंदे पानी के साथ से हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं. ऐसे पानी की वजह से होने वाली बीमारियों के कई कारक हो सकते हैं, जिनमें वायरस, बैक्टीरिया, प्रोटोजोआ और पेट में होने वाले रिएक्शन प्रमुख हैं. गंदा पानी पीने से बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकता है, जिसकी वजह से हैजा, टाइफाइड, पेचिश जैसी बीमारियां अपना शिकार बना सकती हैं. गंदा पानी पीने से वायरल इंफेक्शन हो सकता है, जिससे हेपेटाइिटस ए, फ्लू, कॉलरा, टायफाइड और पीलिया जैसी खतरनाक बीमारियां होती हैं.
रोग से बचाव के उपाय
जलजनित बीमारियों से बचने का सबसे सरल उपाय यह है कि पानी को उबाल कर पीये. जलस्रोतों के इर्द-गिर्द गंदगी न फैलने दें. चापानल व बोरिंग की दूरी शौचालय टैंक से तीस फीट की दूरी पर सुनिश्चित करें. चापानल में आयरन की मात्रा अधिक रहने के कारण उसके स्थान को बदल दे. इसके अलावा चापानल के पाइप की गहराई चालीस फीट से कम न रखें.
मुफ्त जांच की है व्यवस्था
जिला मुख्यालय स्थित लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण कार्यालय (पीएचइडी) परिसर में सरकार के स्तर से पेयजल की नि:शुल्क जांच के लिए प्रयोगशाला खुली है. जहां जिले का कोई भी व्यक्ति एक लीटर पानी लेकर जांच करवा सकता है. इस प्रयोगशाला में 24 घंटे के अंदर उन्हें पेयजल की रिपोर्ट भी उपलब्ध करायी जा रही है. प्रयोगशाला सहायक अमर कुमार बताते हैं कि स्पेक्टोमीटर, टीडीएस, आयरन जांच संबंधित कई उपकरण प्रयोगशाला में लगे हुए हैं.
महिषी, नवहट्टा, बनमा व सलखुआ प्रखंड के पानी में आयरन अधिक
इस इलाके के लोगों में रहती है गैस और कब्जियत की शिकायत
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